
त्वचा रोगों में लाभदायक है कचनार Publish Date : 10/12/2025
त्वचा रोगों में लाभदायक है कचनार
डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा
कचनार की छाल और पत्तियों में एंटीसेप्टिक गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा की एलर्जी, दाद और खुजली में आराम पहुंचाते हैं। कचनार एक औषधीय वृक्ष है, जिसके फूल, पत्ते और छाल सेहत के लिए लाभकारी होते हैं। इसकी छाल और पत्तियों में मौजूद एंटीसेप्टिक गुण त्वचा की एलर्जी, दाद और खुजली में आराम पहुंचाते हैं। इसके पत्तों का पेस्ट या इसकी छाल से तैयार काढ़े से नहाने से त्वचा के रोगों में आराम मिलता है।
कचनार की छाल और पत्तों से बना काढ़ा पीने से वजन कम होता है। कचनार के फूल और पत्ते एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर होते है, जो इम्युनिटी को बूस्ट करके आपको बीमारियों से बचाते हैं। आयुर्वेद में कचनार की छाल का इस्तेमाल हॉर्मोनल असंतुलन को ठीक करने और प्रजनन स्वास्थ्य में सुधार करने के लिए भी किया जाता है।
इसके पत्तों और फूलों में मौजूद एंटीबैक्टीरियल गुण घाव को जल्दी भरने में मदद करते हैं और संक्रमण से बचाते हैं। इसकी छाल के काढ़े का सेवन करने से ब्लड शुगर की मात्रा को संतुलित किया जा सकता है, जिससे मधुमेह के लक्षणों में सुधार होता है। कचनार के सूखे तने की राख को दंत मंजन के रूप में उपयोग करने से दांतों के दर्द में आराम मिलता है। इसके काढ़े से कुल्ला करने से मुंह के छालों में आराम मिलता है।
त्वचा रोगों में कचनार सूजन-रोधी, रोगाणुरोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण लाभकारी है, जो मुंहासे, एक्जिमा, घावों और सूजन को ठीक करने में मदद करता है। इसकी छाल, पत्तियों या फूलों का उपयोग पेस्ट, काढ़ा या लगाने के रूप में किया जाता है।
त्वचा रोगों में कचनार के लाभ

मुंहासे और फुंसियाँ: कचनार का कसैला (कषाय) गुण तेल और गंदगी हटाता है, और शीतलता (शीत) गुण पित्त को संतुलित करता है, जिससे मुंहासे कम होते हैं। इसका प्रयोग शहद के साथ पेस्ट बनाकर करें।
घाव और सूजनः इसके रोपन (उपचार) और शीतलता गुण घाव भरने और सूजन कम करने में सहायक हैं इसके लिए उबले पानी या पेस्ट का उपयोग करने से लाभ होता है।
एक्जिमा और जलनः इसके सूजनरोधी प्रभाव लालिमा, जलन और खुजली को कम करते हैं।
एंटीऑक्सीडेंटः मुक्त कणों से लड़कर त्वचा की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी करता है।
जीवाणुरोधीः मुँहासे और एक्जिमा जैसी स्थितियों में मदद करता है।
उपयोग करने के तरीके
पेस्टः कचनार पाउडर को शहद या पानी के साथ मिलाकर मुंहासों पर लगाएं. जड़ की छाल को पीसकर घावों पर लगाएं।
काढ़ाः पाउडर को पानी में उबालकर (जब तक पानी आधा न रह जाए) घावों को धोने या सूजन कम करने के लिए उपयोग करें।
लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।
