
कोलेस्ट्रॉल कम करने के घरेलू उपाय Publish Date : 09/12/2025
कोलेस्ट्रॉल कम करने के घरेलू उपाय
डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा
बदलती लाइफ स्टाइल के साथ ही घरेलू नुस्खों के के द्वारा भी कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल किया जा सकता है।
खानपान की आदतों में बदलाव के साथ ही इन दिनों कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के साथ ही बीमारियों के बढ़ते मामले चिंता का कारण बन गए हैं या फिर यह कहा जा सकता है कि कोलेस्ट्रॉल का बढ़ा हुआ स्तर आज के दौर में की एक आम समस्या बन चुकाा है। गलत खानपान, कम शारीरिक गतिविधियां और तनाव इसके प्रमुख कारण हैं। ऐसे में हमारे आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉक्टर सुशील शर्मा बता रहे हैं कि कैसे कुछ घरेलू और प्राकृतिक उपायों को अपनाकर कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित किया जा सकता है।
हालांकि संतुलित आहार और सही लाइफ स्टाइल दिल की बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम कर देते हैं, लेकिन कुछ ऐसे घरेलू नुस्खे भी हैं, जिन्हें नियमित रूप से अपनाकर कोलेस्ट्रॉल लेवल को काबू में किया जा सकता है।
कच्चा लहसुन, धमनियों का सफाईकर्मीः कच्चा लहसुन कोलेस्ट्रॉल कम करने के के लिए सबसे असरदार प्राकृतिक उपायों में से एक माना जाता है। सुबह के समय खाली पेट एक या दो कच्ची लहसुन की कलियां चबाने से धमनियों में जमा खराब (स्क्स्) कोलेस्ट्रॉल धीरे-धीरे कम होने लगता है। डॉ. शर्मा ने बताया कि आयुर्वेद में भी लहसुन को हृदय-स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी बताया गया है। डॉक्टर शर्मा कहते हैं कि 15 से 30 दिन तक इसका नियमित सेवन करने से, इसके लाभ बिलकुल साफ नजर आने लगते हैं।
अखरोट, ओमेगा-3 से भरपूर सुपर फूडः अखरोट ऊर्जा और पोषक तत्वों का एक बहुत अच्छा स्रोत होता है। इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड, मैग्नीशियम, फाइबर, मैंगनीज और कॉपर जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में आपकी मदद करते हैं। रोजाना सुबह चार अखरोट खाने से शरीर की रक्त वाहिनियां साफ होती हैं और स्क्स् कोलेस्ट्रॉल टूटकर वापस लीवर तक पहुंचने लगता है। हार्ट के मरीजों के लिए अखरोट का सेवन खास तौरपर लाभकारी माना जाता है। इसके अलावा अलसी के बीज भी बढ़ते कोलेस्ट्रॉल को काबू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनमें मौजूद घुलनशील फाइबर और ओमेगा-3 फैटी एसिड हृदय को स्वस्थ बनाए रखते हैं। अलसी के बीजों का पाउडर बनाकर इसे छाछ में मिलाकर पीने से कोलेस्ट्रॉल तेजी से कम होता है। इसके अलावा, इसे सब्जियों में शामिल करके भी सेवन बढ़ाया जा सकता है।
आंवला और एलोवेरा का जूस, प्राकृतिक डिटॉक्सः रोजाना सुबह खाली पेट एक चम्मच आंवला रस में एक चम्मच एलोवेरा रस मिलाकर पीने से कोलेस्ट्रॉल लेवल तेजी से कम किया जा सकता है। आंवला विटामिन ब् का अच्छा स्रोत है और इसमें मौजूद साइट्रिक एसिड शरीर की फेट को तोड़ने में सहायक होता है। एलोवेरा पाचन में सुधार करता है और शरीर को अंदर से साफ़ रखता है। डॉक्टर सुशील शर्मा कहते हैं कि विटामिन ब् और साइट्रिक एसिड युक्त फल खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में काफी मददगार हैं। आंवला, नींबू, संतरा, मौसमी और अनार जैसे फल शरीर में जमा वसा को गलाने का काम करते हैं और रक्त वाहिनियों को मजबूत बनाते हैं। उनका कहना है कि रोजाना ऐसे खट्टे फलों को आहार का हिस्सा बनाना कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण का सरल तरीका है।
काले चने, सस्ता और असरदार उपायः काले चने में प्रोटीन, फाइबर, आयरन, मैग्नीशियम और विटामिन की भरपूर मात्रा होती है। यह पाचन को सुधारते हैं और खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करते हैं। रातभर भिगोए हुए काले चने सुबह खाली पेट खाने से शरीर को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं और धमनियों में प्लार्क का जमाव कम होता है। जिस पानी में चने भिगोए जाते हैं, उसे भी पीने की सलाह दी जाती है। नींबू में मौजूद साइट्रिक एसिड शरीर की चर्बी और खराब कोलेस्ट्रॉल को तेजी से कम करने में सहायक होता है। सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में एक नींबू निचोड़ कर उसमें स्वादानुसार काला नमक मिलाकर पीने से कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद मिलती है, यह शरीर को डिटॉक्स करने में भी प्रभावी काम करता है।

किशमिश और बादाम, हेल्दी हार्ट कॉम्बिनेशनः रातभर भिगोई गई किशमिश और बादाम सुबह खाने से कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण में सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। बादाम में मौजूद हेल्दी फैट और एंटीऑक्सीडेंट हृदय को सुरक्षित रखते हैं। हालांकि, डायबिटीज के मरीजों को किशमिश सेवन करने की सलाह नहीं दी जाती है। कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करना पूरी तरह लाइफ स्टाइल और खानपान पर निर्भर करता है। उपरोक्त प्राकृतिक उपायों को नियमित रूप से अपनाकर न सिर्फ कोलेस्ट्रॉल कम किया जा सकता है, बल्कि हृदय को भी लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है। साथ ही, डाइटिशियन कहते है कि किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले अपने चिकित्सक या एक्सपर्ट डाइटिशियन से सलाह लेना बेहद आवश्यक है, खासकर यदि आप पहले से ही किसी दवा का सेवन कर रहे हैं।
लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।
