मिसकैरेज की समस्या से बचने के लिए आयुर्वेदिक टिप्स      Publish Date : 17/02/2025

        मिसकैरेज की समस्या से बचने के लिए आयुर्वेदिक टिप्स

                                                                                                                                                      डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा

गर्भावस्था के दौरान एक मां को अपनी देखभाल अच्छे ढंग से करनी होती है, क्योंकि उसके गर्भ में उसका अजन्मा शिशु पल रह होता है। कई बार अच्छी देखभाल के बावजूद भी महिलाओं का मिसकैरेज हो जाता है। मिसकैरेज होना शारीरिक और मानसिक रूप से पीड़ादायक होता है। मिसकैरेज होने के विभिन्न कारण हो सकते हैं।

                                                         

मिसकैरेज (गर्भपात) होना किसी भी कपल के लिए भावनात्मक दर्द और आघात का कारण होता है, जो इस दुनिया में एक नन्हीं सी जान के स्वागत का बेसब्री से इंतजार कर रहे होते हैं। मिसकैरेज के कारण कई महिलाएं मां नहीं बन पातीं, उनका मां बनने का सपना अधूरा रह जाता है और मिसकैरेज के कारण उन्हें शारीरिक-मानसिक पीड़ा के दौर से गुज़रना पड़ता है। मिसकैरेज होने के बहुत से कारण होते हैं, जिनमें से अधिकतर में चिकित्सीय कारण शामिल हैं। लेकिन ऐसा कुछ नहीं है, जिसे नियंत्रित नहीं किया जा सकता है।

हालांकि कुछ कारण को तो कंट्रोल नहीं किया जा सकता है, लेकिन अपनी लाइफ स्टाइल में थोड़ा सा सकारात्मक बदलाव करके कुछ मिसकैरेज केसेज को रोका जा सकता है। एक हेल्दी प्रेग्नेंसी की सफलता दर आंशिक रूप से इस बात पर निर्भर करती है कि आप अपने भ्रूण के लिए अपने गर्भ के अंदरूनी वातावरण को किस प्रकार बनाए रखती हैं। इसलिए, मिसकैरेज को होने से रोकने के लिए कुछ एहतियाती और आवश्यक कदम उठाने बहुत जरूरी है। स्वयं को हेल्दी रखने और बार-बार होनेवाले मिसकैरेज से बचने के लिए गर्भवती महिलाएं आयुर्वेद का सहारा भी ले सकती हैं। हम अपने इस इस आर्टिकल में मिसकैरेज से बचाव के लिए कुछ आयुर्वेदिक उपायों को बताने जा रहे है, साथ ही हमारे आयुर्वेदिक डॉक्टर, डॉ0 सुशील शर्मा ने कुछ टिप्स भी दिए हैं-

हमारे आयुवेर्दिक विशेषज्ञ बार-बार मिसकैरेज होने की समस्या के बारे में कहते हैं, ‘‘अगर बार-बार मिसकैरेज हो रहा है, तो बहुत सारे ऐसे फार्मूलेशन हैं, जिनसे प्रिवेंट मिसकैरेज को रोका जा सकता है।’’

सबसे पहले तो हम विरेचन करने की सलाह देते हैं। विरेचन पंचकर्मों में से एक है। इसमें रेचक औषधि के द्वारा शारीरिक विकारों अर्थात् उदर के विकारों की शुद्धि की जाती है। इसके अलावा घी के फार्मूलेशन को भी हम उपयोग में लाते हैं। इसके अलावा डेली रूटीन में योग- प्राणायाम करना भी बहुत जरूरी है। जड़ी-बूटी में शतावरी का उपयोग कर सकते हैं। साथ ही फलघृत का प्रयोग भी कर सकते हैं, यह एक प्रकार का घी है, लेकिन इसे डॉक्टर के परामर्श के बाद ही लेना चाहिए।

इन आयुर्वेद उपचारों को भी आजमाएं

                                                                      

डीटॉक्सिन्स करवानाः टॉक्सिन्स पहली मुख्य समस्या है। कंसीव करने से पहले, यदि कपल डीटॉक्सिन्स करवाते हैं, तो माना जाता है कि यह हेल्दी प्रेग्नेंसी में बहुत मददगार सिद्व होता है। एक क्लीन बॉडी और माइंड, गर्भस्थ भ्रूण के लिए आदर्श परिवेश का निर्माण करने और उसे बनाए रखने में काफी मददगार होता है।

त्रिफला चूर्णः त्रिफला चूर्ण एक आयुर्वेदिक औषधि है, जिसे महिलाओं में ‘‘दोष’’ या असंतुलन को ठीक करके गर्भपात को रोकने की क्षमता होती है। इसलिए अगर आप बार-बार मिसकैरेज के दौर से गुजर रही हैं, तो कंसीव करने से पहले किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से इसके सेवन करने के बारे में सलाह जरूर लें।

सात्विक भोजन को अपनाएं

गर्भधारण करने में ‘सात्विक’ आहार भी मदद करता है। सात्विक भोजन शुद्ध और ताजा होने के कारण गर्भवती महिला के लिए काफी लाभदायक माना गया है। गर्भवती महिला को अपने आहार में आसानी से पचने वाले पदार्थों का ही सेवन करना चाहिए। आसानी से पचने वाला आहार हेल्दी होता है।

मसालेदार भोजन, बासी भोजन और तैलीय भोजन को कंसीव करने से पहले और गर्भावस्था के दौरान कम कर देना चाहिए या फिर इससे यथासम्भव बचना ही चाहिए। प्रेग्नेंसी के दौरान अपने खानपान का पूरा ध्यान रखना मां की अहम जिम्मेदारी मानी गई है। इसलिए प्रेग्नेंसी के दौरान हेल्दी खाना खाने की सलाह दी जाती है, ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मां के खाने का असर बच्चे की सेहत पर पड़ता है।

गर्भावस्था में तनाव लेना मां-बच्चा दोनों के लिए है खतरा

                                                                               

स्ट्रेस आपके हेल्थ पर बहुत बुरा प्रभाव डालता है। प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को तनाव से दूर रहना चाहिए, क्योंकि तनाव गर्भावस्था के दौरान ना केवल शारीरिक और मानसिक थकान देता है, बल्कि गंभीर स्थिति होने पर यह मिसकैरेज का कारण भी बन सकता है।

एक हेल्दी प्रेग्नेंयसी के लिए और मिसकैरेज से बचने के लिए तनाव मुक्त जीवन जीना अगला महत्वपूर्ण कदम है। इसके लिए ऑफिस में ज्यादा काम करने और देर रात की पार्टियों से बचने की सलाह दी जाती है।

ब्रीदिंग एक्सरसाइज, मेडिटेशन और पर्याप्त नींद है बहुत जरूरी

प्रेग्नेंसी के दौरान एक प्रेग्नेंट महिला के लिए ब्रीदिंग एक्सरसाइज, मेडिटेशन करना और पर्याप्त नींद लेना बहुत जरूरी है। आयुर्वेद के विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित रूप से सुबह-शाम कुछ देर मेडिटेशन जरूर करना चाहिए, क्योंकि मेडिटेशन तनाव को कंट्रोल करने का रामबाण उपाय है। डीप-ब्रीदिंग वाली एक्सरसाइज करें, इससे मन शांत रहता है। साथ ही समय पर सोना और पर्याप्त नींद लेना गर्भवती महिला के लिए बहुत जरूरी है, इसका सकारात्मक प्रभाव बच्चे की शारीरिक और मानसिक ग्रोथ एवं उसकी सेहत पर भी पड़ता है।

एक्सरसाइज, योग और प्राणायाम करना भी जरूरी

                                                                      

प्रेग्नेंसी के दौरान हल्के एक्सरसाइज करना भी लाभदायक होता है। गर्भावस्था के दौरान शरीर को लचीला बनाए रखने में लांग वॉक, प्राणायाम और योग बहुत मदद करते हैं। हालांकि इसके लिए डॉक्टर द्वारा निर्देशित योग और एक्सरसाइज ही नियमित रूप से करना चाहिए, इससे दिमाग में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, शरीर की फ्लेक्सिबिलिटी बनी रहती है और यह मां और बच्चे की सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है।

लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।