
सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के लिए पारंपरिक उपचार Publish Date : 18/06/2026
सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के लिए पारंपरिक उपचार
डॉ0 दिव्यंशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस, जिसे कभी-कभी गर्दन का गठिया भी कहा जाता है, गर्दन की हड्डियों और डिस्क में होने वाली टूट-फूट के लिए प्रयोग किए जाने वाला एक सामान्य शब्द है। यदि आपको सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस है, तो आपकी गर्दन में दर्द या अकड़न महसूस हो सकती है। दवा और फिजियोथेरेपी की सहायता से इसके लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है।
सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस क्या है?

सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस गर्दन की रीढ़ की हड्डी में होने वाले किसी भी प्रकार के ‘घिसाव’ को दर्शाता है। ‘सर्वाइकल’ का तात्पर्य गर्दन से है। ‘स्पोंडिलोसिस’ तब होता है जब रीढ़ की हड्डी का कोई भी हिस्सा घिसने लगता है। स्वास्थ्य सेवा प्रदाता इसे कभी-कभी गर्दन का गठिया भी कहते हैं।
बढ़ती उम्र के साथ रीढ़ की हड्डी में होने वाले बदलाव बहुत आम और स्वाभाविक हैं। रीढ़ की हड्डी में बदलाव होने का सिलसिला आमतौर पर 30 साल की उम्र से शुरू हो जाता हैं। 60 साल की उम्र तक, लगभग 10 में से 9 लोगों को सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस की समस्या हो जाती है।
यदि आपको सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस है, तो आपकी गर्दन में दर्द, अकड़न या जकड़न महसूस हो सकती है। हालांकि अभी तक इसका कोई सफल उपचार उपलब्ध नहीं है, लेकिन उपचार से इसे बिगड़ने से रोका जा सकता है।
सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के लक्षण

कई बार सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस बिना लक्षणों के भी हो सकता है। यदि लक्षण दिखाई देते हैं, तो उनमें कुछ इस प्रकार के लक्षण शामिल हो सकते हैं:-
- गर्दन में दर्द होना।
- गर्दन में अकड़न रहना।
- गर्दन में कोई उभार या गांठ आदि का होना।
- अक्सर सिर दर्द बना रहना।
- यदि आपकी गर्दन में कुछ दिनों से अधिक समय तक दर्द या अकड़न महसूस होती है, तो किसी स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से बात करें।
- यदि रीढ़ की हड्डी में बदलाव के कारण उस पर दबाव पड़ता है, तो आपको अन्य लक्षण भी हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, आपको अंगों का सुन्नपन, मांसपेशियों में ऐंठन और/या चलने-फिरने में भी समस्या हो सकती है।
सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के कारण
बढ़ती उम्र गर्दन के स्पोंडिलोसिस का सबसे मुख्य कारण है। उम्र बढ़ने के साथ, रीढ़ की हड्डियों के बीच मौजूद लचीले गद्देनुमा हिस्से - यानी स्पाइनल डिस्क - सूख जाते हैं। इसे डीजेनेरेटिव डिस्क रोग के नाम से जाना जाता है। इसके कारण रीढ़ की संरचना में कई अन्य बदलाव भी हो सकते हैं, जैसेः
- रीढ़ की हड्डी के जोड़ों में मौजूद हड्डियां आपस में रगड़ खाती हैं (ऑस्टियोआर्थराइटिस)।
- रीढ़ की हड्डियों पर हड्डी के उभार आ जाता है।
- आपकी रीढ़ की हड्डी के संरेखण में परिवर्तन हो जाता है।
- हर्नियेटेड या उभरी हुई डिस्क।
- डिस्क की ऊंचाई का कम हो जाना।
- रीढ़ की हड्डी के आसपास की जगह का संकुचन (स्पाइनल स्टेनोसिस)।
सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के जोखिम
सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस एक प्राकृतिक और अपेक्षित प्रक्रिया है। लेकिन कुछ कारक इस प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं या इसे और खराब कर सकते हैं, जैसेः
- कोई ऐसा काम करना जिसमें आपको हर दिन घंटों ऊपर या नीचे देखना पड़ता है।
- गर्भाशय ग्रीवा स्पोंडिलोसिस का पारिवारिक इतिहास का होना।
- गर्दन में चोट लगने का इतिहास होना।
- अत्याधिक मोटापे की समस्या।
- भारी वस्तुओं को उठाने के लिए गर्दन पर जोर डालना।
- धूम्रपान करना।
इस स्थिति की जटिलताएं
गर्दन के स्पोंडिलोसिस के कारण रीढ़ की हड्डी को नुकसान पहुंचने पर जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसके दो मुख्य प्रकार हैं:
सर्वाइकल मायलोपैथीः यह तब होता है जब गर्दन में रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ता है। इससे हाथों में सुन्नपन या मांसपेशियों में कमजोरी महसूस हो सकती है।
सर्वाइकल रेडिकुलोपैथीः यह गर्दन में नस दबने की स्थिति है। इससे बांह तक फैलने वाला दर्द, मांसपेशियों में कमजोरी और झुनझुनी जैसी अनुभूति हो सकती है।
सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के कारण लंबे समय तक (क्रोनिक) गर्दन में दर्द भी हो सकता है। इनमें से प्रत्येक जटिलता आपके जीवन की गुणवत्ता को काफी हद तक प्रभावित कर सकती है। इसीलिए लक्षणों के प्रकट होते ही चिकित्सकीय सहायता लेना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
निदान और परीक्षण
एक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता आपकी शारीरिक जांच करेगा, जिसमें आपकी गर्दन में गांठ या उभार की जांच करना शामिल है। वे आपकी निम्नलिखित जांच भी करवा सकते हैं:
- गर्दन का लचीलापन।
- आपके हाथों, बांहों या पैरों की मांसपेशियों की ताकत और प्रतिक्रिया क्षमता का प्रभावित होना।
- चाल (चलने का तरीका) में बदलाव आना।
आपका डॉक्टर आपकी रीढ़ की हड्डी की विस्तृत तस्वीरें प्राप्त करने के लिए अन्य परीक्षणों की सलाह दे सकता है। कुछ परीक्षण यह जांचते हैं कि आपकी कंकाल की मांसपेशियां और नसें कैसे काम करती हैं। परीक्षणों में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं:
- एक्स-रे।
- सीटी या एमआरआई स्कैन।
- इलेक्ट्रोमायोग्राफी ( ईएमजी)।
- तंत्रिका चालन अध्ययन।
सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस का प्रबंधन और उपचार
सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस का उपचार मुख्य रूप से लक्षणों को कम करने और रीढ़ की हड्डी को गंभीर क्षति से बचाने में मदद करता है।
सामान्यतः, स्वास्थ्य सेवा प्रदाता गैर-सर्जिकल उपचारों से शुरुआत करते हैं। उदाहरण के लिए, वे निम्नलिखित की अनुशंसा कर सकते हैं:
- गर्दन और पीठ के ऊपरी हिस्से की मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करने के लिए फिजियोथेरेपी कराएं।
- बिना पर्ची के मिलने वाली दर्द निवारक दवाओं का प्रयोग न करें।
- सूजन कम करने के लिए NSAIDs या कॉर्टिकोस्टेरॉइड का उपयोग किया जा सकता है।
- मांसपेशियों को आराम देने वाली दवाएं।
- नरम गर्दन के कॉलर का अल्पकालिक उपयोग।
- यदि आपको गर्दन में काफी दर्द है, तो आपका डॉक्टर सर्वाइकल एपिड्यूरल स्टेरॉयड इंजेक्शन या रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन जैसे उपचारों की सिफारिश कर सकता है ।
- यदि आपकी रीढ़ की हड्डी दब गई है, तो आपको सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है। सर्जरी का प्रकार इस बात पर निर्भर करता है कि क्षति का कारण क्या है। उदाहरण के लिए, लैमिनेक्टॉमी में कशेरुकाओं की हड्डी की चाप को हटा दिया जाता है। एक अन्य प्रकार की सर्जरी स्पाइनल फ्यूजन है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।