
आटिज्म के लिए कारगर उपाय है थेरेपी Publish Date : 16/06/2026
आटिज्म के लिए कारगर उपाय है थेरेपी
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
अगर आपका, बच्चा लोगों को देखकर हंसता और बोलता नहीं या फिर कोई प्रतिक्रिया नहीं देता है, तो बच्चे की इस स्थिति को नजरअंदाज करने के करने के स्थान पर आपको बच्चे के लिए किसी अनुभवी चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए। क्योंकि यह समस्या आटिज्म की भी हो सकती है। आज के इस लेख में हमारे स्वास्थ्य विशेषज्ञ एवं जिला अस्पताल मेरठ के मेडिकल ऑफिसर डॉ0 दिव्यांशु सेंगर बता रहे हैं कि आटिज्म की समस्या से ग्रस्त बच्चों के जीवन को किस प्रकार से बेहतर बनाया जा सकते हैं, तो आइए, डॉ0 दिव्यांशु सेंगर से जानते हैं आटिज्म की समस्या से ग्रस्त बच्चों के बारे में-

पिछले कुछ वर्षों के दौरान बच्चों में आटिज्म स्पेक्ट्रम डिसआर्डर (एएसडी) के मामले अधिक सामने आए हैं। शिशु के जन्म लेने के कुछ महीने बाद से ही इस समस्या के संकेत दिखने लगते हैं, परन्तु बच्चे के अभिभावक इन्हें समझ नहीं पाते। हालांकि बच्चे की उम्र तीन से चार साल की होते ही स्थिति बिल्कुल साफ हो जाती है। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर 68 में से एक बच्चा आटिस्टिक पाया जाता है। आंकड़ों के अनुसार लड़कियों के मुकाबले लड़कों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है।
आनुवंशिक कारण होते हैं अधिक जिम्मेदार
जन्म से ही कुछ बच्चे आटिस्टिक क्यों होते हैं इसके पीछे कई कारण बताए जाते हैं, लेकिन जेनेटिक स्थिति को इसके लिए सबसे अहम वजह माना गया है। ऐसे में अगर आपका एक बच्चा आटिस्टिक है तो दूसरे बच्चे के भी आटिस्टिक होने की आशंका भी बढ़ जाती है। डीएनए में होने वाले अधिकांश परिवर्तन अपने आप आटिज्म का कारण नहीं बनते, बल्कि कई अन्य कारण भी होते हैं।
माता-पिता की दिनचर्या, खान पान, रहन सहन भी इस समस्या के लिए उतने ही जिम्मेदार बताए जाते हैं। कुछ बच्चों को मोनोजेनेटिक विकार और फ्रेजाइल एक्स सिंड्रोम के चलते भी आटिज्म हो सकता है। हालांकि अभी तक इस बीमारी के पीछे की कोई ठोस वजह सामने नहीं आई है।
आटिज्म के शुरुआती लक्षणः

- बच्चे का कम हंसना, आंखें चुराना और कम बोलना। जब शिशु किसी की गोद में जाकर हंसता नहीं या फिर आंखों से आंख नहीं मिला पाता है।
- इस बीमारी में आपका बच्चा शिशु सुनता जरूर है, लेकिन वह किसी बात के प्रति कोई भी प्रतिक्रिया नहीं देता है तो भी आटिज्म की समस्या हो सकती है।
- इस समस्या के दौरान बच्चे को बहुत जल्दी गुस्सा भी आ सकता है।
- बच्चे को सोने में या नींद में भी को कठिनाई हो सकती है। साथ ही उसे खाने-पीने में दिक्कत हो सकती है।
- बच्चे का एक ही बात को दोहराते रहना भी इस समस्या का संकेत माना जाता है।
आटिज्म के उपचार के दौरान दवा नहीं, थेरेपी है समाधान
आटिज्म से ग्रस्त बच्चे के उपचार के दौरान केवल आक्युपेशनल और बिहेवियरल थेरेपी को ही सबसे अधिक कारगर माना गया है। इन थेरेपी के जरिये बच्चों को लोगों से संवाद करने, प्रतिक्रिया देने और हंसने में मदद की जाती है। यह थेरेपी आटिज्म से पीड़ित बच्चों की दैनिक गतिविधियों में भाग लेने की क्षमता को सुधार करने में काफी सहायता प्रदान करती है।
पेशेवर मनोचिकित्सक की होती है आवश्यकता
अकेली दवाओं से इस बीमारी का इलाज संभव नहीं है। केवल थेरेपी और परिवार की मदद से ही बच्चा स्वयं को बेहतर महसूस कर सकता है, हालांकि थेरेपी के लिए एक कुशल और पेशेवर मनोचिकित्सक की आवश्यकता होती है, जिनकी हमारे देश में काफी कमी है। बच्चा आटिस्टिक है या नहीं, इसकी पुष्टि करने के लिए कोई विशेष जांच भी नहीं की जाती है। केवल बच्चे के हाव-भाव और माता-पिता संग बातचीत करने के बाद ही असल स्थिति समझ में आती है। थेरेपी से ऐसे बच्चों के जीवन को सामान्य बनाया जा सकता है और आटिज्म से ग्रस्त बच्चा एक सामान्य जीवन व्यतीत कर सकता है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।