मानव शरीर की कुछ सामान्य ऑर्थोपोडिक स्थितियाँ      Publish Date : 15/06/2026

मानव शरीर की कुछ सामान्य ऑर्थोपोडिक स्थितियाँ

                                                                                                  डॉ0 युवराज चौधरी एवं मुकेश शर्मा

जैसा कि हममें से अधिकतर लोग जानते हैं कि हमारे शरीर में कुल 206 हड्डियाँ होती हैं जो हमारे कंकाल तंत्र का निर्माण करती हैं। ये हड्डियाँ संयोजी ऊतकों की मदद से हमारी मांसपेशियों से जुड़ी रहती हैं। ये संयोजी ऊतक ही हमारे जोड़ों को गति करने में सहायता कर उसे आसान बनाते हैं।

समय के साथ, हमारे जोड़ों में दर्द और अकड़न होने लगती है। ऐसा बुढ़ापे या किसी दुर्घटना या चोट जैसे अन्य कारणों से हो सकता है। हमारे शरीर के विभिन्न जोड़ों जैसे घुटनों, कंधों, पैरों, हाथों, गर्दन, कंधे आदि में दर्द बुजुर्गों के लिए एक आम समस्या है। अधिकांश लोग बिना डॉक्टरी सलाह के मिलने वाली दवाओं से इस दर्द को कम कर लेते हैं। हालाँकि, अगर दर्द लगातार बना रहे, तो तुरंत आपाके चिकित्सा सहायता की आवश्यकता हो सकती है।

अस्थि विकार हमारे शरीर के जोड़ों को प्रभावित करने वाली समस्याएँ हैं। आमतौर पर, ये विकार बुढ़ापे के कारण होते हैं। हालाँकि, दुर्घटनाओं या चोटों के कारण होने वाले अस्थि विकारों के मामलों में भी आजकल काफी वृद्धि देखी जा रही है। ऐसे विकारों के लिए समय पर चिकित्सा उपचार प्राप्त कराना अत्यंत आवश्यक है। ऐसी स्थितियों का उचित उपचार न कराने से अस्थि रोगियों के जीवन की गुणवत्ता पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

कुछ सामान्य अस्थि विकारः

                                  

वात रोग- यह एक ऐसी स्थिति है जिसके परिणामस्वरूप शरीर के एक या एक से अधिक जोड़ों में लालिमा और सूजन आ जाती है। यह स्थिति सीधे तौर पर हड्डी से जुड़े टेंडन और लिगामेंट्स को प्रभावित करती है, जिससे वे सूज जाते हैं या सख्त हो जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप जोड़ों के बीच घर्षण के बढ़ने से मरीज को दर्द का सामना करना पड़ता है।

ऑस्टियोआर्थराइटिस- यह गठिया का एक प्रकार है जो घुटनों, कूल्हों और रीढ़ जैसे सामान्य भार वहन करने वाले जोड़ों को अधिक प्रभावित करता है। यह स्थिति हड्डियों के बीच संयोजी ऊतक को नष्ट कर देती है, जिससे हड्डियों का घर्षण बढ़ता है और दर्द होता है।

बर्साइटिस- बर्साइटिस बर्सा की एक सूजन है, जो हमारे शरीर के जोड़ों के बीच तरल पदार्थ से भरी एक थैली होती है। यह बर्सा हमारे शरीर के सभी प्रमुख जोड़ों जैसे कंधों, घुटनों, अकिलीज़ टेंडन, कूल्हों और कोहनी आदि पर स्थित होते हैं। हालाँकि यह एक अल्पकालिक स्थिति है, परन्तु यह काफी दर्दनाक भी हो सकती है और प्रभावित जोड़ की गति को सीमित कर सकती है।

कार्पल टनल सिंड्रोम- यह एक और आम हड्डी रोग संबंधी स्थिति है। कार्पल टनल हमारी कलाई के निचले हिस्से में स्थित होता है। जब इससे होकर गुजरने वाली कोई तंत्रिका दब जाती है या कोलेप्स हो जाती है, तो अंगूठे और बीच की तीन उंगलियों में दर्द होता है।

ऑस्टियोपोरोसिस- ऑस्टियोपोरोसिस, उम्र बढ़ने वाली महिलाओं में होने वाला एक सबसे आम हड्डी रोग है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें हड्डियाँ कमज़ोर और भंगुर हो जाती हैं। इससे फ्रैक्चर होने की संभावना बढ़ जाती है। कूल्हे, रीढ़ और कलाई इस स्थिति से सबसे अधिेक प्रभावित होते हैं।

इन सामान्य ऑर्थोपोडिक विकारों के जोखिम कारक

गठिया जैसी हड्डी संबंधी बीमारियाँ आमतौर पर उम्र से संबंधित होती हैं। हालाँकि, कुछ अन्य जोखिम कारक भी हैं जो आपको हड्डी संबंधी समस्या होने की संभावना बढ़ा सकते हैं। ये कारक हैं-

आयु- गठिया और ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी हड्डी संबंधी समस्याएं बुजुर्ग मरीजों में काफी आम और अधिक प्रचलित हैं।

आनुवंशिकता- गठिया या ऑस्टियोपोरोसिस का पारिवारिक इतिहास वर्तमान पीढ़ी में इन समस्याओं के विकसित होने की संभावना को बढ़ा सकता है।

अधिक वजन- जबकि अधिक वजन वाले लोगों में गठिया रोग विकसित होने का खतरा रहता है, वहीं दुबले-पतले और कम मांसपेशियों वाले लोगों में ऑस्टियोपोरोसिस काफी व्यापक है।

जीवनशैली के कारक- एक गतिहीन जीवनशैली से गठिया होने की संभावना बढ़ सकती है। हालाँकि, जोड़ों को आराम दिए बिना या उन पर बहुत अधिक दबाव डाले बिना किए गए व्यायाम या गतिविधि से बर्साइटिस हो सकता है। कार्पल टनल सिंड्रोम हाथों की बार-बार होने वाली गतिविधियों, जैसे टाइपिंग या हाथों से जुड़े किसी खेल को लंबे समय तक करने से होता है।

सामान्य अस्थि विकारों की रोकथाम

गठिया और ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी कुछ ऑर्थोपोडिक समस्याओं को रोका नहीं जा सकता क्योंकि ये अधिकतर उम्र से संबंधित या वंशानुगत होती हैं। हालाँकि, बर्साइटिस, कार्पल टनल सिंड्रोम, ऑस्टियोपोरोसिस और कई अन्य ऑर्थोपोडिक समस्याओं को निम्नलिखित तरीकों से रोका जा सकता है-

  • बार-बार दोहराए जाने वाले कार्यों से विराम लेने से कार्पल टनल सिंड्रोम को रोकने में मदद मिल सकती है।
  • शारीरिक गतिविधि से पहले उचित वार्म-अप व्यायाम करके आप आसानी से बर्साइटिस से बच सकते हैं।
  • आप कैल्शियम युक्त आहार लेकर और शराब व कैफीन के सेवन से दूर रहकर ऑस्टियोपोरोसिस को रोका जा सकता हैं।

सामान्य ऑर्थोपोडिक स्थितियों के उपचार

                                 

  • जोड़ों का दर्द काफी गंभीर हो सकता है और गतिशीलता को काफी कम कर सकता है। लंबे समय तक रहने पर, यह जीवन की गुणवत्ता पर हानिकारक प्रभाव डाल सकता है। डॉक्टर अधिकांश अस्थि-रोग संबंधी विकारों का इलाज फिजियोथेरेपी या दवाओं और थेरेपी के संयोजन से कर सकते हैं।
  • गठिया और ऑस्टियोआर्थराइटिस में दर्द को नियंत्रित करने के लिए एंटी-रुमेटिक दवाओं और अन्य दवाओं की आवश्यकता होती है।
  • बर्साइटिस और अन्य ऑर्थोपोडिक स्थितियों के प्रबंधन के लिए RICE (आराम, बर्फ, संपीड़न, उत्थान) या मालिश काफी लोकप्रिय है।
  • स्टेरॉयड इंजेक्शन कुछ ऑर्थोपोडिक स्थितियों के इलाज का एक अन्य तरीका होता है।
  • ब्रेसेज़ और स्प्लिंट्स प्रभावित जोड़ों को आवश्यक सहारा प्रदान करते हैं और अधिकांश ऑर्थोपोडिक स्थितियों के लिए उपचार योजना का हिस्सा होते हैं।
  • गंभीर गठिया या कार्पल टनल सिंड्रोम जैसी ऑर्थोपोडिक स्थितियों के लिए सर्जरी अंतिम उपाय है, जिनका प्रबंधन करना कठिन होता है।

लेखकः डॉ0 युवराज चौधरी, निदेशक, हंस मल्टीस्पेशलिस्ट हॉस्पिटल, कंकर खेड़ा मेरठ।