कम उम्र में हार्ट अटैकः कारण एवं समाधान      Publish Date : 18/12/2025

                    कम उम्र में हार्ट अटैकः कारण एवं समाधान

                                                                                                                                                                                डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

“स्ट्रेस और डिप्रेशन के कारण भी लोगों में कम उम्र में भी आ रहे हैं हार्ट अटैक, वैज्ञानिकों ने किया बड़ा खुलासा”-

स्ट्रेस से दिल की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी बीमारियां भी हो सकती हैं। स्ट्रेस कम करने के तरीके जानने के लिए पढ़ें हमारा आज का यह लेख-

स्ट्रेस जिंदगी का एक अभिन्न हिस्सा है, लेकिन जब इसका स्तर बहुत बढ़ जाता है, तो इससे दिल की समस्याओं सहित अनेक गंभीर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) के द्वारा की गई एक हालिया स्टडी में काम से जुड़े अधिक स्ट्रेस को दिल की सेहत पर खतरनाक प्रभाव करने वाला बताया गया है। स्टडी में पता चला कि गंभीर स्ट्रेस से दिल की धड़कन में अचानक बदलाव हो सकते हैं, जिससे वेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया और वेंट्रिकुलर फाइब्रिलेशन जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं और यह दोनों ही स्थितियाँ दिल के निचले हिस्सों को प्रभावित करती हैं।

                                                                                

इस स्टडी में 18-60 वर्ष की उम्र के 6,000 लोग शामिल किए गए थे, जिन्हें 18 वर्ष तक फॉलो किया गया। रिसर्च में यह नतीजा निकलकर सामने आया कि जो लोग अधिक स्ट्रेस महसूस करते हैं, उनमें एट्रियल फाइब्रिलेशन (AF) होने का खतरा 83 प्रतिशत अधिक होता है। यह एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें दिल की धड़कन अनियमित हो जाती है। स्टार हॉस्पिटल्स के सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. रमेश गुडापति इस बात पर जोर देते हैं कि स्ट्रेस के कारण होने वाली कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों को रोकने के लिए प्रभावकारी प्लानिंग और स्ट्रेस का मैनेजमेंट करना बहुत आवश्यक होता हैं।

स्ट्रेस दिल पर कैसे प्रभाव डालता है?

एट्रियल फाइब्रिलेशन (AF) वाले लोगों में, दिल में खून के थक्के बन सकते हैं, जो दिमाग तक पहुँचकर स्ट्रोक का कारण भी बन सकते हैं, या फिर आपके पैरों तक जाकर गैंग्रीन या यहां तक कि पैर काटने की स्थिति को भी बना सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, वेंट्रिकुलर फाइब्रिलेशन से दिल की धड़कन 300 बीट्स प्रति मिनट से अधिक हो सकती है, जिससे कार्डियक अरेस्ट और मरीज की मौत भी हो सकती है। एरिथमिया, या अनियमित दिल की धड़कन, उम्र के साथ अधिक आम हो जाती है, लेकिन स्ट्रेस इसके होने का एक बड़ा कारण हो सकता है।

स्ट्रेस के कारण

स्ट्रेस कई कारणों से हो सकता है, जैसे करियर, परिवार, फाइनेंस, पढ़ाई और सोशल रिलेशनशिप आदि। किसी भी चीज से बहुत ज्यादा उम्मीदें रखना भी स्ट्रेस का एक बड़ा कारण हो सकता है, क्योंकि इससे उन उम्मीदों को पूरा करने का लगातार प्रेशर बना रहता है, जिससे आपको फेलियर और निराशा महसूस होती है, जो मेंटल और फिजिकल हेल्थ पर बुरा असर डालती है। समय के साथ, बहुत अधिक स्ट्रेस से स्ट्रेस हॉर्माेन निकलते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, थकान हो सकती है, और दिल की खून की नसों में ब्लॉकेज का खतरा भी बढ़ सकता है।

डॉ. गुडापति बताते हैं कि अपनी सीमाओं को समझना और रियलिस्टिक उम्मीदें रखना, स्ट्रेस कम करने में आपकी मदद कर सकता है। अपने समय को अच्छे से मैनेज करना और एक्सरसाइज और मेडिटेशन जैसी आराम देने वाली एक्टिविटीज को अपनी दिनचर्या में शामिल करना भी उतना ही आवश्यक है।

एरिथमिया और अधिक स्ट्रेस के लक्षणः

                                                                        

  • दिल का बहुत धीरे, बहुत तेज या अनियमित रूप से धड़कना।
  • आराम करते समय भी दिल की धड़कन तेज होना।
  • बहुत अधिक थकान महसूस करना।
  • चक्कर आना या बेहोश हो जाना।
  • सामान्य कमजोरी महसूस करना।
  • स्ट्रेस का स्तर अधिक होना।
  • नींद पूरी न कर पाना।
  • मांसपेशियों में दर्द और सिरदर्द होना।
  • बहुत अधिक थकान अनुभव करना।
  • भावनात्मक बदलाव जैसे चिंता, चिड़चिड़ापन और डिप्रेशन आदि।
  • आवश्यकता से अधिक खाना या भूख न लगना।

तनाव को मैनेज और कम करने के तरीकेः

टाइम मैनेजमेंटः- पॉजिटिव एटीट्यूड के साथ अपना काम ऑर्गनाइज करने का प्रयास करें। असरदार टाइम मैनेजमेंट और रियलिस्टिक गोल सेट करना बहुत आवश्यक है।

रियलिस्टिक उम्मीदें:- अपने आप पर अधिक बोझ डालने से बचने के लिए प्रोफेशनल गोल को अपनी असली काबिलियत के साथ मिलाकर देखें।

परिवार और दोस्तों के साथ क्वालिटी समय व्यतीत करें- सोशल सपोर्ट स्ट्रेस कम करता है। अपनों के साथ समय बिताना और अपनी परेशानियां शेयर करना इसमें बहुत लाभकारी हो सकता है।

नियमित एक्सरसाइज करनाः- फिजिकल एक्टिविटी स्ट्रेस कम करने का सबसे प्रभावकारी तरीका है। रेगुलर एक्सरसाइज करते रहने से एंडोर्फिन रिलीज होते हैं, जो आपको अच्छा महसूस कराते हैं। योग और मेडिटेशन भी स्ट्रेस मैनेजमेंट में मददगार साबित हो सकता हैं।

हानिकारक आदतों से बचें:- स्ट्रेस से निपटने के लिए स्मोकिंग या शराब का इस्तेमाल करने से स्ट्रेस से जुड़ी हेल्थ प्रॉब्लम और भी अधिक खराब हो सकती हैं। अतः इन आदतों से बचे रहने का प्रयास करें।

बैलेंस्ड डाइट लें:- स्ट्रेस से होने वाली अधिक खाने की भूख या भूख न लगने की प्रॉब्लम से बचने के लिए हेल्दी डाइट प्लान का सहारा लें।

पूरी नींद लें:- ठीक से आराम और रिकवरी के लिए रोज 6-8 घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए।

स्ट्रेस से होने वाली कार्डियोवैस्कुलर प्रॉब्लम का उपचारः

कंजेस्टिव हार्ट फेलियर या एरिथमिया के जैसे गंभीर मामलों में, ब्लड क्लॉट को रोकने के लिए ब्लड थिनिंग (खेन को पतला करने वाली) दवाएं दी जा सकती हैं। वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन के मामलों में, हार्ट रिदम को रेगुलेट करने के लिए इम्प्लांटेबल डिवाइस की जरूरत हो सकती है। डॉ. गुडापति इस बात पर जोर देते हैं कि स्ट्रेस से होने वाली दिल की धड़कन की प्रॉब्लम की शुरुआती पहचान और समय पर उचित उपचार, अधिक गंभीर हेल्थ कॉम्प्लिकेशन से बचने के लिए बहुत आवश्यक होता है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।