
तकनीकी और नवाचार कौशल पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन Publish Date : 27/03/2026
तकनीकी और नवाचार कौशल पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन
सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के बायोटेक्नोलॉजी कॉलेज में "SC-ST क्लस्टर्स के लिए तकनीकी और नवाचार कौशल" विषय पर एक दिवसीय भव्य कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट निदेशालय और बायोटेक्नोलॉजी कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया, जिसे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) नई दिल्ली द्वारा वित्त पोषित "उच्च शिक्षा के सुदृढ़ीकरण और विकास" योजना के तहत संचालित किया गया।
विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रों को आधुनिक तकनीकी कौशल और स्वरोजगार के अवसरों के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ

कार्यशाला का शुभारंभ “वंदे मातरम्” के ओजस्वी गायन और सभी उपस्थित दिग्गजों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट निदेशक प्रो. आर. एस. सेंगर ने कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की और उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों का परिचय कराया। इसके पश्चात्, डॉ0 सत्य प्रकाश ने कार्यशाला के विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला और इसके मुख्य उद्देश्य (मोटो) से सभी को अवगत कराया। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. पंकज चौहान ने दिन की महत्ता (राम नवमी) का उल्लेख किया और मुख्य अतिथि, शोभित विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. अमर प्रकाश गर्ग द्वारा समाज और शिक्षा के क्षेत्र में दिए गए अतुलनीय योगदान को रेखांकित किया।
विशेषज्ञों के ज्ञानवर्धक व्याख्यान

मुख्य अतिथि डॉ. अमर प्रकाश गर्ग ने अपने संबोधन में बायोटेक्नोलॉजी, बायोफर्टिलाइज़र और जीन थेरेपी के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि कैसे बायोटेक्नोलॉजी न केवल वैज्ञानिक विकास, बल्कि धनोपार्जन और स्टार्टअप का एक बेहतरीन माध्यम बन सकती है। उन्होंने छात्रों को कई नवोन्मेषी विचारों (innovative thoughts) और सेटअप आइडियाज से से भी परिचित कराया।
सत्र के दौरान, डॉ. नीलेश कपूर ने "नवाचार तकनीकों" (Innovation Techniques) पर अपना व्यावहारिक व्याख्यान दिया। उन्होंने छात्रों को उन्नत बायोटेक्नोलॉजिकल उपकरणों, बायोटेक्नोलॉजी और नैनोटेक्नोलॉजी में स्टार्टअप की अपार संभावनाओं के बारे में विस्तार से बताया।

अरुणाचल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडीज के पूर्व डीन प्रोफेसर अजय अग्रवाल ने छात्रों को "स्वस्थ दिमाग का निवास स्वस्थ शरीर में होता है" का संदेश देते हुए स्वास्थ्य और फिटनेस के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने व्यस्तता के बावजूद अगले कार्य दिवस पर एक और व्याख्यान देने का वादा किया। उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. अश्वनी गोयल ने ऊर्जा के विभिन्न रूपों - शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक - के महत्व और उनके बीच संतुलन पर चर्चा की।
बायोइन्फॉर्मेटिक्स के महत्व पर बोलते हुए डॉ. बुधयश गौतम ने बताया कि कैसे यह क्षेत्र बायोटेक्नोलॉजी में एक क्रांतिकारी भूमिका निभा रहा है।
अथक प्रयासों से सफल हुआ आयोजन

इस वृहद कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रो. आर. एस. सेंगर, डॉ. पंकज चौहान, डॉ. नीलेश कपूर, और डॉ. बुधयश गौतम ने अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन विशेषज्ञों के अथक प्रयासों और सही मार्गदर्शन से छात्रों को विषय के व्यावहारिक और तकनीकी पहलुओं की गहन जानकारी प्राप्त हुई। उन्होंने छात्रों के उज्जवल भविष्य के लिए उन्हें पूरा समर्थन दिया।
कार्यशाला के सुचारू संचालन में भूमि प्रताप, सलोनी, यश वर्धन, वंश आर्य, तनिष्का शर्मा, विधि चौहान, डी.वाई. तथागत, चिरंजीव चौधरी, तन्मय, गरिमा शर्मा, अविनाश मद्धेशिया, अंकिता सिंह, प्रिंस कुमार कुशवाहा, वर्तिका चौधरी और रीति वर्मा ने अपना सक्रिय सहयोग दिया।
अंत में, कार्यक्रम के आयोजकों द्वारा सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। विशेषज्ञों ने उम्मीद जताई कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से छात्रों में न केवल आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि वे भविष्य में बेहतर उद्यमी के रूप में भी उभरेंगे।
