प्रचार-प्रसार में कारोबार      Publish Date : 01/04/2026

                 प्रचार-प्रसार में कारोबार

                                                                                                                    प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

फ्लेक्स प्रचार सामग्रियों की मांग वैसे तो हर सीजन में रहती है, लेकिन चुनावों के दौरान इनकी मांग और ज्यादा बढ़ जाती है। हर पार्टी और नेता को अपने-अपने क्षेत्र में चुनाव प्रचार के लिए बड़ी संख्या में होर्डिंग-बैनर, फ्लेक्स और प्रिंट इत्यादि सामग्री की जरूरत होती है। चुनावी माहौल के बीच फ्लेक्स प्रिंटिंग के कारोबारियों की तो पौ बारह होती है। बैंक लोन की सहायता से फ्लेक्स प्रिंटिंग यूनिट लगाना आपके लिए लाभ का कारोबार हो सकता हैः-

फ्लेक्स बैनर-होर्डिंग का आजकल हर कहीं जलवा है। है। कहीं भी चले जाइए, रास्ते में, हाईवे पर नेताओं के बधाई संदेश, रियल एस्टेट कंपनियों के बैनर, उत्पादों के विज्ञापन या फिर दुकानों के साइन बोर्ड दिखना इन दिनों आम बात हो गई है। बाजारों में कोई भी दुकान हो, शोरूम हो या मॉल हो। उन पर भी पत्लेक्स बोर्ड लगा जरूर दिख जाएगा। इन फ्लेक्स बोर्ड की खूबी यह है कि यह सूरज की रोशनी में तो दिखेगा ही। रात में भी इनकी चमक देखने लायक होती है, क्योंकि इनमें रोशनी के लिए ट्यूबलाइट और एलईडी लाइटें लगी होती हैं।  पलेक्स होडिंग बैनर्स की दूसरी खूबी यह है कि ये पीवीसी शीट पर बने होते हैं, जो काफी लचीले और मजबूत होते हैं। कलर भी इन पर अच्छा दिखता है। ये कागज और कपड़े के बने बैनर-पोस्टर से कहीं अधिक टिकाऊ भी होते हैं। यही कारण है कि पिछले कुछ सालों में प्रिंटिंग का कारोबार कई गुना अधिक बढ़ चुका है।

बढ़ रहा कारोबार

                                    

फ्लेक्स प्रिंटिंग के लिए अब कई नई मशीनें आ गई है, जिससे कॉस्टिंग भी कम हुई है और अलग- अलग क्वालिटी के फ्लेक्स प्रिंट तैयार करना भी आसान हो गया है। जहां तक इस कारोबार के भविष्य का सवाल है, तो जब तक मार्केटिंग और पब्लिसिटी चलती रहेगी, वह काम भी चलेगा, क्योंकि सभी कंपनियों के लिए अपने उत्पादों का प्रचार-प्रचार करना जरूरी है। आए दिन नए-नए उत्पाद लांच हो रहे हैं। जगह-जगह आउटलेट्स खुल रहे हैं। इनकी ब्रांडिंग के लिए कंपनियां बड़ी संख्या में बैनर, होडिंग, विनायल और साइन बोर्ड वगैरह तैयार कराती रहती हैं। अगर कोई व्यक्ति एक छोटी सी दुकान भी खोलता है या अपना सैलून शुरू करता है, तो उसे भी फ्लेक्स मैटीरियल की जरूरत होती है। मैं इस कारोबार में पिछले 15 सालों से हूं। हम तो अपने क्लाइंट को आउटडोर मीडिया सर्विस भी देते हैं, जहां भी उन्हें अपने होर्डिंग-बैनर लगवाने हैं, हम लगवा भी देते हैं। जैसे वोडाफोन जो कि हमारा एक क्लाइंट है, बीते दिनों उसे यूपी में अपने होडिंग-बैनर लगवाने थे, हमने उनका पलेक्स मैटीरियल तैयार कराकर उसे उनकी बताई जगहों पर लगवाया भी था।

कहने का मतलब है कि इस फील्ड में कारोबार और कमाई की कोई सीमा नहीं है। अगर आपको वोडाफोन, एयरटेल जैसी कोई एक भी बड़ी कंपनी का प्रिंटिंग मैटीरियल बनाने और उसे शहरों में लगवाने का कॉन्ट्रैक्ट मिल गया, तो फिर आपको कहीं और जाने की जरूरत ही नहीं। बड़े- बड़े क्लाइंट भी आजकल ऐसी ऐड कंपनियों को अधिक तवज्जो दे रही हैं, जहां उन्हें एक ही छत के नीचे सारी सुविधाएं मिल जाएं।

लागत और संसाधन

                                  

प्रिंटिंग के इस कारोबार के लिए आपके पास 10 से 15 लाख रुपये की पूंजी होनी चाहिए। दरअसल, फ्लेक्स प्रिंटर खरीदने का खर्च ही करीब 10 लाख रुपये आ जाता है। वैसे तो मार्केट में 20 से 25 लाख रुपये तक की मशीनें भी आ रही हैं। लेकिन शुरू शुरू में इस 10 लाख की मशीन से ही आपका काम चल जाएगा। इतनी कीमत में आप आराम से कोई भी देसी, चाइनीज या जापानी मशीन खरीद सकते हैं। हालांकि तकनीक और एकुरेसी के मामले में चीनी और जापानी मशीनें ज्यादा अच्छी मानी जाती हैं। एक ऑटोमेटिक मशीन से आप एक शिफ्ट में 10 से 12 घंटे काम ले सकते हैं। अगर आपके पास ऑर्डर ज्यादा है, तो दूसरी शिफ्ट में भी इससे काम ले सकते हैं। अन्य संसाधन के तौर पर इंक, रॉ मैटीरियल और डिजाइनिंग के लिए कंप्यूटर और स्कैनर की भी आवश्यकता पड़ेगी। यह कारोबार आप 100 गज के एरिया में शुरू कर सकते हैं।

ट्रेनिंग और मैनपावर

यह काम आप दो लोगों से भी शुरू कर सकते हैं। इनमें एक मशीन चलाने के लिए चाहिए और एक कंप्यूटर पर डिजाइनिंग का काम देखने के लिए। मशीन चलाने की बेसिक जानकारी तो जहां से आप मशीन खरीदते हैं, वही लोग दे देते हैं। लेकिन डिजाइनिंग के लिए व्यक्ति को कुशल होना चाहिए। इसकी समुचित जानकारी के लिए आप कुछ समय के लिए किसी प्रिंटिंग कंपनी में काम कर सकते हैं।

लोन की सुविधा

इन दिनों मार्केट में कुछ ऐसे डीलर हैं, जो मशीनरी खरीदने पर लोन मुहैया कराते हैं। इसके अलावा बैंकों से भी लोन सकते हैं। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत भी 10 लाख लोन दिया जा रहा है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।