बच्चों में होने वाले कैंसर और उनकी रोकथाम      Publish Date : 29/09/2026

बच्चों में होने वाले कैंसर और उनकी रोकथाम

                                                                                                  डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

  • "बच्चों के कैंसर के उपचार में बाधक है जागरूकता की कमी"

मोटापा, तंबाकू, अल्कोहल जैसे कारणों से अक्सर वयस्कों में कैंसर होने की आशंका रहती है, लेकिन बच्चों में कैंसर होने के पीछे अन्य कारण जिम्मेदार होते हैं। कैंसर तरह-तरह के लक्षणों पर निर्भर करता है। हमारे देश में कैंसर के प्रति अवेयरनेस बहुत कम है।

बचाव के उपाय:

  • बच्चे को सही आहार दें।
  • समय पर टीके लगवाएं।
  • साफ वातावरण दें।
  • संक्रमण से बचाएं।

बच्चों में कैंसर के मामले

भारत में बच्चों से संबंधित हैं यानी कैंसर के 10 मामलों में से सात भारत से आते हैं। रिपोर्ट बताती है कि बच्चों में ल्यूकेमिया सबसे आम तरह का कैंसर है, 35 से 50 प्रतिशत मामलों में यही चिह्नित होता है।

वयस्कों से अलग हैं बच्चों का कैंसर : इसकी सबसे बड़ी वजह डीएनए में होने वाले बदलाव (म्यूटेशन) हैं। वयस्कों में कैंसर 'तंबाकू, अल्कोहल, मोटापा या हानिकारक पदार्थों के संपर्क से जुड़े हो सकते हैं, लेकिन बच्चों में ज्यादातर कैंसर इन कारणों से नहीं होते। जब बच्चा बढ़ रहा होता है, तो नई कोशिकाएं तेजी से बनती हैं। इस दौरान कभी-कभी डीएनए की कॉपी बनने में गलतियां हो जाती हैं। सामान्य तौर पर शरीर का डीएनए रिपेयर मैकेनिज्म और प्रतिरक्षा प्रणाली इन्हें संभाल लेते हैं, लेकिन अगर ये बदलाव ठीक नहीं हो पाते, तो वे कोशिकाओं की वृद्धि पर असर डाल सकते हैं और समय के साथ कैंसर विकसित हो सकता है। कुछ मामलों में जेनेटिक सिंड्रोम या दुर्लभ आनुवंशिक बीमारियां भी जोखिम बढ़ाती हैं।

बच्चों में ल्यूकेमिया की समस्या : ल्यूकेमिया यानी ब्लड कैंसर, बच्चों में सबसे ज्यादा पाया जाने वाला कैंसर है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि बचपन में बोन मैरो बहुत सक्रिय रहता है। बोन मैरो में कोशिकाएं तेजी से बनती हैं और विभाजित होती रहती हैं। इस दौरान असामान्य बदलाव बीमारी का कारण बनते हैं। अधिकांश बच्चों में ल्यूकेमिया का कोई एक निश्चित कारण नहीं मिलता। यह किसी एक भोजन, संक्रमण या माता-पिता की किसी गलती से नहीं होता। ज्यादातर मामलों में यह शरीर के अंदर होने वाले आनुवंशिक बदलावों का परिणाम होता है। शुरुआती जांच में कैंसर की पहचान होने से उपचार आसान हो जाता है।

कैंसर होने पर क्या है उपाय

अगर किसी बच्चे का कैंसर का इलाज चल रहा है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार संक्रमण से बचाव, सही पोषण और नियमित फॉलो-अप इलाज की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अच्छी बात यह है कि आधुनिक इलाज की बदौलत बच्चों में होने वाले कई प्रकार के कैंसर का समय पर इलाज शुरू होने से जीवन सामान्य हो सकता है।

बरतें जरूरी सावधानी

  • बच्चों में अधिकांश कैंसरों को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता। ये अक्सर जीवनशैली से नहीं, बल्कि आनुवंशिक बदलावों से जुड़े होते हैं।
  • अगर बच्चे को लंबे समय तक बुखार रहे, बार-बार संक्रमण हो, बिना कारण खून आए, लगातार हड्डियों में दर्द हो, आंख में सफेद चमक दिखाई दे या कोई असामान्य गांठ महसूस हो, तो जांच में देरी नहीं करनी चाहिए।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।