
स्तन कैंसर: रोग से बड़ा है डर कि कहीं साथ न छोड़ दे हमसफर Publish Date : 28/09/2026
स्तन कैंसर: रोग से बड़ा है डर कि कहीं साथ न छोड़ दे हमसफर
डॉ0 दिव्यंशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
स्तन में गांठ यदि यह कैंसर हुआ तो सर्जरी होगी ही। साथी मेरे बाल भी उड़ जाएंगे और मेरा स्तन हटा दिया जाएगा। इसके बाद मैं सुंदर भी नहीं लगूंगी तो ऐसे में मेरे पति मेरा साथ न छोड़ दें। बच्चों को अपने आंचल से दूध कैसे पिला सकूंगी। अब यदि इसके बारे में अपने पति को बताना चाहें भी तो इन्हीं आशंकाओं के डर से उनके कदम ठिठक जाते। इससे मर्ज बढ़कर दूसरी-तीसरी स्टेज तक पहुंच गया। एसएन मेडिकल कॉलेज में हुए शोध में इलाज में देरी की यह खास वजह सामने आई हैं।
एसएनएम विभाग को स्तन कैंसर से पीड़ित 20 से 50 साल की 95 महिलाओं पर 2024-26 तक यह शोध किया। इसमें 26 फीसदी कामकाजी और 74 प्रतिशत घरेलू महिलाएं शामिल रहीं। इसमें 3 फीसदी अशिक्षित, 58 फीसदी इंटर पास और 39 फीसदी उच्च शिक्षित रहीं। इसमें 87 फीसदी महिलाओं ने सेल्फ डिटेक्ट से स्तन कैंसर की आशंका होने पर भी वह अपनी इस बीमारी को छिपाती रहीं।
इस शोध के दौरान महिलाओं ने चिकित्सकों को बताया कि उन्हें इस बात का डर था कि सर्जरी हुई तो स्तन के बिना मैं कैसे लगूंगी। पति हीनभावना रख सकते हैं। साथ छोड़ दिया तो मायके वालों पर बोझ बन जाऊंगी। बच्चे हुए भी तो कैसे पालूंगी (स्तनपान कराऊंगी)। पाप कर्म का दोष देकर लोग क्या सोचेंगे। इन्हीं ऊहापोह में समय बीतता गया लेकिन बाद में उनकी यह सोच गलत साबित हुई। बीमारी में पति और सभी परिजन ने भरपूर साथ दिया और उनका इलाज भी कराया।
95 मरीजों पर किया शोध: उम्र 20 से 50 साल के बीच
- 87 फीसदी को थी बीमारी की आशंका।
- 74 फीसदी थी घरेलू महिलाएं।
जांच, इलाज और आर्थिक तंगी भी देरी की वजह बनी
एसएनएम विभाग की डॉ. रेनू अग्रवाल ने बताया कि शोध में पाया कि 95 में से 13 फीसदी महिलाओं के स्तन कैंसर के इलाज में विशेषज्ञों की कमी, संसाधनों की कमी और आर्थिक तंगी समेत अन्य वजहें भी शामिल रहीं। ऐसे में कैंसर मरीजों के लिए संस्थानों में विशेष व्यवस्था बनाने की जरूरत है। हालांकि, इसके लिए सामाजिक संगठनों को भी आगे आना चाहिए।
ये लक्षण तो डॉक्टर को दिखाने में न करें देरी
- स्तन में गांठ होना, जिसमें दर्द न हो।
- स्तन की त्वचा में संतरे के छिलके की तरह गड्ढे पड़ना।
- निप्पल से रक्तस्राव होना, कांख में गांठ होना।
- स्तन की त्वचा का लाल होना, निप्पल का अंदर धंसना।
गांठ में दर्द, आशंका से देर से इलाज
ओपीडी में कुल मरीजों में 24 फीसदी स्तन कैंसर के हैं। अभी 153 मरीजों का इलाज चल रहा है। इसमें अधिकांश मरीज दूसरी-तीसरी स्टेज पर आ रहे हैं।
लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।