
हृदय रोग का पता चलने के बाद उचित उपचार का चयन Publish Date : 22/09/2026
हृदय रोग का पता चलने के बाद उचित उपचार का चयन
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
एंजियोग्राफी में ब्लॉकेज दिखने के बाद सही इलाज क्या होना चाहिए, इसका हमेशा एक सीधा जवाब नहीं में होता है। विशेष रूप से, जब दो डॉक्टरों की राय अलग-अलग हो, तो फैसला करना कठिन हो जाता है। इसलिए आप से अपील है कि केवल ब्लॉकेज के प्रतिशत को देखकर घबराना नहीं चाहिए। दवा, स्टेंट या बाईपास सर्जरी तीनों में से किसे चुनना बेहतर होगा, इस पर विशेषज्ञों की राय क्या रहती है बता रहे हैं हमारे स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ0 दिव्यांशु सेंगर-
डॉक्टर ने 58 साल के रमेश चंद्र को एंजियोग्राफी की सलाह दी। पिछले कुछ दिनों से वह थोड़ा सा भी चलने पर थक जाते थे। सीने में भारीपन के साथ कंधे और पीठ में भी लगातार हल्के दर्द की शिकायत थी। एंजियोग्राफी में जब दिल की नसों में ब्लॉकेज दिखा, तो रिपोर्ट के साथ ही रमेश चन्द्र की उलझनों का बढ़ जाना स्वाभाविक है।
तमिलनाडु की रहने वाली एंजिला बताती है कि उनकी एंजियोग्राफी और जांच में दो नसों में 85% के करीब ब्लॉकेज पाया गया। एक डॉक्टर स्टेंट की सलाह दे रहे थे, वहीं दूसरे डॉक्टर तुरंत बाईपास सर्जरी पर जोर दे रहे थे। ऐसे कई मरीजों को इस तरह की दुविधा में रहते हैं कि स्टेंट लगवाया जाए या फिर हार्ट की बाईपास सर्जरी कराई जाए।
इलाज के फर्क को अच्छी तरह से समझिए
एंजियोप्लास्टीः दिल में ब्लॉकेज जब किसी ऐसी जगह में गंभीर होती है कि वहां दवा भी ठीक काम न कर सके या मरीज का इलाज तय करने के लिए नसों की स्थिति देखना जरूरी हो, तो उस समय मरीज की एंजियोग्राफी की जाती है। ज्ञात हो कि यह बीमारी देखने के लिए एक जांच है, कोई इलाज नहीं। इलाज या जांच भी रक्त वाहिका से कैथेटर डालकर, गुब्बारे और स्टेंट-नेट से ब्लॉकेज वाली जगह को खोलना और प्रवाह को फिर से सामान्य बनाया जा सकता है।
एंजियोप्लास्टीः
संकीर्ण या बंद नस को खोलने की प्रक्रिया। इसमें गुब्बारे के जरिए नस को खुलवाकर वहां पर स्टेंट लगा दिया जाता है।
बाईपास सर्जरीः ब्लॉकेज खोलने के बजाय रक्त के बहाव के लिए एक वैकल्पिक रास्ता बनाकर ब्लॉकेज से आगे रक्त पहुंचाने का नया रास्ता बनाया जाता है।
ओपन हार्ट बाईपास सर्जरी: ओपन हार्ट सर्जरी में मरीज की छाती को खोल कर नई नस से बाईपास सर्जरी की जाती है।
रोबोटिक बाईपास सर्जरी: दिल की इस सर्जरी में एक छोटे चीरे के जरिए रोबोट की मदद से बाईपास की जाती है। रोबोट जो सर्जन ही नियंत्रित करते हैं। यह अभी कुछ मामलों में संभव हो सकती है, लेकिन यह हर मरीज के लिए अभी यह सुविधा उपलब्ध नहीं है।
गुरुग्राम स्थित फोर्टिस अस्पताल के कार्डियक सर्जरी विभाग प्रमुख और कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. संजय भट्ट के अनुसार, ‘स्टेंट या बाईपास से फैसला केवल मरीज की उम्र या ब्लॉकेज का प्रतिशत देखकर नहीं लगाया जाना चाहिए। तकलीफ किस नस में है, नसें कितनी पतली हैं, ब्लॉक की लंबाई कैसी है, कितनी जगह ब्लॉकेज है और सबसे बड़ी बात दिल की मांसपेशी की हालत कैसी है, इस सबके आधार पर फैसला किया जाता है। कुछ मरीजों में दवाओं और जीवनशैली में बदलाव से भी आराम आ सकता है’।
दूसरे डॉक्टर से राय लेना भी जरूरी
अगर लक्षण स्थिर हैं, इलाज के लिए कुछ समय बचाया जा सकता है, तो दूसरे विशेषज्ञ से राय जरूर लें। एंजियोग्राफी की सीडी/फिल्में, ईसीजी, ईको, ब्लड टेस्ट, पुराने रिकॉर्ड और चल रही दवाएं भी साथ रखें। कार्डियोलॉजिस्ट और कार्डियक सर्जन, दोनों की राय एक साथ लें तो एक टीम के तौर पर राय बनने में बेहतर फैसला कर सकेंगे। हार्ट अटैक, भारी सांस के दर्द या बेहोशी जैसी इमरजेंसी में दूसरी राय के लिए इंतजार करना खतरनाक साबित हो सकता है।
जरूरी टेस्ट और उनकी भूमिका
ईसीजीः दिल की धड़कन व लय की जांच के लिए।
ईकोः दिल के पंपिंग फंक्शन को चैक करने के लिए। ईको, दिल की पंपिंग क्षमता, वाल्व और संरचना आदि को देखने के लिए।
ब्लड टेस्टः शुगर, कोलेस्ट्रॉल, किडनी की कार्यक्षमता व अन्य जोखिमों के आंकलन के लिए।
कोरोनरी सीटी एंजियोग्राफी (सीटी एंजियो): बिना कैथेटर डाले कम जोखिम में ब्लॉकेज की स्थिति देखने के लिए; कई मरीजों में यह बिना कैथेटर वाली जांच के लिए यह एक उत्तम विकल्प है।
स्ट्रेस टेस्ट/टीएमटीः मेहनत के दौरान हृदय का साथ और आपूर्ति पर्याप्त है या नहीं, यह देखने के लिए। इसमें स्ट्रेस इको या न्यूक्लियर इमेजिंग आदि भी शामिल हो सकती है।
कोरोनरी एंजियोग्राफीः कैथेटर से ब्लॉकेज की जगह व गंभीरता देखने के लिए। जरूरत होने पर इसी दौरान मरीज की एंजियोप्लास्टी भी की जा सकती है।
दवा, स्टेंट या बाईपास-कब क्या जरूरी?
स्थिति यदि स्थिर है, लक्षण नियंत्रित हैं और लक्षण इंटरवल पर निर्भर नहीं हैं तो दवा, और गैर-इनवेसिव जांच, परहेज और नियमित फॉलोअप करना एक अच्छा सुझाव है।
ब्लॉकेज की जगह और संख्याः एक-दो आर्टरी के लिए आमतौर पर पीसीआई/स्टेंट दोनों में जटिलता के अनुसार स्टेंट को प्राथमिकतन देनी चाहिए।
डायबिटीज के साथ कई नसों में ब्लॉकेज, खासकर एट्री पानी मुख्य नस का प्रभावित होना द्य बाईपास को प्राथमिकता, तुलना क्लिनिकल मूल्यांकन, स्थिति के अनुसार अगर ऐसी स्थिति वाली एनजाइना की जरूरत हो सकती है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
ब्लॉकेज सुनते ही घबराएं नहीं: एंजियोग्राफी में ब्लॉकेज दिखने का मतलब यह नहीं कि मरीज को तुरंत बाईपास सर्जरी करानी होगी। अगर मरीज सामान्य रूप से चल रहा है, लक्षण दवाओं से नियंत्रित हैं और स्थिर है, तो केवल 80-85 प्रतिशत ब्लॉकेज देखकर घबराएं नहीं। कई स्थितियों में दवा, परहेज, फेरबदल व ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने से आराम आ जाता है। ‘स्टेंट लगाना एक साधन है’ और ‘स्टेंट लगाना जरूरी है’, यह दोनों अलग बातें हैं। बाइपास के साथ-साथ इस बारे में सोचने पर एंजियोप्लास्टी या बाईपास का चुनाव होता है। हार्ट अटैक या इन जैसी इमरजेंसी के समय ही एंजियोप्लास्टी जरूरी हो सकती है। अगर चलते हुए पुरानी में बहुत कम चलने पर सीने में दर्द होने लगे, सांस फूलने लगे या दर्द बढ़ता जाए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
अपने डॉक्टर से ये सवाल जरूर पूछें
- ब्लॉकेज कहां है और स्थिति कितनी जटिल है?
- क्या दवा से काम चल सकता है? क्या स्टेंट से लाभ हो सकता है?
- क्या तुरंत उपचार करने की जरूरत है?
- क्या दवाओं से ठीक होने की संभावना है?
- भविष्य में परहेज, जाँच और निगरानी से इलाज क्या रहेगा?
लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।