
हेल्थ इमरजेंसी अपनाएं यह तरीके आएंगे काफी काम Publish Date : 21/09/2026
हेल्थ इमरजेंसी अपनाएं यह तरीके आएंगे काफी काम
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
स्वास्थ्य संकट की स्थिति दो तरह की होती है, एक सामान्य, दूसरी होती है इमरजेंसी वाली स्थिति। अगर किसी को सीने में तेज दर्द हो रहा है या फिर उसमें हार्ट अटैक जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो जितना जल्दी हो सके मरीज को अस्पताल पहुंचाना चाहिए। ईसीजी आदि के जरिये समस्या का जल्द पता लगाकर इससे समुचित उपचार की व्यवस्था हो जाती है। डोर-टू-बैलून टाइम का मतलब है कि हार्ट अटैक में जितना जल्दी अस्पताल जाएंगे, उतनी जल्दी ही मरीज की एंजियोप्लास्टी कर उसके ब्लड वेसल को खोल दिया जाता है।
ऐसे बनाएं फर्स्ट एड किट
घर में बच्चों या परिवार के लिए फर्स्ट एड किट बना सकते हैं। चोट लगने, छिलने, कटने, जलने की स्थिति में बचाव के लिए यह उपयोगी हो सकता है। इस फसर्ट एड किट में एंटीसेप्टिक लोशन, एंटीबायोटिक क्रीम, बैंडेज, पैरासिटामोल जैसी दवाइयां, एंटी एलर्जिक दवाएं रख सकते हैं। यउि आपके घर में कोई कार्डियक मरीज है तो एस्पिरिन या सॉर्बिट्रेट की गोली रख सकते हैं। फर्स्ट एड किट इस बात पर निर्भर करता है कि आपके परिवार में किस आयु वर्ग के लोग हैं।
बीएलएस (बेसिक लाइफ सपोर्ट) स्तर की जानकारी होने से आप किसी को त्वरित सहायता दे सकते हैं। चेस्ट प्रेशर करने या इमरजेंसी की स्थिति संभालने के लिए कुछ बेसिक ट्रेनिंग अस्पतालों में दी जाती है। मरीज को अस्पताल पहुंचाना, चोट लगने से बचाना और किसी के गर्दन में चोट लगी हो तो दिक्कत न बढ़े, यह हर किसी को सीखना चाहिए। इंटरनेट मीडिया पर कुछ स्वास्थ्य पेशेवर भी जागरूक करते हैं, वहां से भी आप इसके सम्बन्ध में कुछ बेसिक बातें सीख सकते हैं। कुछ स्कूलों में भी फर्स्ट एड का प्रशिक्षण दिया जाता है।
इमरजेंसी में कुछ बातों पर गौर जरूर करें
अगर किसी व्यक्ति की आवाज में बदलाव, हाथ-पैरों में दिक्कत या देखने में परेशानी या स्ट्रोक जैसे लक्षण हो रहे हैं, तो ऐसी दशा में शुरुआती कुछ घंटे बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने तक फर्स्ट एड देना बहुत आवश्यक होता है। इसी तरह मिर्गी का दौरा पड़ने पर किसी प्रकार की कोई चोट न लगे, इसके लिए बचाव के लिउ उपयुक्त उपाय अवश्य ही करने चाहिए।
हर स्थिति के लिए खुद को करें तैयार
जलने, चोकिंग होने, करंट लगने, खाते समय चोक हो जाने जैसी समस्याओं में कुछ बेसिक बातों का ध्यान रखकर आप खुद भी निपट सकते हैं। अगर कोई डूब रहा है या अचेत हो रहा है या फूड एलर्जी या किसी को सांस की तकलीफ हो रही है, तो ऐसी दशा में एक छोटी सी मदद भी मरीज के लिए जीवनरक्षक हो सकती है।
लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।