उत्तर भारत में हेपेटाइटिस-बी वायरस में नया म्यूटेशन, बढ़ा खतरा      Publish Date : 02/05/2026

उत्तर भारत में हेपेटाइटिस-बी वायरस में नया म्यूटेशन, बढ़ा खतरा

                                                                                           डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

उत्तर भारत में हेपेटाइटिस-बी वायरस (एचबीवी) में नया म्यूटेशन (अनुवांशिक बदलाव) हो रहा है, जो काफी खतरनाक है। यह म्यूटेशन शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को गुमराह कर वायरस को बचाने में मदद करता है और टीके (वैक्सीन) के प्रभाव को भी कम कर उपचार में बाधा पहुंचाता है। जेएन मेडिकल कॉलेज में किए गए शोध में यह तथ्य सामने आए हैं।

उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा के एचबीवी से संक्रमित मरीजों में लगभग एक जैसी ही स्थिति पाई गई। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि निगरानी और रोकथाम के उपाय मजबूत नहीं किए गए तो भविष्य में लिवर रोग, संक्रमण और कैंसर के मामलों में वृद्धि हो सकती है। शोधार्थियों ने जेएन मेडिकल कॉलेज के 100 एचआईवी-एचबीवी सह-संक्रमित और 50 केवल एचबीवी संक्रमित मरीजों के नमूनों का अध्ययन किया गया। इसके अलावा उत्तर भारत के अलग-अलग अस्पतालों से 1398 मरीजों के नमूनों पर भी अध्ययन किया।

अध्ययन के अनुसार इसके परिणामों में पाया गया कि एचआईवी-एचबींवी सह-संक्रमित मरीजों में 36.8 फीसदी मामलों में नया म्यूटेशन मौजूद था। विशेषज्ञों के अनुसार इस अनुवांशिक बदलाव से वायरस ‘इम्यून एस्केप म्यूटेशन’ यानी प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) और वैक्सीन के प्रभाव से बच सकता है। खास बात यह है कि केवल एचबीवी से संक्रमित मरीजों में इस तरह का म्यूटेशन कम पाया गया। अध्ययन में यह भी सामने आया कि उत्तर भारत में एचबीवी का जीनोटाइप-डी लगभग 90 फीसदी मामलों में प्रमुख है।

अलीगढ़ मंडल में भी म्यूटेशन

शोधार्थियों के मुताबिक अलीगढ़ के 67%, हाथरस के 40%, एटा के सात और कासगंज के 10% एचवीवी के मरीजों में म्यूटेशन पाया गया है, जो कि एक गहन चिंता का विषय है। अलीगढ़ मंडल में संक्रमण की दर में भी बढ़ोत्तरी हुई है।

उपचार हो सकता है प्रभावित

शोध से जुड़े जेएन मेडिकल कॉलेज के सहायक प्रोफेसर डॉ. सैयद हैदरं मेहदी हुसैनी ने बताया कि ऐसे म्यूटेशन भविष्य में एचबीवी की जांच, वैक्सीन की प्रभावशीलता और इलाज की रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए एचआईवी मरीजों में हेपेटाइटिस-बी की नियमित स्क्रीनिंग और जीनोटाइप की नियमित निगरानी बेहद जरूरी है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।