वायु में मौजूद सल्फेट और धातुओं के कणों से बढ़ा अस्थमा का खतरा      Publish Date : 29/04/2026

वायु में मौजूद सल्फेट और धातुओं के कणों से बढ़ा अस्थमा का खतरा

                                                                                            डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

जब भी वायु में ऐसे प्रदूषकों की मात्रा थोड़ी सी मात्रा में भी बढ़ जाती है, तो इसके चलते बच्चों सहित अस्थमा के कारण अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या करीब 10.6 प्रतिशत बढ़ जाती है। वहीं, 19 से 64 साल के वयस्कों में यह बढ़ोतरी करीब आठ प्रतिशत तक की दर्ज की जाती है।

                            

बढ़ते प्रदूपण के चलते आज के समय में साफ और स्वच्छ वायु की महत्वता काफी अधिक बढ़ चुकी है। सांस लेते समय हवा में मौजूद कई तरह के छोटे-छोटे कण और रसायन हमारे फेफड़ों में पहुंच जाते हैं। इनमें से कुछ कण हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं, विशेष रूप से ऐसे लोगों के लिए जिनको पहले से ही अस्थमा जैसी बीमारी है। अस्थमा में फेफड़े सूज जाते हैं और सांस लेने में बड़ी मुश्किल होती है।

इस बीच एक नए अध्ययन में साबित हुआ है कि वायु में मौजूद कुछ खास धातु और रसायन अस्थमा की परेशानी को बढा सकते हैं और इसके चलते लोगों को अस्पताल तक भी जाना पड़ सकता है।

यह अध्ययन हार्वर्ड विश्वविद्यालय के टीएच चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के प्रोफेसर जोएल श्वार्ट्ज और उनकी टीम के द्वारा किया गया है। शोधकर्ताओं ने हवा में मौजूद निकेल, वैनेडियम और सल्फेट जैसे प्रदूपकों का अस्थमा पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेपण किया। शोध में पाया गया कि जब हवा में इन प्रदूपकों की मात्रा थोड़ी भी बढ़ जाती है, तो बच्चों सहित अस्थमा के कारण अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या करीब 10.6 प्रतिशत बढ़ जाती है। वहीं, 19 से 64 साल के वयस्कों में यह बढ़ोतरी करीब आठ प्रतिशत देखी गई है। शोध में बताया गया है कि निकिल और वैनेडियम मुख्य रूप से ईधन तेल के जलने से निकलते हैं, जबकि सल्फेट कोयले के जलने से बनता है। इसके अलावा, नाइट्रेट, ब्रोमीन और अमोनियम जैसे रसायन भी अस्थमा को बढ़ावा देने में मदद करते हैं।

                              

अगर हम अस्थमा की समस्या को कम करना चाहते हैं, तो हमें इन प्रदूपकों के स्रोतों पर कड़ी नजर रखनी होगी। उदाहरण के तौर पर, कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्रों में स्क्रबर लगाकर सल्फेट के कणों के निकासन को कम किया जा सकता है। इसके अलावा, ईंधन तेल से निकलने वाली धातुओं को हटाने का के लिए आधुनिक तकनीकों इस्तेमाल जरूरी है। इस अध्ययन में मशीन लर्नींग जैसे कप्यूटर एल्गोरिदम की मदद से हवा में मौजूद विभिन्न तत्वों की पहचान की गई है।

टीम ने हवा में पाए जाने वाले ब्रोमीन, कैल्शियम, तांबा, लौह, पोटैशियम, अमोनियम, निकल, नाइट्रेतट, आर्गेनिक कार्बन, सीसा, सिलिका, सल्फेट, वैनेडियम और जस्ता जैसे कई तत्वों की भी जांच की गई है। ये सभी छोटे-छोटे कण हवा में मिलकर पीएम 2.5 के रूप में जाने जाते हैं, जो इतना सूक्ष्म होता है कि सीधे फेफड़ों में जाकर उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है। अस्थमा के मरीजों के लिए तो वैसी ही बहुत अधिक सावधानी का बरतना बेहद जरूरी होता है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।