
डायबिटीज में इन्सुलिन का प्रयोग कैसे करें? Publish Date : 27/04/2026
डायबिटीज में इन्सुलिन का प्रयोग कैसे करें?
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
बैटिंग एंड बेस्ट के द्वारा वर्ष 1921 में इन्सुलिन की खोज की गई और उन्हें इस खोज के लिए नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। वास्तव में इन्सुलिन एक प्रकार का प्रोटीन हॉर्मोन है और इसमें 51 एमीनो एसिड्स विद्यमान होते हैं।
देखा जाए तो टाईप-1 डायबिटीज के समस्त पेशेन्ट्स के लिए इन्सुलिन न केवल आवश्यक है, बल्कि उनके लिए यह उनका जीवन रक्षक भी होता है। इसी प्रकार से टाईप-2 डायबिटीज के पेशेन्ट्स में भी जब पैन्क्रियाज के द्वारा इन्सुलिन का उत्पादन एक निश्चित् स्तर से कम हो जाता है और दवाईयों की अधिकतम डोज देने के बाद भी रक्त शर्करा के स्तर का नियंत्रण पूरी तरह से सम्भव नहीं हो पाता है तो ऐसी स्थिति में मरीज को किसी बाहरी स्रोत से इन्सुलिन प्रदान करने की आवश्यकता होती है।

हममें से बहुत से लोग ऐसा सोचते हैं कि ओरल रूप से ली जाने वाली दवाएँ भी इन्सुलिन का ही एक रूप होती हैं, जबकि ऐसा बिलकुल भी नहीं है। ओरल रूप से ली जाने वाली दवाओं के द्वारा इन्सुलिन के स्तर को बढ़ाया जाता है। यह दवाएँ स्वयं में इन्सुलिन नहीं होती हैं, अपितु यह दवाएँ तो पैन्क्रियाज से इन्सुलिन के स्राव को बढ़ाने का काम करती हैं। ऐसे में जब किसी डायबिटीज के मरीज में इन दवाओं की अधिकतम डोज देने के बाद भी प्रभावी तरीके से काम नहीं करती हैं तो ऐसे मरीज को इन्सुलिन को बाहर से इंजेक्शन आदि के माध्यम से दिया जाता है।
डायबिटीज के उपचार में इन्सुलिन की भूमिका
डायबिटीज के रोगियों को ब्लड शुगर के स्तर को सामान्य बनाएं रखने के लिए ही इन्सुलिन को दिया जाता है। ऐसा माना जाता है कि डायबिटीज के रोगियों को इन्सुलिन की आवश्यकता सदैव ही बनी रहती है, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं होता है। टाईप-2 डायबिटीज के पेशेन्ट्स भी इसका उपचार बिना इन्सुलिन के ही कर सकते हैं। इसके लिए दवा लेने के साथ ही साथ उचित आहारचर्या और एक नियमित और सुचारू दिनचर्या के माध्यम से भी टाईप-2 डायबिटीज को नियंत्रित किया जा सकता है।
इन्सुलिन इंजेक्शन को बनाएँ दर्द से मुक्त
- इन्सुलिन के इंजेक्शन को लगाने से पूर्व लगभग आध घंटा पहले फ्रिज से बाहर निकाल कर रख देना चाहिए।
- इन्सुलिन इंजेक्शन लगाने के लिए हर बार एक नई निडिल का उपयोग करना चाहिए।
- इन्सुलिन का इंजेक्शन लगाते समय ध्यान रखें कि यह इंजेक्शन कि बाल की जड़ में इंजेक्ट न होने पाए।
- स्प्रिट के सूख जाने के बाद ही इन्सुलिन का इंजेक्शन लगाना चाहिए।
- इंजेक्शन की निडिल जब त्वचा के अंदर चली जाए तो उसे त्वचा से बाहर आने तक हिलने नहीं देना चाहिए।
- पैन के द्वारा इन्सुलिन का इंजेक्शन लगाने से दर्द और भी कम होता है।
इन्सुलिन के प्रकार
इन्सुलिन को चार प्रमुख प्रकारों में बाँटा जाता है। जिनमें से-
पहला प्रकार शार्ट एक्टिव इन्सुलिन है जिसका प्रभाव बहुत तेजी के साथ (लगभग 30-36 मिनट के अंदर) होता है और यह 6 से 8 घंटे तक प्रभावी रहता है।
इन्सुलिन का दूसरा प्रकार होता है इंटरमीडिएट एक्टिव इन्सुलिन का, जो कि धीमी गति (लगभग 1 से 2 घंटे) के अंदर अपना प्रभाव दिखाता है और लगभग 10 से 14 घंटों तक प्रभावी बना रहता है।
लाँग एक्टिव इन्सुलिन इसका तीसरा प्रकार होता है जो कि 24 घंटे तक प्रभावी रहता है।
इन्सुलिन के चौथे प्रकार में सभी प्रकार के इन्सुलिन के मिश्रण का प्रयोग किया जाता है।
इन्सुलिन लेने का तरीका

इन्सुलिन उइंजेक्शन लेने के दौरान यदि आप इंटरमीडिण्ट एक्टिव इन्सुलिन का प्रयोग कर रहे हैं तो इसका प्रयोग दिन में दो बार किया जाना उचित रहता है। शार्ट एक्टिव इन्सुलिन का प्रयोग दिन में तीन बार किया जा सकता है तो वहीं लाँग एक्टिव इन्सुलिन का प्रयोग दिन में केवल एक बार और वह भी सोने से पहले प्रयोग करना सवर्था उचित रहता है।
इन्सुलिन का प्रयोग कैसे करना चाहिए
डायबिटीज के दस वर्ष से ऊपर की आयु वाले मरीजों को स्वयं ही इन्सुलिन का प्रयोग करना चाहिए। साथ ही इन्सुलिन किट में समस्त आवश्यक सामग्री जैसे इन्सुलिन की स्प्रिट, रूई और इन्सुलिन की सिरिंज आदि सभी एक साथ रहनी चाहिए। इसके अतिरिक्त इन्सुलिन का प्रयोग करने से पहले अपने हाथों को भी अच्छी तरह से साफ करना अनिवार्य होता है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।
