बदलते मौसम में एलर्जी से करें अपना बचाव      Publish Date : 17/04/2026

बदलते मौसम में एलर्जी से करें अपना बचाव

                                                                                                  डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

अप्रैल के महीने में अक्सर जहां एक ओर बूंदाबांदी हो रही है तो वहीं सुहानी सुबह और तेज धूप वाली दोपहर का महीना लोगों को परेशान भी कर रहा है। एलर्जी इस मौसम की सबसे बड़ी परेशानी होती है और काफी अधिक संख्या में लोगों को एलर्जी की समस्या हो भी जाती है। यह मौसम फूलों की खुशबू और रंगीन नजारों से भरा होता है, मगर परागण व फफूंद हवा में फैले हुए होते हैं और लाखों लोगों को एलर्जी की चपेट में ले रहे हैं। छींक, नाक, बहना, आँखों में खुजली और सांस की समस्या इन दिनों आम हो रही है। इस स्थिति में, दवाएं राहत तो देती हैं, पर सही आहार भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसलिए इस मौसम में अपने खानपान पर भी विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता होती है।

एलर्जी के लक्षण

                             

वैश्विक जनसंख्या में से यह समस्या लगभग 18 प्रतिशत के लगभग इसकी समस्या देखने को मिलती है, जो इस मौसम में और अधिक गंभीर हो जाती है। विश्व स्तर पर, लगभग 10 से 30 प्रतिशत वयस्क और 40 प्रतिशत बच्चे स्प्रिंग एलर्जी से प्रभावित पाए जाते हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण, पोलन सीज़न लंबा हो रहा है, जिससे एलर्जी के मामले भी बढ़ी संख्या में बढ़ रहे हैं। इस मौसम में लोगों को जुकाम रहना, छींकें आना, नाक से पानी निकलना आदि के लक्षण साधारण तौर पर देखे जा सकते हैं।

भरपूर पानी का सेवन और शरीर को हाइड्रेट बनाए रखें

यह सबसे आसान और प्रभावी उपाय माना जाता है कि आप पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करते रहें। दिनभर में कम से कम 8 से 10 ग्लास पानी का सेवन करना आपके शरीर को हाइड्रेट बनाए रखता है, जिससे नाक और गले की झिल्लियां नम बनी रहती हैं और परागकण आसानी से शरीर से बाहर निकल जाते हैं। डिहाइड्रेशन होने पर, हिस्टामिन का स्तर बढ़ जाता है, जो एलर्जी के लिए एक मुख्य रसायन होता है। इस दौरान गुनगुना पानी, अदरक, तुलसी या हल्दी वाली चाय और भी बेहतर काम करती है। अदरक का जिंजराइल तत्व सूजन कम करता है, जबकि हल्दी और तुलसी एंटी इम्प्लीमेंट्री गुणों से भरपूर होती है। इनका सेवन किया जा सकता है।

प्राकृतिक एंटी हिस्टामिन उपाय

विटामिन सी हिस्टामिन को तोड़ने में मदद करता है और इम्यून सिस्टम को मजबूत कर एलर्जी के लक्षणों को कम करने में मददगार साबित होता है। आंवला विटामिन सी का सबसे समृद्व स्रोत होता है। एक आंवले में संतरे से तीस गुना तक अधिक विटामिन सी प्राप्त होता है। इसके लिए इसके अतिरिक्त नींबू, कीवी, शिमला मिर्च, टमाटर और ब्रोकली को भी आहार में शामिल किया जा सकता है।

शोध बताते हैं कि बचपन से ओमेगा, थ्री लेने वाले बच्चों में एलर्जी और अस्थमा का जोखिम कम होता है। ओमेगा थ्री के प्राकृतिक स्रोतों में अखरोट, अलसी के बीज और सरसों का तेल प्रमुख है। वहीं रोबार्टिक्स आंत को स्वस्थ रखते हैं जहां इम्यून सिस्टम का बड़ा हिस्सा मौजूद होता है, दही अतः अपने आहार में छाछ और फॉर्मेटेड फ्रूट्स आदि को अपनी आहार योजना में अवश्य हीं शामिल करें।

शहद का सेवन भी होता है मददगार

स्थानीय शहद में आस-पास के पौधों के सूक्ष्म परागकण होते हैं। ऐसे में रोज थोड़ी मात्रा में शहद लेने से शरीर धीरे-धीरे इन परागकणों के प्रति अभ्यस्त हो जाता है। इमदलाजी में इसे डी सेस्टाइजेशन कहा जाता है। जो एलर्जी इमोथैरिटी के समान सिद्धांत पर आधारित है, परन्तु ध्यान रखें कि एक वर्ष कम उम्र के बच्चों को शहद न दें।

कैसे हो बचाव एलर्जी से

एलर्जी के दौरान कुछ खाद्य पदार्थ एलर्जी के लक्षणों को बढ़ाते हैं, जैसे शराब और रेड वाइन, वहीं बहुत मसालेदार और पैकेज्ड प्रोसेस्ड भोजन शरीर में सूजन के स्तर को बढ़ाते हैं। अधिक मात्रा में चाय या काफी लेने से डिहाइड्रेशन की समस्या भी हो सकती है। ठंडे पेय जैसे आइसक्रीम तथा उच्च कच्चे फल सब्जियाँ भी एलर्जी के लक्षणों को उभार सकती हैं। इसके सन्दर्भ में जिला अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर डॉ दिव्यांशु सेंगर ने बताया कि एलर्जी के लक्षणों के गंभीर होने से पहले और समय रहते ही डॉक्टर से सलाह लें और इस मौसम में होने वाली एलर्जी से अपने को सुरक्षित बनाएं रखें।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला  चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।