सीपीआर से जुड़े कुछ मिथक एवं आमधारणाओं की सत्यता      Publish Date : 21/03/2026

सीपीआर से जुड़े कुछ मिथक एवं आमधारणाओं की सत्यता

                                                                                         डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

जब किसी व्यक्ति की ह्दय गति रूक जाती है, तो उस व्यक्ति के लिए प्रत्येक सेकेंड बहुत अधिक मूल्वान होती है। ऐसे समय में अस्पताल के बाहर आने वाले कार्डियक अरेस्ट के दौरान, लोग आवश्यक सहायक उपचार अपनाने में अक्सर में अनजान होते हैं या वह इन्हें करने से हिचकिचाते हैं, जिससे प्रभावित व्यक्ति का जीवन बचाने के महत्वपूर्ण अवसर हाथ से निकल जाता हैं। ऐसे समय में सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेंशन) को लेकर समाज में फैली गलत अवधारणाएं इसके सम्बन्ध में एक महत्वपूर्ण एवं बड़ा कारण है।

ऐसे में हम आज अपने इस लेख के माध्यम से समाज में फैली सीपीआर के सम्बन्ध में फली इन समस्त गलत अवधारणाओं करने और इसकी सही जानकारियों को साझा करने का एक प्रयास कर रहे हैं, जिससे कि आवशकता होने पर किसी व्यक्ति का अमूल्य जीवन बचाया जा सकें-

मिथक – 1: सीपीआर करने के लिए सर्टिफिकेशन का होना आवश्यक है-

सत्यताः एक औपचारिक प्रशिक्षण के द्वारा सीपीआर की तकनीकों को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है, सीपीआर को शुरू करने के लिए यह अर्थ कतई नहीं है कि यदि आपके पास सर्टिफिकेट नहीं है तो आप किसी की सहायता नहीं कर सकते।

  • क्योंकि आपातकालीन स्थिति में कुछ प्रयास नहीं करने से कुछ करना अधिक अच्छा होता है।
  • ऐसे में हाथों के माध्यम से किया जाने वाला हैंड्स-ओनली सीपीआर भी जीवन को बचाने के लिए एक कारकगर भूमिका निभा सकता है।
  • दिल का दौरा पड़ने के समय झिझक छोड़कर अविलम्ब प्रतिक्रिया देनी चाहिए, क्योंकि आपका एक प्रयास करना किसी की जान बचाने का कार्य कर सकता है।

                                    

मिथक – 2: सीपीआर करने से प्रभावित व्यक्ति को चोट भी लग सकती है-

सत्यताः कई लोग केवल इस डर के चलते ही सीपीआर का प्रयोग नहीं कर पाते हैं कि इससे प्रभावित व्क्ति की पसलियाँ भी टूट सकती हैं अथवा इससे उन्हें कोई अन्य अंदरूनी चोट लग सकती है। हालांकि इस समय यह ध्यान रखना अति आवश्यक है कि जिस व्यक्ति को कार्डियक अरेस्ट आया है वह पहले से ही जीवन और मृत्यु की स्थिति से जूझ रहा है।

  • ऐसे में यदि समय रहते सीपीआर नहीं किया जाए तो उसका जीवन बचने की सम्भावनाएं बिल्कुल न के बरबार ही होती हैं।
  • विभिन्न शोधों के मायम से ज्ञात हुआ है कि सीपीआर के दौरान पसलियों का टूटना एक आम बात होती है, परन्तु इससे प्रभावित व्यक्ति को कोई गम्भीर नुकसान नहीं पहुँचता है।
  • कार्डियक अरेस्ट के दौरान सबसे अधिक छाती पर दबाव डालकर ह्नदय के रक्त संचार को सुचारू बनाए रखना सबसे अधिक महत्वपूर्ण होता है, भले ही इस दौरान मरीज को हल्की चोट लगे अथवा नहीं।

मिथक – 3: सीपीआर सीखना एक कठिन कार्य है-

सत्यताः हममें से काफी लोगों का यह मानना है कि यापीआर को सीखना एक जटिल कार्य है अथवा इसे करने के लिए मेडिकल सांइस का ज्ञान होना बहुत आवश्यक है। इसके विपरीत वास्तव में सीपीआर को सीखना बहुत ही आसान होता है, और इसके लिए किसी भी प्रकार की मेडिकल विशेषज्ञता का होना आवश्यक नहीं हैं।

  • अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (एएचए) के अतिरिक्त अन्य विभिन्न संस्थाएं इससे सम्बन्धित ऑनलाइन ट्यूटोरियल और वीडियोज भी उपलब्ध कराती हैं, जिनके माध्यम ये काई भी व्यक्ति हैंड्स-ओनली सीपीआर आसानी से सीख सकता है।
  • इसके अतिरिक्त विभिन्न सामूदायिक स्वास्थ्य केन्द्र और स्वास्थ्य संस्थान भी बहुत कम या निःशुल्क सीपीआर का प्रशिक्षण भी प्रदान करते हैं।
  • थोड़ा सा अभ्यास और जागरूकता आपको किसी व्यक्ति का जीवन बचाने में सक्षम बना सकती है।

पहला कदम उठाएं

                          

  • आरम्भ में सीपीआर करना कुछ कठिन अवश्य लग सकता है, परन्तु सबसे बड़ी गलती कुछ नहीं करना होती है।
  • छाती पर दबाव डालना हो अथवा एईडी का उपयोग करना हो, क्योंकि आपका किया गया प्रत्येक प्रयास मूल्यवान हो सकता है।
  • आप अकेले नहीं हैं- ऐसे कठिन समय में आपताकाली सेवाएं, फोन पर भी आपकी मदद कर सकती हैं।
  • ऐसे में सीपीआर को सीखना एक स्किल ही नहीं, बल्कि यह आपको किसी व्यक्ति का जीवन बचाने की शक्ति भी देती है। 

सीपीआर के सम्बन्ध में कुछ प्रमुख तथ्यः

  • सीपीआर करने के लिए किसी सर्टिफिकेशन का होना अनिवार्य नहीं है, बल्कि इसको तुरंत करना सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।
  • सीपीआर करने के दौरान मरीज की पसलियाँ टूट सकती है।, परन्तु जीवन बचाना अधिक महत्वपूर्ण होता है।
  • सीपीआर को सीखना बहुत आसान है अतः कोई भी व्यक्ति इसे आसानी से सीख एवं कर सकता है।

अतः आप आज ही सीपीआर सीखें और दिल को दौरा पड़ने पर इस जीवन रक्षक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनें। मिथकों को तोड़ें, भय को दूर करें और एक सुरक्षित समाज को बनाने में अपना अमूल्य योगदान प्रदान करें। 

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।