दिल के दौरे का आधुनिक उपचार और उपचार की नई विधियाँ      Publish Date : 19/03/2026

दिल के दौरे का आधुनिक उपचार और उपचार की नई विधियाँ

                                                                                                डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

दिल का दौरा (Heart Attack) उस समय होता है, जब ह्दय तक आने वाला रक्त प्रवाह किसी रूकावट के चलते बाधित हो जाता है। यह रूकावट आमतौर पर रक्त के थक्के कोरोनरी धमनियों में प्लॉक (Plaque) के फट जाने के कारण होती है। सही समय पर, सही इलाज से ह्दय की मांसपेशियों को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है, जीवन को बचाया जा सकता है और आगे की जटिलताओं को भी रोका जा सकता है। आधुनिक चिकित्सा में अब अधिक प्रभावी और व्यक्तिगत उपचार की रणनीतियों को अपनाया जा रहा है, जिससे मरीज की स्थिति में सुधार और लम्बे समय तक स्वस्थ रहने में पर्याप्त सहायता प्राप्त हो रही है।

दिल के दौरे के प्रकार और उनका उपचारः

दिल का दौरा दो प्रकार का हो सकता है-

STEMI (पूर्ण रूकावट): इस स्थिति में मरीज की कोरोनरी धमनी पूरी तरह से बन्द हो जाती है, जिससे ह्दय को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है।

NSTEMI (आंशिक रूकावट): इस स्थिति में मरीज की धमनी आंशिक रूप से अवरूद्व होती है, जिससे धमनी में रक्त प्रवाह कम हो जाता है।

STEMI और NSTEMI के उपचार में कुछ समानताएँ भी हो सकती है, लेकिन प्रत्येक प्रकार की होने वाली रूकावट के हिसाब से ही उपचार को अनुकूलित किया जाता है।

दिल के दौरे के आपातकालीन उपचारः

                         

किसी भी व्यक्ति को दिल का दौरा पड़ने के तुरंत बाद सही इलाज देकर उसकी जान को बचाया जा सकता है। दिल के दौरे के लिए दिए जाने वाले प्राथमिक उपचार के अंतर्गत निम्न कदम शामिल किए जाते हैं:

एस्पिरिन (Aspirin) देनाः 162-325 मिलीग्राम चबाने के योग्य एस्पिरिन मरीज को देने से रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया को मन्द किया जा सकता है।

ऑक्सीजन थेरेपीः यदि मरीज में ऑक्सीजन का स्तर कम होता है तो मरीज को तुरंत ही ऑक्सीजन देने की प्रक्रिया को आरम्भ किया जाता है।

दर्द एवं छाती में जकड़न का उपचारः इसके लिए मरीज को नाइट्रोग्लिसरीन (Nitroglycerine) अथवा दर्द निवारक दवाएं दी जाती हैं, हालांकि इन दर्द निवारक दवाओं का उपयोग मरीज के रक्तचॉप समान्य होने की दशा में ही किया जाता है।

उपचार की मुख्य विधियाँ:

पर्क्यूटिनियस कोरोनरी इंटरवेंशन (PCI): STEMI के उपचार के लिए सबसे अधिक प्रभावी तरीका होता है, जिसके अंतर्गत बन्द हुई धमनी को खोलने के लिए स्टेंट डाल दिया जाता है। हालांकि इस प्रक्रिया को 90 मिनट के अंदर किया जाना चाहिए।

थ्रोम्बोलाइटिक थेरेपीः यदि मरीज में 90 मिनट के अंदर PCI सम्भव न हो सके तो खून के थक्के को घोलने वाली दवाईयाँ मरीज को दी जाती हैं।

NSTEMI का उपाचारः इसके उपचार के लिए पहले दवाईयों के माध्यम से मरीज के रक्त प्रवाह को नियंत्रित किया जाता है, लेकिन यदि मरीज की स्थिति बिड़ती है तो उसकी PCI तुरंत की जाती है। कई मामलों में 48 घंटे के भीतर ही नियोजित PCI के द्वारा भी बेहतर रिकवरी प्राप्त करना सम्भव हो सकता है।

इन्ट्रावस्कुलर इमेजिंगः

स्टेंटिंग को और अधिक सुरक्षित बनानाः

दिल की धमनियों की स्थिति को जानने और स्टेंट लगाने के लिए कोरोनरी एंजयोग्राफी (Coronary Angiography) करना सबसे सामान्य तरीका होता है, लेकिन इस प्रक्रिया के अंतर्गत धमनी का केवल अंदरूनी भाग को ही देखा जा सकता है। अब IVUS (Intravascular Ultrasound) और OCT (Optical Coherence Tomography) के जैसी तकनीकों के माध्यम से डॉक्टरों को धमनियों की दीवार, प्लाक की स्थिति और स्टेंट लगाए जाने के बाद के परिणामों को अधिक स्पष्ट रूप से समझनें में सहायता प्राप्त होती है।

स्टेंटिंग से पूर्व, यह तकनीक धमनियों और प्लाक के आकार को मापकर उचित स्टेंट का चुनाव करने में सहायता रिती है।

स्टेंटिंग के बाद यह डॉक्टरों को स्टेंट की स्थिति का आकलन करने और आवश्यकता होने पर उसमें आवश्यक सुधार करने का अवसर प्रदान करती है।

ध्यान देने योग्य कुछ तथ्यः

तुरंत उपचार देने की आवश्यकः दिल दिल का दौरा पड़ने पर मरीज को जलछ ही एस्पिरिन देने के बाद तुरंत ही मेडिकल सहायता प्राप्त करनी चाहिए।

पीसीआई और स्टेंटिंग है प्रभावकारीः STEMI में 90 मिनट के अंदर स्टेंटिंग करना मरीज के जीवन को बचा सकती है।

नई तकनीक से बेहतर उपचारः IVUS, OCT, MRI और जेनेटिक टेस्टिंग के माध्यम से उपचार करना अधिक सटीक हुआ है।

दिल के दौरे के इलाज में नई प्रगति

हाल के वर्षों में दिल के दौरे के इलाज में कई महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं, जिसमें जल्दी पहचान, लक्ष्य आधारित उपचार और पुनर्वास (Rehabilitation) आदि शामिल हैं।

नए डायग्नोस्टिक टेस्टः हाई सेंसिटिविटी ट्रोपोनिन (Troponin) टेस्ट के द्वारा ह्दय की क्षति का पता लगाकर शीघ्रता से उपचार आरम्भ किया जा सकता है।

नई इमेजिंग तकनीकः कार्डियक MRI और CT एंजियोग्राफी से दिल और धमनियों की विस्तृत जानकारी प्राप्त होती है, जिससे डॉक्टर उपचार के लिए बेहतर योजा तैयार कर सकते हैं।

प्रिसीजन मेडिसिन (Precision Medicine): यह प्रत्येक मरीज के लिए व्यक्तिगत उपचार देने की एक विधि है। जेनेटिक प्रोफाइलिंग और फार्माोजिनोमिक्स (Pharmacogenomics) की सहायता से डॉक्टर यह समझ सकते हैं कि कोई मरीज दवाओं जैसे क्लोपिडोग्रल आदि के प्रति किस प्रकार की प्रतिक्रिया करेगा, जिसके चलते उपचार अधिक प्रभावी हो यकता है।

बायोमार्कर आधारित उपचार: BNP और NT-pro BNP जैसे बायोमार्कर विशेष रूप से हार्ट फेल्योर के मरीजों के लिए दिल के दौरे के उपचार के लिए सहायक हो सकते हैं।

दिल के दौरे के उपचार में आधुनिक तकनीकों के आगमन से महत्वपूर्ण और प्रभावशाली सुधार हुआ है। उन्नत डायग्नोस्टिक उपकरण, सटीक इंटरवेंशनल तकनीक, व्यापक पुनर्वास कार्यक्रम और नई चिकित्सा विधियों के साथ, दिल के मरीजों के पास अब पहले से कहीं बेहतर रिकवरी और लम्बे समय तक ह्दय को स्वस्थ बनाए रखने के अवसर मौजूद हैं।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।