
मोटापा और ह्दय रोगों के बीच सम्बन्ध और इसकी रोकथाम के प्रभावी उपाय Publish Date : 15/03/2026
मोटापा और ह्दय रोगों के बीच सम्बन्ध और इसकी रोकथाम के प्रभावी उपाय
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
कुछ प्रमुख तथ्यः
- मोटापा ह्दय रोग, स्ट्रॉक, उच्च रक्तचॉप (हाई ब्लड प्रेसर) और मधूमेह आदि रोगों के खतरे को काफी हद तक बढ़ा देता है।
- अपने आहार पर करीबी नजर बनाएं रखें और एक संगठित आहार योजना का पालन करने का प्रयास करना चाहिए।
- प्रति दिन कम से कम 30 मिनट तक समय व्यायाम के लिए अवश्य निकालें और सप्ताह में 1,000 से 3,000 किलो-कैलोरी बर्न करने का प्रयास करना चाहिए। इससे आप स्वस्थ बने रहते हैं।
वर्तमान समय में मोटापा, वैशिवक स्तर पर एक महत्वपूर्ण समस्या है, जो कि एक महामारी का रूप धारण करती जा रही है। मोटापे की दर समस्त आयु वर्गों जन-समुदायों में बहुत तेजी के साथ बढ़ रही है। इस सम्बन्ध में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि दुनियाभर में 13 प्रतिशत व्यस्क मोटापे की समस्या से जूझ रहे हैं, जबकि 39 प्रतिशत अधिक वजन वाले माने जाते हैं। मोटापा, ह्दय रोग के जोखिम को काफी हद तक बढ़ा देता है, जिसके अर्न्गत डिसलिपिडेमिया, मधुमेह, एट्रियल फाइब्रिलेशन, उच्च रक्तचॉप अर्थात हाई ब्लड प्रेशर, ह्दय की विफलता और स्ट्रॉक आदि शामिल होते हैं।

गुजरे कुछ दशकों में, मोटापा एक वैश्विक महामारी के रूप में उभरकर सामने आया है। यह इम्पेपरड ग्लूकोज टॉलरेन्स (IGT) के साथ भी सम्बन्ध रखता है, जो कि टाइप-2 मधुमेह के लिए अग्रदूत के रूप में जाना जाता है।
मोटापे और ह्दय रोग के बीच आपसी सम्बन्धः
वस्तुतः मोटापा ह्नदय की विभिन्न स्थितियों के लिए एक प्रमुख जोखिम कारक होता है, जिसके अन्तर्गत कोरोनरी आर्टरी डिजीज, उच्च रक्तचॉप, ह्नदय की विफलता, स्ट्रॉक, मधुमेह और एट्रियल फाइब्रिलेशन आदि को शामिल किया जाता है।
मोटापा उच्च रक्तचॉप की समस्या को बढ़ावा देता है और लिपिड प्रोफाइल को भी प्रभावित करता है, जिससे धमनियों में प्लॉक (एथेरोस्क्लेरोसिस) एकत्र होने लगता है। इससे दिल के दौरे (Heart Attack) और स्ट्रॉक (Stroke) हो सकता है।
मोटापे से खराब वसा (ट्राइग्लिसराइड) का स्तर बढ़ जाता है और इसके साथ गुड फैट एचडीएल कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी कम हो जाता है, जिसके चलते ह्नदय रोग का खतरा काफी बढ़ जाता है।
मोटापा टाइप-2 डायबिटीज के साथ भी गहराई से जुड़ा हुआ होता है, जो कि ह्नदय रोगों के जोखिम को और अधिक बढ़ा देता है।
एट्रियल फाइब्रिलेशन (Atrial Fibrilation), जो कि ह्दय की लय (Rhythm) से सम्बन्धित विकार होता है, जो कि मोटे व्यक्तियों में अधिक पाया जाता है। ऐसे में, अतिरिक्त वजन सूजन, ह्दय की संरचना में परिवर्तन और हॉर्मोन असंतुलन का कारण भी बनता है, जो कि अनियमित ह्दय गति की समस्या को बढ़ावा देता है।
वजन को कम कम करने और उसे बनाए रखने की रणनीतियाँ

मोटापे को नियंत्रित करने और स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने के लिए एक संरचित कार्यक्रम को अपनाने की आवश्यकता होती है, जिसके अन्तर्गत लक्ष्य निर्धारण, भोजन योजना, व्यक्तिगत गतिविध कार्यक्रम और बाधाओं को दूर करने से सम्बन्धित रणनीतियाँ शामिल होती हैं।
यर्थाथवादी लक्ष्य निर्धारित करना (Realistic Goal Setting):
- वजन कम करने के लिए एक व्यवहारिक लक्ष्य को निर्धारित करना अपने आप में काफी महत्वपूर्ण होता है।
- कई लोग 20 से 30 प्रतिशत तक वजन केा कम करने का लक्ष्य रखते हैं, जो कि कठिन हो सकता है। इसके स्थान पर 5 से 15 प्रतिशत वजन को कम करने के लक्ष्य को प्राप्त करना अधिक वास्तविक और प्रभावी होता है।
- भोजन डायरी और निगरानी (Food Diary and Monitoring System)
- भोजन की डायरी बनाकर रखने से लम्बी अवधि तक वजन को कम करने की सफलता को बढ़ावा देता है।
- नियमित रूप से आहार की निगरानी करने से व्यक्ति अपनी वजन को कम करने और उसके प्रबन्धन से सम्बन्धित योजनाओं पर कायम रह सकते हैं।
शारीरिक गतिविध्यिों को बढ़ाएँ (Increase Physical Activities for Weight Management):
- स्वस्थ व्यस्कों के लिए वजन प्रबन्धन के दौरान शारीरिक गतिविधियाँ एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
- नियमित रूप से व्यायाम करना, वजन को कम करने और शरीर को स्वस्थ रखने में सहायता प्रदान करता है।
- व्यायाम का प्रकार, तीव्रता और आवृत्ति प्रत्येक व्यक्ति की स्वास्थ्य की स्थिति, शारीरिक सीमाओं और प्राथमिकताओं के अनुसार ही निर्धारित की जानी चाहिए।
- आरम्भ में धीरे-धीरे 30 मिनट प्रति दिन के हिसाब से अपनी शारीरिक गतिविधियों को बड़ाना उचित होता है।
- प्रति सप्ताह 1,000 किलो कैलोरी ऊर्जा को बर्न करने लक्ष्य अपनाएं, आगे अधिक प्रभावी वजन को कम करने के लिए 2,000 से 3,000 किलो कैलोरी तक इसे बढ़ाया जा सकता है।
- मानसिक रूप से तैयार रहना भी लम्बे समय तक उचित वजन को बनाए रखने के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण है।
स्वस्थ भोजन वातावरण स्थापित करना (Esitabilish a Healthy Eating Enviornment):
- स्वस्थ आदतों को बढ़ावा देने के लिए अपने भोजन के वातावरण को पुनर्सगठित करना।
- अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों की उपलब्धता को सीमित करें और स्वस्थ विकल्पों को प्राथमिकता प्रदान करें, जैसे कार्यस्थल या समुदाय में पौष्टिक भोजन विकल्प उपलब्ध कराना।
- घर पर भोजन तैयार करने, कम कैलोरी युक्त खाद्य पदार्थों का चयन और अत्याधिक बड़े भोजन भागों से परहेज करने के जैसी सरल आदतें वजन के प्रबन्धन में एक बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।
- मोटापा ह्दय रोग के लिए एक प्रमुख जोखिम कारक के रूप में जाना जाता है, तथापि इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
- वजन का उचित प्रबन्ध, ह्दय-स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने और उच्च रक्तचॉप, उच्च कोलेस्ट्रॉल स्तर तथा इंसुलिन प्रतिरोध के जैसी समस्याओं को नियंत्रित कर व्यक्ति अपने ह्दय रोग के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
- इस प्रकार से छोटे-छोटे बदलाव भी ह्दय के स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण सुधार कर सकते हैं।
अतः ह्दय रोगों से बचने के लिए एक स्वस्थ जीवनशैली केा अपनाने, संतुलित आहार शैली और नियमित रूप से शारीरिक गतिविधियों को शामिल कर अत्याधिक मोटापे और ह्दय रोग से बचने का प्रयास करते रहें।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।
