
मुहँ के कैसर का पारम्परिक उपचार Publish Date : 21/01/2026
मुहँ के कैसर का पारम्परिक उपचार
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
मुँह का कैंसर क्या है?
मुंह का कैंसर, जिसे हम ओरल कैंसर के नाम से भी जानते हैं, एक प्रकार का कैंसर है जो हमारे मुख क्षेत्र में किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकता है, जैसे होंठ, जीभ, गाल, मसूड़े, तालू, मुँह का फर्श, गले का पिछला हिस्सा और यहां तक कि लार ग्रंथियाँ तक भी इससे प्रभावित हो सकती हैं। यह सिर और गर्दन के कैंसर की श्रेणी में आता है और यदि समय रहते इसका पता न चले, तो यह शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल सकता है।

मुँह के कैंसर के प्रकार
मुंह के कैंसर को कई प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है, जैसे:-स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा (Squamous Cell Carcinoma):
यह मुंह के कैंसर का सबसे आम प्रकार है जो मुँह की भीतरी परतों को प्रभावित करता है।
वेरुकस कार्सिनोमा: यह धीमी गति से बढ़ने वाला ट्यूमर होता है जो मुख्यतः तंबाकू चबाने वाले लोगों में देखा जाता है।
म्युकसैल ग्रंथि कैंसर (Mucoepidermoid Carcinoma): यह कैंसर मुख्य रूप से लार ग्रंथियों को प्रभावित करता है।
मेलानोमा: इस प्रकार का कैंसर होंठों या मुँह के अंदर त्वचा के रंगद्रव्य वाले क्षेत्रों में विकसित होता है।
मुँह के कैंसर के लक्षण
मुंह का कैंसर लक्षण शुरुआत में मामूली लग सकते हैं, लेकिन समय के साथ गंभीर रूप ले सकते हैं। इन सामान्य संकेतों को नजरअंदाज न करें:
- मुँह में या होंठों पर न भरने वाला घाव।
- जीभ, मसूड़ों या गाल में गांठ या सूजन।
- मुँह या जबड़े में दर्द या सुन्नता का अनुभव होना।
- मुहँ के अन्दर सफेद या लाल धब्बे जो कि आसानी से नहीं हटते।
- निगलने में कठिनाई होना।
- आवाज में बदलाव या लगातार खराश का बने रहना।
- अचानक वजन का कम होना।
- बिना किसी कारण के ही दांतों का हिलना।
अगर आपको उपरोक्त में से कोई मुंह का कैंसर लक्षण लगातार महसूस हो रहा हो, तो तुरंत ही अपनी जांच कराएं।
मुँह के कैंसर का कारण

मुंह का कैंसर विकसित होने के पीछे विभिन्न कारण हो सकते हैं:
- तंबाकू और गुटखा का सेवन (धूम्रपान और चबाने योग्य दोनों) अधिक करना।
- अत्यधिक शराब का सेवन करना।
- मानव पैपिलोमा वायरस (HPV) संक्रमण होना।
- सूर्य की सीधी किरणों के संपर्क में आना (विशेषकर होंठों पर)।
- खराब मौखिक स्वच्छता।
- मुंह की पुरानी जलन या घाव।
- परिवार में कैंसर का इतिहास का होना।
डॉक्टर या दंत चिकित्सक से कब मिलना चाहिए?
यदि आप निम्नलिखित में से कोई भी मुंह का कैंसर लक्षण अनुभव कर रहे हैं तो आपको अविलम्ब अपने डॉक्टर से मिलना चाहिए:
- मुँह में या होंठ पर लगातार घाव जो 2 हफ्ते से ज्यादा समय न भर रहा हो।
- निगलने में कठिनाई या दर्द का अनुभव करना।
- जीभ में सुन्नपन होना।
- बिना किसी कारण विशेष के ही आवाज में बदलाव होना।
मुँह के कैंसर का इलाज कैसे किया जाता है?
मुंह का कैंसर के इलाज का तरीका इसकी अवस्था (stage), स्थान और रोगी की शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता है। प्रमुख उपचार विधियां हैं:
सर्जरी: प्रारंभिक अवस्था में ट्यूमर को हटाने के लिए सर्जरी की जाती है। इसमें जीभ, तालू, या जबड़े की हड्डी का हिस्सा हटाना शामिल हो सकता है।
रेडिएशन थेरेपी: कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए उच्च ऊर्जा किरणों का उपयोग होना।
कीमोथेरेपी: कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए दवाइयों का प्रयोग। यह अन्य उपचारों के साथ की जाती है।
इम्यूनोथेरेपी और टार्गेटेड थेरेपी: शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय कर कैंसर से लड़ने में मदद करती हैं।
मुँह के कैंसर के साथ जीना
कैंसर के साथ जीवन जीना मानसिक और शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन यह असंभव नहीं है। सही समय पर इलाज, पोषण, भावनात्मक सहयोग और नियमित फॉलो-अप से व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है। कैंसर सर्वाइवर ग्रुप्स, काउंसलिंग और पुनर्वास सेवाएं भी सहारा प्रदान करती हैं।
मुँह के कैंसर से जुड़े मुख्य जोखिम कारक क्या हैं?
मुंह का कैंसर होने की संभावना निम्नलिखित कारणों से अधिक होती है:
- तंबाकू और गुटखा का दीर्घकालिक सेवन करना।
- शराब का अत्यधिक मात्रा में सेवन करना।
- सूर्य की किरणों से होंठों को क्षति होना।
- HPV संक्रमण होना।
- मुंह की नियमित सफाई न करना।
- पोषण की कमी और कम इम्युनिटी होना।
- 40 वर्ष से अधिक आयु और पुरुषों में अधिक जोखिम।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।
