घर बैठे होगी मानसिक रोग की पहचान, मिल जाएगा उपचार      Publish Date : 11/01/2026

                घर बैठे होगी मानसिक रोग की पहचान, मिल जाएगा उपचार

                                                                                                                                                     डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने मानसिक रोगों के उपचार की दिशा. में एक बड़ी पहल की है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित ऐसा उन्नत डिजिटल मनोचिकित्सा तंत्र (एप और इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म) विकसित किया है, जो न सिर्फ व्यक्ति की मनोवृत्ति व मनोस्थिति की समय रहते पहचान करेगा, बल्कि समुचित इलाज का प्रबंध भी करेगा।

                                                 

इसके माध्यम से पीड़ित घर बैठे मोबाइल, कंप्यूटर, लैपटाप से अपनी मानसिक समस्या पर दूर-दराज के विशेषज्ञों से बात कर सकेगा, उपचार व परामर्श ले सकेगा।

आइआइटी और आइआइएम के विशेषज्ञों के साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व एम्स के मनोचिकित्सा विभाग के प्रो. डॉ0 कौशिक सिन्हा देब और प्रो. डॉ0 नंद कुमार कर रहे हैं। एम्स की डिजिटल-साइकाइट्री लैब में ट्रायल हो चुका है और अब इसके उपयोग की तैयारी है। डॉ0 कौशिक कहते हैं कि हमारा उद्देश्य एआई की मदद से मानसिक रोगों की पहचान को सरल और तेज बनाना है। विशेषज्ञ मानते हैं कि वर्तमान समय में मानसिक स्वास्थ्य एक बहुत बड़ी समस्या है।

रोगी को अस्पताल जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, और जानकारी रहेगी गोपनीय

यह डिजिटल मनोचिकित्सा तंत्र मानव व्यवहार, आवाज, चेहरे के हाव-भाव, मोबाइल और कंप्यूटर उपयोग पैटर्न के माध्यम से मानसिक रोग के शुरुआती संकेतों की पहचान करेगा। इसमें एआई आधारित कई स्तरों वाली जांच प्रणाली विकसित की जा रही है, जो अवसाद, चिंता, बाइपोलर विकार और स्मृति से जुड़े रोगों को शुरुआती चरण में पकड़ लेगी। एआई उनका विश्लेषण कर विशेषज्ञ चिकित्सकों तक पहुंचाएगा। वे परीक्षण व रोग की पहचान कर परामर्श और उपचार देंगे। यह प्रणाली बीमार व्यक्ति की गोपनीयता को सुनिश्चित करती है।

विशेषज्ञों की यह है भूमिका

  • एम्स के चिकित्सक मानसिक स्वास्थ्य के चिकित्सकीय मानक तय कर रहे हैं।
  • आइआइटी तकनीकी ढांचा, डाटा माडल और एआई प्रणाली विकसित कर रहा है।
  • आइआइएम मानव व्यवहार, 'डाटा और माडल की सामाजिक स्वीकार्यता का अध्ययन कर रहा है।

डिजिटल तंत्र के लाभ

                                                      

  • समय रहते रोग की पहचान
  • विशेषज्ञ से तुरंत सलाह
  • बार-बार अस्पताल आने की जरूरत कम
  • मरीज की पूर्ण निजता की सुरक्षा
  • ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में इलाज की समान उपलब्धता
  • एप डाटा का उपयोग मानसिक रोग उपचार की बेहतरी के लिए हो सकेगा

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।