स्ट्रेस और डिप्रेशन के कारण भी कम उम्र में लोगों को आ रहे हैं हार्ट अटैक      Publish Date : 31/12/2025

स्ट्रेस और डिप्रेशन के कारण भी कम उम्र में लोगों को आ रहे हैं हार्ट अटैक

                                                                                                                                                                          डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

  • वैज्ञानिकों ने किया एक बड़ा खुलासा

स्ट्रेस के कारण दिल की बीमारी ही नहीं, बल्कि हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी अन्य गम्भीर बीमारियां भी हो सकती हैं। अतः स्ट्रेस कम करने के तरीकों को अपने जीवन में आश्यक रूप से अपानाएं।

स्ट्रेस जिंदगी का एक अभिन्न हिस्सा है, लेकिन जब स्तर बहुत अधिक हो जाता है, तो इससे दिल की समस्याओं सहित गंभीर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) की एक हालिया स्टडी में काम से जुड़े अधिक स्ट्रेस के कारण दिल की सेहत पर खतरनाक असर को समझाया गया है। इस स्टडी में पता चला कि गंभीर स्ट्रेस से दिल की धड़कन में अचानक बदलाव हो सकते हैं, जिससे वेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया और वेंट्रिकुलर फाइब्रिलेशन जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं, ये दोनों ही स्थितियाँ दिल के निचले हिस्सों को गम्भीर रूप से प्रभावित करती हैं।

इस स्टडी में 18-60 वर्ष तक की उम्र के 6,000 लोग शामिल किए गए थे, जिन्हें 18 साल तक फॉलो किया गया। रिसर्च में यह नतीजा निकला कि जो लोग अधिक स्ट्रेस महसूस करते हैं, उनमें एट्रियल फाइब्रिलेशन (AF) होने का खतरा 83 प्रतिशत अधिक होता है। यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें दिल की धड़कन अनियमित हो जाती है। स्टार हॉस्पिटल्स के सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. रमेश गुडापति इस बात पर जोर देते हैं कि स्ट्रेस की वजह से होने वाली कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों को रोकने के लिए कुछ प्रभावी प्लानिंग और स्ट्रेस का मैनेजमेंट करना बहुत आवश्यक हैं।

स्ट्रेस दिल पर किस प्रकार से प्रभाव डालता है?

                                                               

एट्रियल फाइब्रिलेशन (AF) की समस्या वाले लोगों में, दिल में खून के थक्के बन सकते हैं, जो दिमाग तक जाकर स्ट्रोक का कारण बन सकते हैं, या पैरों तक जाकर गैंग्रीन या यहां तक कि पैर काटने की स्थिति भी बना सकते हैं। दूसरी ओर, वेंट्रिकुलर फाइब्रिलेशन से दिल की धड़कन 300 बीट्स प्रति मिनट से अधिक हो सकती है, जिससे कार्डियक अरेस्ट और इसके कारण पीड़ित की मौत भी हो सकती है। एरिथमिया, या अनियमित दिल की धड़कन, उम्र के साथ अधिक आम हो जाती है, लेकिन स्ट्रेस इनके होने का एक बड़ा कारण बनकर सामने आया है।

स्ट्रेस के कारण

स्ट्रेस कई कारणों के चलते हो सकता है, जैसे करियर, परिवार, फाइनेंस, पढ़ाई और सोशल रिलेशनशिप आदि। किसी से बहुत अधिक उम्मीदें रखना भी स्ट्रेस का एक बड़ा कारण होता है, क्योंकि इससे उन उम्मीदों को पूरा करने का लगातार प्रेशर रहता है, जिससे फेलियर और निराशा महसूस होती है, जो मेंटल और फिजिकल हेल्थ पर बुरा प्रभाव डालती है।

समय के साथ, बहुत अधिक स्ट्रेस से स्ट्रेस हॉर्मोन रिलीज होते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, थकान हो सकती है और दिल की खून की नसों में ब्लॉकेज का खतरा बढ़ सकता है। इसके सम्बन्ध में डॉ. गुडापति बताते हैं कि अपनी सीमाओं को समझना और रियलिस्टिक उम्मीदें रखना ही स्ट्रेस कम करने में मदद कर सकता है।

अपने समय को अच्छे से मैनेज करना और एक्सरसाइज और मेडिटेशन जैसी आराम देने वाली एक्टिविटीज को अपने जीवन में शामिल करना भी आवश्यक है।

एरिथमिया और अधिक स्ट्रेस के लक्षणः

  • दिल का बहुत धीरे, बहुत तेज या अनियमित रूप से धड़कना।
  • आराम करते समय भी दिल की धड़कन का तेज होना।
  • बहुत अधिक थकान महसूस करना।
  • चक्कर आना या बेहोश होना।
  • सामान्य कमजोरी महसूस करना।
  • बहुत अधिक स्ट्रेस लेना।
  • नींद न आना।
  • मांसपेशियों में दर्द और सिरदर्द होना।
  • बिना किसी कारण विशेष के बहुत अधिक थकान होना।
  • भावनात्मक बदलाव जैसे चिंता, चिड़चिड़ापन और डिप्रेशन आदि का होना।
  • आवश्यकता से अधिक खाना या भूख न लगना।

तनाव को मैनेज और कम करने के तरीकें

टाइम मैनेजमेंटः- पॉजिटिव एटीट्यूड के साथ अपना काम ऑर्गनाइज करें। असरदार टाइम मैनेजमेंट और रियलिस्टिक गोल सेट करना बहुत जरूरी है।

रियलिस्टिक उम्मीदें:- खुद पर ज्यादा बोझ डालने से बचने के लिए प्रोफेशनल गोल को अपनी असली काबिलियत के साथ मिलाते हुए निर्धारित करें।

परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं:- सोशल सपोर्ट स्ट्रेस को कम करता है। अपनों के साथ समय बिताना और अपनी परेशानियां शेयर करना बहुत लाभकारी साबित हो सकता है।

एक्सरसाइजः- फिजिकल एक्टिविटी स्ट्रेस कम करने का सबसे प्रभावशाली तरीका होता है। रेगुलर एक्सरसाइज से एंडोर्फिन रिलीज होते हैं, जो अच्छा महसूस कराते हैं। योग और मेडिटेशन भी स्ट्रेस मैनेजमेंट में मददगार सिद्व होता हैं।

खराब आदतों से बचें:- स्ट्रेस से निपटने के लिए स्मोकिंग या शराब का इस्तेमाल करने से स्ट्रेस से जुड़ी हेल्थ प्रॉब्लम और भी अधिक खराब हो सकती हैं।

बैलेंस्ड डाइटः- स्ट्रेस से होने वाली ज्यादा खाने या भूख न लगने की प्रॉब्लम से बचने के लिए हेल्दी डाइट लें।

पूरी नींदः- ठीक से आराम और रिकवरी के लिए रोज 6-8 घंटे की नींद जरूर लें।

स्ट्रेस से होने वाली कार्डियोवैस्कुलर प्रॉब्लम का उपचार:

                                                               

कंजेस्टिव हार्ट फेलियर या एरिथमिया के गंभीर मामलों में, ब्लड क्लॉट को रोकने के लिए ब्लड थिनिंग दवाएं दी जा सकती हैं। वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन के मामलों में, हार्ट रिदम को रेगुलेट करने के लिए इम्प्लांटेबल डिवाइस की जरूरत हो सकती है। डॉ. गुडापति इस बात पर जोर देते हैं कि स्ट्रेस से होने वाली दिल की धड़कन की प्रॉब्लम की शुरुआती स्तर पर पहचान और समय पर इलाज करना, ज्यादा गंभीर हेल्थ कॉम्प्लिकेशन से बचने के लिए जरूरी है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।