आम को गिरने से बचाने के लिए कुछ उपाय      Publish Date : 20/03/2026

आम को गिरने से बचाने के लिए कुछ उपाय

                                                                                    प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं अन्य

  • आम के पेड़ों से झड़ रहे टिकोले? तो अपनाएं यह आसान उपाय जो बढ़ा देंगे आम की पैदावार-

आम की बागवानी के लिए गर्मियों का मौसम काफी अनुकूल माना जाता है, क्योंकि इसी समय बौर आने के बाद फलों का विकास होना शुरू हो जाता है। यदि इस दौरान किसान लापरवाही बरतें तो उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए आम पर टिकोले दिखते ही इमिडाक्लोप्रिड और प्लानोफिक्स का सही मात्रा में छिड़काव करना बहुत प्रभावी रहता है।

मार्च से अप्रैल का समय आम के बागों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी दौरान पेड़ों पर आए बौर धीरे-धीरे छोटे फलों यानी टिकोले में बदलने लगते हैं। यह वह चरण होता है जब किसान अपनी अच्छी पैदावार की उम्मीद लगाते हैं। लेकिन कई बार देखने में आता है कि फल बनने के बाद भी टिकोले समय से पहले पेड़ से गिरने लगते हैं या उनका आकार छोटा ही रह जाता है और वह परिपक्व नहीं हो पाते हैं। ऐसी स्थिति में किसानों को काफी चिंता होने लगती है, क्योंकि इसका सीधा असर आम के उत्पादन पर पड़ता है। दरअसल, इस समस्या के पीछे कई छोटे-छोटे कारण हो सकते हैं, जैसे पौधों की सही तरीके से देखभाल न करना, कीटों का प्रकोप या जरूरी पोषण की कमी आदि।

                            

अगर इस समय पौधों पर विशेष ध्यान दिया जाए और कुछ जरूरी उपाय अपनाए जाएं, तो इन समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। सही समय पर देखभाल करने से आम के पेड़ों की बढ़वार अच्छी होती है और फलों की गुणवत्ता भी बेहतर बनी रहती है

गर्मी का मौसम आम की खेती के लिए काफी लाभकारी

सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रोफेसर आर. एस. सेंगर के अनुसार आम की बागवानी के लिए गर्मी का मौसम सबसे उपयुक्त होता है। इसी समय पेड़ों पर बौर आने के बाद फल बनने की प्रक्रिया शुरू होती है। अगर इस दौरान बागवान थोड़ी भी लापरवाही कर दें, तो फल झड़ने या कमजोर रहने की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए इस समय पौधों की देखभाल और सुरक्षा बेहद जरूरी होती है।

टिकोले दिखते ही करें उपयुक्त दवा का छिड़काव

विशेषज्ञों का कहना है कि जब पेड़ों पर बौर के बाद छोटे-छोटे टिकोले दिखाई देने लगें, उसी समय जरूरी दवाओं का छिड़काव करना चाहिए। इससे कीटों से बचाव होता है और फल झड़ने की समस्या भी कम हो जाती है। समय पर सही दवा का छिड़काव करने से आम का आकार भी अच्छा बनता है और पौधे की बढ़वार भी बेहतर होती है।

ऐसे तैयार करें दवा का घोल

कृषि विशेषज्ञ के मुताबिक इमिडाक्लोप्रिड दवा को लगभग 6 मिली दवा 15 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए। वहीं प्लानोफिक्स को 1 मिली दवा 4 से 5 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे किया जा सकता है। इन दवाओं का सही मात्रा में उपयोग करने से आम के पेड़ों को कीटों से सुरक्षा मिलती है, फल गिरने की समस्या कम होती है और पैदावार भी अच्छी प्राप्त होती है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।