पपीते में पत्तियों के मुड़ने की समस्या      Publish Date : 13/12/2025

                   पपीते में पत्तियों के मुड़ने की समस्या

                                                                                                                                                        प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता

पपीते की फसल में पत्तियों के मुड़ने की समस्याः किसान भाईयों आज हम बात कर रहे हैं पपीते की फसल एक समस्या के बारे में, जिसमें पपीते के पौधों की पत्तियाँ ऊपर की ओर मुड़ने लगती हैं। कुछ किसान भाई इसे एक सामान्य कमी या मौसम का प्रभाव समझकर इसे नजरअंदाज भी कर देते हैं। जबकि अधिकतर मामलों में यह लीफ कर्ल वायरस के संक्रमण का संकेत होता है। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए तो इससे पूरा खेत प्रभावित हो सकता है और इसका प्रभाव सीधा फसल के उत्पादन पर पड़ता है और किसान को आर्थिक हानि का समाना करना पड़ता है।

समस्या की पहचान और कारण

                                                                

जब पपीते की नई पत्तियाँ छोटी, सिकुड़ी हुई और मुड़ी हुई दिखाई हो और पत्तियों का रंग हल्का पड़ने लगे और पौधे की बढ़वार रुक जाए तो आप यह समझ लो कि पपीते की फसल पर लीफ कर्ल विषाणु का प्रकोप शुरू हो चुका है। यह वायरस मुख्य रूप से सफेद मक्खी (Whitefly) के माध्यम से फैलता है। अगर खेत में यह कीट पहले से मौजूद है, तो संक्रमण तेज़ी से बढ़ सकता है। दुर्भाग्य से, कई किसान शुरुआत में इसे पोषक तत्वों की कमी समझ लेते हैं और इसका सही उपचार करने में देरी कर देते हैं, जिससे उन्हें नुकसान का समाना करना पड़ता है।

रोकथाम और नियंत्रण के प्रभावी उपाय

इस समस्या के निवारण के लिए सबसे पहला और जरूरी उपाय यह है कि संक्रमित पौधों को तुरंत खेत से बाहर निकालना है। इन्हें खेत में छोड़ देने से वायरस स्वस्थ पौधों तक भी पहुँच जाता है और जिसके चलते पूरे का पूरा खेत ही जोखिम में आ जाता है। प्रभावित पौधों को जड़ सहित निकालकर नष्ट कर देना चाहिए, ताकि संक्रमण दोबारा से फैल न सके।

इसके बाद रसायनिक नियंत्रण के तौर पर इमिडाक्लोप्रिड का उपयोग प्रभावी माना जाता है। लगभग 60-70 मिली. इमिडाक्लोप्रिड को 200 लीटर पानी में घोलकर एक एकड़ क्षेत्र में छिड़काव करने से प्रभावी नियंत्रण होता है। यह प्रयोग सफेद मक्खी के नियंत्रण में मदद करता है और वायरस के विस्तार को भी रोकता है। छिड़काव सुबह या शाम के समय करना अच्छा रहता है, ताकि दवा का प्रभाव अधिक समय तक बना रहे।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।