
प्रगतिशील किसान Publish Date : 29/11/2025
प्रगतिशील किसान
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
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एक एकड़ में 300 ग्राम का लहसुन, 7 फीट की उगाकर 6 लाख रूपये वार्षिक कमाई
फतेहाबाद के भूथन खुर्द के युवा किसान रवि पूनिया कश्मीरी और गोल्डन लहसुन का उत्पादन कर बढ़ा रहें हैं अपनी आमदनी।
फतेहाबाद जिले के गाँव भूथन खुर्द के युवा किसान रवि पूनिया ने खेती को परम्परागत ढर्रे से निकालकर उसे एक नई दिशा प्रदान की है। एमए (पॉलिटिकल साइंस) और बीएससी (एग्रीकल्चर) शिक्षित रवि पूनिया एक ओर जहां कश्मीरी और गोल्डन गार्लिक की खेती के माध्यम से 6 लाख रूपये की शुद्व आमदनी प्राप्त कर रहे हैं। किसान रवि पूनिया के पास कुल 20 एकड़ जमीन है और अब वह एक एकड़ जमीन में सब्जियां, लहसुन आदि की ऑर्गेनिक खेती कर रहे हैं। उन्होंने नई देशी लौकी की किस्म (एनएन) विकसित कर खेती में नवाचार एक मिसाल पेश की है।
लौकी की इस किस्म को शिवानी किस्म के नाम से भी जाना जाता है। रवि पूनिया ने बताया कि कश्मीरी और गोल्डन लहसुन की किस्मों में एलिसिन की मात्रा सामान्य लहसुन की तुलना में कई गुना अधिक होती है, जो गठिया, दिल के रोग और कोलेस्ट्राल के जैसी बीमारियों में लाभकारी होता है। लहसुन की इन किस्मों का भाव 250 से 400 रूपये किलो तक, जबकि प्रीमियम क्वालिटीज का भाव 3 हजार रूपये किलो तक पहुँच जाता है। इस लहसुन को लम्बे समय तक स्टोर किया जा सकता है और यह रोगाणुओं से मुक्त रहता है।
किसान रवि पूनिया के अनुसार, एक लहसुन का औसतन वजन 300 ग्राम तक होता है और उत्पादन सामान्य लहसुन की अपेक्षा लगभग 4 गुना अधिक होता है। इसके साथ ही रवि पूनिया ने अपनी नई देशी लौकी की किस्म को भी तैयार किया है, जिसकी लम्बाई सामान्य लौकी (2 से 3 फीट) की तुलना में कहीं अधिक 6 से 7 फीट तक लम्बी होती है। अभी तक उनके द्वारा लगाई गई लौकी की लम्बाई 5 फीट 2 इंच तक पहुँच चुकी है, जो नवम्बर के माह तक 6 फीट से अधिक हो जाएगी। मचान विधि से खेती करने पर इसका उत्पादन 600 से 700 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक प्राप्त किया जा सकता है।
इसमें लगने वाली प्रत्येक लौकी का वजन 8 से 10 किलोग्राम तक होता है। रवि इस किस्म का बीज तैयार कर उसे अन्य किसानों तक पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं। उनका कहना है कि किसानों को एक ही प्रकार की खेती को छोड़कर बागवानी और औषधीय फसलों को अपनाना चाहिएए जिससे कि मृदा की उर्वरता और किसानों का मुनाफा दोनों ही बढ़ सके। औषधीय फसलों की ओर रूझान बढ़ाकर किसान आर्थिक रूप से भी सशक्त हो सकते हैं।
औषधीय फसलों पर मिलती है सब्सिडी
जिला बागवानी अधिकारी ने बताया कि रवि पूनिया जैसे किसान जिले के लिए मिसाल हैं। सरकार किसानों को बागवानी और औषधीय फसलों पर सब्सिडी भी दे रही है, जिससे कि खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सके।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
