
पराली को कमाई का जरिया बनाकर, अन्य किसानों को भी दिखाई राह Publish Date : 11/11/2025
पराली को कमाई का जरिया बनाकर, अन्य किसानों को भी दिखाई राह
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी
- प्रशासन की सख्ती के बाद सिरसा के भलिन्द्र सिंह ने शुरू किया प्रोजेक्ट
- पर्यावरण संरक्षण के साथ ही गायों के लिए भी मिल रहा है भरपूर चारा
- एक करोड़ की मशीनरी तथा एक विदेशी ट्रैक्टर के द्वारा 6 गाँवों के किसानों की कर रहे हैं सहायता
पराली को जहाँ अधिकतर किसान बेकार समझकर अपने खेत में ही जला देते हैं, वहीं हरियाणा के जिला सिरसा के गाँव मिर्जापुर धेहड़ के एक किसान भलिन्द्र सिंह ने इस पराली को ही आमदनी का एक जरिया बना लिया है। इस प्रक्रिया में किसान भलिन्द्र सिंह ने बीते छह वर्षों में आसपास के छह गाँवों से 30 हजार एकड़ क्षेत्र की पराली से करीब सात लाख गांठें तैयार कर ली हैं, जो अब गोशालाओं में गायों के लिए चारे का एक बेहतरीन विकल्प बन चुकी हैं।
भलिन्द्र सिंह ने वर्ष 2018 से पराली के प्रबन्धन की शुरूआत की थी। हालांकि आरम्भ में उनके सामने अनेक चुनौतियाँ भी आई, परन्तु उन्होंने इन चुनौतियों के सामने हार नहीं मानी। वह आसपास के किसानों से पराली को एकत्र कर मशीन के माध्यम से इसकी गांठ बनाते हैं। ये ही गांठें गोशालाओं में चारे के लिए बेची जाती हैं, जिससे यह अब पर्यावरण संरक्षण के साथ ही आय का एक सशक्त माध्यम भी बन चुका है।

प्रगतिशील किसान भलिन्द्र सिंह ने बताया कि उन्होनें पराली के प्रबन्धन के लिए एक करोड़ रूपये से दो स्केयर मशीन, दो राउंड बेलर और दो विदेशी ट्रैक्टर खरीदे थे। अब वह बेलर की सहायता से पराली की गांठें बनाकर पराली का तिनका-तिनका खेतों से बाहर निकालते हैं। दूसरे पड़ोसी गाँव जैसे जीवननगर, संतनगर, दमदमा साहिब और हिम्मतपुरा आदि के किसानों की महंगे कृषि यन्त्रों से मदद भी करते हैं, ताकि कोई भी किसान भाई पराली को जलाकर वातावरण को दूषित न करे।
पूरे हरियाणा के किसानों के लिए बने प्रेरणा
सहायक कृषि अभियंता और कृषि विशेषज्ञ डॉ0 विजय जैन के अनुसार किसान भलिन्द्र सिंह का यह मॉडल हरियाणा राज्य के समस्त किसानों के लिए एक प्रेरणा है। उन्होंने सिद्व कर दिया कि यदि आपके पास कुछ नया करने की इच्छाशक्ति हो तो पराली को जलाने से होने वाले प्रदूषण को समाप्त कर इसे आमदनी का एक जरिया भी बनाया जा सकता है।
भलिन्द्र सिंह अब अपने इस काम को राज्य के अन्य जिलों तक भी पहुँचाना चाहते हैं, जिससे कि अधिक से अधिक किसान बेकार समझी जाने वाली पराली से आमदनी प्राप्त कर सकें और इससे प्रदूषण पर भी प्रभावी अंकुश लग सकेगा। किसान भलिन्द्र सिंह का यह नवाचार और पर्यावरण के प्रति उनकी जागरूकता, दोनों ने एक साथ मिलकर उन्हें हरियाणा के अग्रणी किसानों में शामिल कर दिया है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
