
कविता “गन्ना है किसान का सच्चा सहारा” Publish Date : 05/11/2025
कविता “गन्ना है किसान का सच्चा सहारा”
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
धान को इस बार मौसम ने मारा,
किसान का सपना अधूरा सारा।
बारिश, बाढ़ और धूप का खेल,
मेहनत गई पर मिला न मेल।
बाजार में दाम भी हुए बेईमान,
पसीने का मोल नहीं पहचान।
अब सोचो कुछ ऐसा उपाय,
जो दे भरोसा, जो दे उपजाय।
गन्ना है खेती का सच्चा नाता,
साल भर देता मीठा फायदा।
एक बार बोओ, तीन साल साथ,
मेहनत का रंग लाए हर बात।
मिल में तौल, न मोल की ठगी,
सरकारी दर से खुशहाली जगी।
रस, गुड़, चीनी, खेत में चारा,
हर रूप में गन्ना न्यारा प्यारा।
धान से बढ़कर, लाभ अपार,
गन्ना बने अब हर खेत का प्यार।
मौसम की मार से जो ना डरे,
ऐसी फसल हर खेत में सजे।
उठो किसान करो नया विचार,
गन्ना बने जीवन का आधार।
मिट्टी, मेहनत, और विश्वास,
गन्ने से ही होगा विकास।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
