
डेंगू बुखार के लिए प्रमुख होम्योपैथिक उपचार Publish Date : 13/09/2026
डेंगू बुखार के लिए प्रमुख होम्योपैथिक उपचार
डॉ0 राजीव सिंह एवं मुकेश शर्मा
डेंगू बुखार सभी आर्थ्राेपोड जनित रोगों में सबसे अधिक आम होता है। डेंगू बुखार अधिकांश उष्णकटिबंधीय देशों में पाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आधे से अधिक सदस्य देशों, जिनकी कुल जनसंख्या 20 करोड़ है, वह सभी डेंगू के खतरे में हैं। डेंगू के वायरस को आर्बाेवायरस के रूप में जाना जाता है।
डेंगू बुखार का संक्रमण दो प्रकार का हो सकता हैः-
क) लक्षणहीन
ख) लक्षणयुक्त
जिसके परिणामस्वरूप निम्न स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं: जैसे
1) सामान्य डेंगू बुखार ii) शॉक के साथ डेंगू रक्तस्रावी बुखार या iii) शॉक के बिना डेंगू रक्तस्रावी बुखार।
डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छर डेंगू वायरस के वाहक होते हैं। ये मच्छर आकार में बड़े होते हैं और इनके शरीर पर काली और सफेद धारियाँ होती हैं, इसलिए इन्हें टाइगर मच्छर भी कहा जाता है। ये मच्छर आमतौर पर दिन के समय मे ही काटते हैं। एडीज मच्छर टूटी बोतलों, डिब्बों, गमलों, नारियल के खोल, पेड़ों के छेदों आदि जैसे कृत्रिम रूप से जमा किए गए ताजे पानी में प्रजनन क्रिया करते हैं।
डेंगू बुखार एक परिचयः
इसे ‘ब्रेकबोन’ या हड्डी तोड़ बुखार के नाम से भी जाना जाता है। इस बुखार ने सबसे पहले स्कॉटलैंड में एक महामारी का रूप लिया।
क्लासिकल डेंगू बुखार के लक्षण इस प्रकार हैंः अचानक ठंड लगना और 102 से 105 डिग्री तक तेज बुखार आना जो लगभग 3-5 दिनों तक बना रहता है, तेज सिरदर्द (आंखों के पीछे), मांसपेशियों और रीढ़ की हड्डी में तेज दर्द, उल्टी, स्वादहीनता, कमजोरी, जीभ का सूखना, कब्ज, लाल आंखें और चेहरे पर सूजन। बुखार 5-7 दिनों तक रहता है जिसके बाद आमतौर पर व्यक्ति पूरी तरह से ठीक हो जाता है। मृत्यु की संभावना बहुत कम होती है।
डेंगू बुखार के लिए प्रमूख होम्योपैथिक उपचारः
हमारे होम्योपैथिक डॉक्टर डॉ0 राजीव सिंह एवं होम्यापैथिक के वरिष्ठ जानकार मुकेश शर्मा के अनुसार, डेंगू वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए सामाजिक जागरूकता और मच्छरों पर नियंत्रण सर्वापरि होता है। हमारे आसपास का वातावरण स्वच्छ होना चाहिए, पानी की टंकियों और बर्तनों को ढककर रखना चाहिए और मच्छरदानी का प्रयोग करना चाहिए। बुखार होने पर तुरंत किसी योग्य होम्योपैथिक या एलोपैथिक डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। आवश्यकता के होने पर उचित निगरानी और उपचार के लिए किसी क्लिनिक या अस्पताल में भर्ती हो जाना चाहिए।
होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति डेंगू बुखार (डीएफ) और डेंगू रक्तस्रावी बुखार (डीएचएफ) का उपचार और रोकथाम बिना किसी दुष्प्रभाव के रोगियों की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करके कर सकती है। भारत के अलावा अन्य देशों में भी पुराने समय में होम्योपैथी का सफलतापूर्वक उपयोग किया गया है। इन मामलों में होम्योपैथिक दवाओं का चयन संक्रमण के प्रति व्यक्ति की प्रतिक्रिया और वायरस की उग्रता पर निर्भर करता है। डेंगू बुखार और डेंगू रक्तस्रावी बुखार से पीड़ित रोगियों के लक्षणों का अध्ययन करके किसी भी रोगी के साथ-साथ समग्र रूप से महामारी के लिए उपचारात्मक और निवारक होम्योपैथिक दवाओं का निर्धारण किया जाता है।
डेंगू बुखार के इलाज के लिए लगभग 25 होम्योपैथिक दवाएं उपलब्ध हैं। इन होम्योपैथी की दवाओं में विशेष रूप से एकोनाइट, अर्निका, आर्सेनिक एल्ब, अरुम ट्राइ, बैप्टिसिया, बेलाडोना, ब्रायोनिया, कैंथारिस, चाइना ऑफिसिनैलिस, कोलोसिंथिस, यूपेटोरियम परफोलिएटम, फेरम मेटालिकम, जेलसेमियम, हैमामेलिस, इपिकॉक, लैकेसिस, मर्कसोल, नक्स वोमिका, पोडोफाइलम, रहस टॉक्सिकोडेन्ड्रोन, रहस वेनेनाटा, सैनिकुला, सेकेल कॉर्नुटम और सल्फैसिडम शामिल हैं। इन दवाओं का उपयोग विश्व भर के विभिन्न होम्योपैथों द्वारा डेंगू के उपचार और प्रबंधन में सफलतापूर्वक किया जा रहा है। होम्योपैथिक विज्ञान के मूल सिद्धांतों की अच्छी जानकारी रखने वाला होम्योपैथिक चिकित्सक इस मामले में आपकी मदद कर सकता है, क्योंकि इन दवाओं का सेवन योग्य होम्योपैथिक चिकित्सकों की देखरेख में ही किया जाना चाहिए।
होम्योपैथी के माध्यम से डेंगू की रोकथाम -
साधारण डेंगू बुखार (डीएफ): महामारी के वर्तमान लक्षणों के रुझान से पता चलता है कि डेंगू बुखार की रोकथाम के लिए यूपेटोरियम परफोलिएटम 200 को 5 दिनों तक दिन में दो बार लिया जा सकता है, साथ ही नाइक्टैंथिस आर्बर मदर टिंक्चर की 5 बूंदें दिन में एक बार आधे कप पानी के साथ 10 दिनों तक या महामारी के बने रहने तक ली जा सकती हैं।
डेंगू हेमरेजिक फीवर (डीएचएफ) के लिए, 200 ग्राम पोटेंसी वाली इपिकॉक दवा दिन में दो बार, तीन दिनों तक और सप्ताह में दो खुराक उन सभी रोगियों को दी जा सकती है जो पहले डेंगू बुखार से पीड़ित हो चुके हैं और डेंगू हेमरेजिक फीवर होने की आशंका रखते हैं। इस दवा का उपयोग यूपेटोरियम परफोलिएटम 200 ग्राम के साथ बारी-बारी से भी किया जा सकता है ताकि अब तक संक्रमित न हुए व्यक्तियों में डेंगू बुखार के दोनों प्रकारों की रोकथाम भी की जा सकती है।
लेखक: मुकेश शर्मा होम्योपैथी के एक अच्छे जानकार हैं जो पिछले लगभग 25 वर्षों से इस क्षेत्र में कार्य कर रहे हे। होम्योपैथी के उपचार के दौरान रोग के कारणों को दूर कर रोगी को ठीक किया जाता है। इसलिए होम्योपैथी में प्रत्येक रोगी की दवाए, दवा की पोटेंसी तथा उसकी डोज आदि का निर्धारण रोगी की शारीरिक और उसकी मानसिक अवस्था के अनुसार अलग-अलग होती है। अतः बिना किसी होम्योपैथी के एक्सपर्ट की सलाह के बिना किसी भी दवा सेवन कदापि न करें। अन्य स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी एवं उपचार के लिए फोन नं0 9897702775 पर सम्पर्क करें।
डिसक्लेमरः प्रस्तुत लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के अपने विचार हैं।