
सर्दी-जुकाम और खांसी के उपचार के लिए कुछ प्रभावी होम्योपैथिक दवाएं Publish Date : 09/08/2026
सर्दी-जुकाम और खांसी के उपचार के लिए कुछ प्रभावी होम्योपैथिक दवाएं
डॉ0 राजीव सिंह एवं मुकेश शर्मा
होम्योपैथी एक ऐसा विज्ञान है जो शरीर की स्वतः ठीक होने की प्रक्रिया को उत्तेजित करने वाली दवाओं से संबंधित होता है, अन्य चिकित्सा विज्ञानों के विपरीत, यह केवल रोग का ही नहीं, बल्कि रोगग्रस्त व्यक्ति का उपचार करता है। हमारे आज की इस ब्लॉग पोस्ट में कुछ ऐसी दवाएँ दी गई हैं जो तीव्र सर्दी-खाँसी में राहत दिलाने में आपकी मदद कर सकती हैं।
एकोनिटम नेपेलस (एकोनाइट): चमकदार चमकदार होना। सूखी-ठंडी हवा के सम्पर्क में आने के बाद तेज़ सर्दियाँ, मीठी खांसी, उदासी और प्यास लगना इस दवा के मुख्य लक्षण हैं। यह समस्या की शुरुआत में सबसे प्रभावशाली है।
एलियम सेपा (एलियम सेपा): नाक से लगातार पानी आना। नाक के इस पानी से नाक और ऊपरी मुलायम छिले हुए या जलन वाले होते हैं, लेकिन आंखों से निकले पानी में जलन नहीं होती।
बेलाडोनाः सर्दी के साथ तेज बुखार। चेहरा का लाल होना, गले में तेज सूजन या टॉन्सिल की समस्या का होना और सूखा होना, गर्म खांसी आना जैसे इस दवा के प्राथमिक लक्षण हैं।
ब्रायोनिया अल्बाः सूखी और तेज़ खांसी। खांसते समय छाती को तस्वीर मिलती है, हिलने-डुलने से तकलीफ़ होती है और रोगी को बहुत अधिक प्यास लगती है।
पल्सेटिलाः कच्चा, पीला या हरा बलगम आना। रात में नाक बंद होना और दिन में नाक का बहना, खुली हवा में सबसे अच्छा महसूस होना और प्यास बिल्कुल न लगना आदि इस दवा के प्रमुख लक्षण होते हैं।
काली बाइक्रोमिकम (काली बाइक्रोमिकम): पुराना नजला और साइनस की समस्या। नाक या गले से चिपकी हुई बलगम, तार की तरह नाक की जड़ (नाक की जड़) में भारीपन का होना इस होम्योपैथी दवाई के लक्षण हैं।
आर्सेनिक एल्बमः यह आइसक्रीम और कोल्ड ड्रिंक्स से होने वाले जुकाम और खांसी के लिए एक उत्कृष्ठ औषधि है। यह एक ऐसी दवा है जो आपको तब मदद करती है, जब आपको ठंडे पेय पदार्थ या आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक्स या फ्रिज में रखे किसी भी खाद्य पदार्थ जैसे ठंडे खाद्य पदार्थों का सेवन करने के बाद सर्दी और सूखी खांसी हो जाती है।
ठंडा भोजन केवल वही नहीं होता जिसे फ्रिज में रखा जाता है, बल्कि वे खाद्य पदार्थ भी ठंड़े ही होते हैं जिनकी तसीर ठंडी होती हैं, जैसे कि दही। इसके अलावा खीरा, केला, यहां तक कि सर्दियों में जब ठंड बढ़ जाती है तो सादा पानी भी ठंड़ा ही माना जाता है।
रस टॉक्सः यह बरसात के मौसम में होने वाली सर्दी, जुकाम और खासी के लिए एक प्रभावशाली दवा है। अगर आप बारिश में भीग जाते हैं या नम मौसम के संपर्क में आते हैं हालांकि, आप वास्तव में भीगे नहीं होते हैं और आपको सर्दी और खांसी हो जाती है, तो इसके उपचार के लिए रस टॉक्स वह दवा है जिसके बारे में आपको सबसे पहले सोचना चाहिए।
एंटीमोनियम टार्टः यह होम्योपैथी का एक कफ निस्सारक है, जो कि उन मामलों में सबसे अधिक कारगर सिद्व होता है जिन मामलों में अचानक ही खांसी शुरू हो जाती है और सीने में बहुत सारा बलगम जमा हो जाता है जो कि आसानी से बाहर नहीं निकल पाता है। ऐसे में एंटीमोनियम टार्ट बहुत आपके बहुत अधिक लाभकारी साबित होता है।
एंटीमोनियम आर्सेनिकमः होम्योपैथी कि यह दवा सीने में जकड़न और सांस लेने में तकलीफ के लिए ऐ बहुत कारगर दवा है। एंटीमोनियम एआरएस तब सबसे अच्छा काम करता है जब किसी व्यक्ति को ठंडे खाद्य पदार्थ या पेय पदार्थ के सेवन या मौसम में बदलाव के बाद छाती में बहुत अधिक बलगम जमा होने के कारण सांस लेने में तकलीफ हो रही होती है।
हीपर सल्फ्यूरिसः होम्योपैथी की यह दवा सर्दियों के मौसम में होने वाली सर्दी, जुकाम और खांसी के लिए एक उत्कृष्ठ दवाई है। यदि आप सर्दियों में शुष्क ठंडी हवा के संपर्क में आते हैं और फिर आपको सर्दी, खांसी, टॉन्सिल या बुखार हो जाता है तो आप हीपर सल्फ का उपयोग कर सकते हैं, यह दवा आपको लाभ प्रदान करेगी।
इसलिए सर्दी, खांसी, बुखार या गले में संक्रमण के ऐसे अचानक होने पर आप निश्चित रूप से होम्योपैथी लेने के बारे में सोच सकते हैं, जो बिना किसी दुष्प्रभाव के आपकी मदद करती है।
होम्योपैथी रोगी व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर उसके स्वस्थ जीवन को भी बढ़ावा देती है, जिससे व्यक्ति को हर प्रकार की बीमारियों से लड़ने में मदद मिलती है।
आवश्यक सलाहः उपरोक्त सभी मामलों में यदि आप इनमें से कोई भी दवा अपने लक्षणों के अनुसार ले सकते हैं, हालांकि, आपको हमारी सलाह यह है कि उपरोक्त में से कोई भी दवा लेने से पहले किसी योग्य होम्योपैथ से परामर्श अवश्य करें, क्योंकि वह आपके लक्षणों के अनुसार आपके लिए सर्वक्षेष्ठ दवा का चुनाव करेंगे जो आपको शीघ्र ही स्वास्थ्य लाभ प्रदान करने में सक्षम होगी। लेकिन फिर यदि आपने 24 घंटे तक कोई एक दवा ली है और आपको कोई लाभ नहीं हो रहा है या यदि बुखार 100 डिग्री से ऊपर चला जाता है, तो आपको तुरंत अपने होम्योपैथ से परामर्श लेना चाहिए और जांच करवाकर आगे का उपचार लेना चाहिए।
लेखक: मुकेश शर्मा होम्योपैथी के एक अच्छे जानकार हैं जो पिछले लगभग 25 वर्षों से इस क्षेत्र में कार्य कर रहे हे। होम्योपैथी के उपचार के दौरान रोग के कारणों को दूर कर रोगी को ठीक किया जाता है। इसलिए होम्योपैथी में प्रत्येक रोगी की दवाए, दवा की पोटेंसी तथा उसकी डोज आदि का निर्धारण रोगी की शारीरिक और उसकी मानसिक अवस्था के अनुसार अलग-अलग होती है। अतः बिना किसी होम्योपैथी के एक्सपर्ट की सलाह के बिना किसी भी दवा सेवन कदापि न करें। अन्य स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी एवं उपचार के लिए फोन नं0 9897702775 पर सम्पर्क करें।
डिसक्लेमरः प्रस्तुत लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के अपने विचार हैं।