आखिर कहां गायब हो रही हैं तितलियां      Publish Date : 23/09/2026

     आखिर कहां गायब हो रही हैं तितलियां

                                                                       प्रोव आर. एस. सेंगर, डॉ0 शालिनी गुप्ता एवं गरिमा शर्मा

कल्पना कीजिए कि एक दिन आपके बगीचे में तितली की ऐसी प्रजाति दिखाई दे, जिसे आपने पहले कभी नहीं देखा हो। यह खुशी का एक छोटा-सा पल लगता है, लेकिन यदि वह तितली अपने पुराने आवास में बढ़ती गर्मी, सूखे या पर्यावरणीय क्षरण के कारण मजबूर होकर यहां तक पहुंची हो, तो यह उत्साह नहीं, बल्कि प्रकृति के बदलते संतुलन का संकेत है। दुनियाभर में जलवायु परिवर्तन व प्राकृतिक आवासों के तेजी से नष्ट होने के कारण तितलियां अपने पारंपरिक क्षेत्रों को छोड़कर नए घर ढूंढने को मजबूर हैं।

इस प्रक्रिया को स्पीशीज रेंज शिफ्ट कहा जाता है। एक नए वैश्विक अध्ययन में पाया गया है कि दुनिया की ज्ञात हर दस तितली प्रजातियों में से एक पहले ही अपना क्षेत्र बदल चुकी है। यह निष्कर्ष 105 देशों में 1,758 प्रजातियों पर किए गए व्यापक अध्ययन पर आधारित है। अध्ययन के अनुसार, लगभग 80 प्रतिशत तितली प्रजातियों ने अपने वितरण क्षेत्र का विस्तार किया है, जबकि 27 प्रतिशत प्रजातियों का क्षेत्र सिकुड़ गया है। तितलियों का स्थान परिवर्तन कई पर्यावरणीय कारणों का परिणाम है। तितलियों के लिए केवल अनुकूल मौसम पर्याप्त नहीं होता। उनकी इल्लियां विशेष पौधों पर निर्भर रहती हैं, जबकि वयस्क तितलियों को फूलों का रस, सुरक्षित प्रजनन स्थल चाहिए। जब शहरों का विस्तार होता है, तो उनका जीवन चक्र प्रभावित होता है और वे नए ठिकानों की तलाश करने लगती हैं। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में इसके स्पष्ट उदाहरण मिल रहे हैं।

भारतीय उपमहाद्वीप की टॉनी कॉस्टर तितली अब दक्षिण-पूर्व एशिया से होती हुई ऑस्ट्रेलिया तक पहुंच चुकी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है, लेकिन वनों की कटाई, शहरीकरण और आवासों का विनाश भी उतने ही जिम्मेदार हैं। किसी क्षेत्र से तितलियों का गायब होना इस बात का संकेत है कि वहां का पूरा पारिस्थितिकी तंत्र बदल रहा है। इसलिए संरक्षण की रणनीति भी बदलनी होगी। संरक्षण का मतलब सिर्फ उन जगहों को बचाना नहीं है, जहां जीव-जंतु पहले रहते थे, इसमें वे जगहें भी शामिल होनी चाहिए जहां वे नई जगह बसेंगे, और वे वाइल्डलाइफ कॉरिडोर भी जिनका इस्तेमाल वे वहां पहुंचने के लिए करेंगे। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो हो सकता है कि हम बीते कल की प्रकृति को तो बचाते रहें, लेकिन आने वाले कल की प्रकृति के पास जाने के लिए कोई जगह ही न बचे।

ळाल ही में किए गए एक नए वैश्विक अध्ययन में पाया गया है कि दुनिया की ज्ञात हर दस तितली प्रजातियों में से एक पहले ही अपना क्षेत्र बदल चुकी है।

तितलियों का स्थान परिवर्तन कई पर्यावरणीय कारणों का परिणाम है। जलवायु परिवर्तन इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है, लेकिन वनों की कटाई, शहरीकरण और आवासों का विनाश भी उतने ही जिम्मेदार हैं।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।