प्रदेश सरकार ने प्रदेश के गन्ना किसानों को दी बड़ी राहत      Publish Date : 07/09/2026

प्रदेश सरकार ने प्रदेश के गन्ना किसानों को दी बड़ी राहत

                                                                                                           प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं अन्य

  • गन्ना किसानों के लिए बड़ी खबर, टिशू कल्चर प्रयोगशाला होगी स्थापित और तैयार किए जाएंगे नई किस्मों के प्रजनक बीज।

उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए बड़ी खबर आई है। प्रदेश सरकार ने गन्ने की नई किस्मों के प्रजनक बीज तैयार करने के लिए गोरखपुर में टिशू कल्चर प्रयोगशाला स्थापित करने की परियोजना के लिए स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस प्रयोगशाला की स्थापना पर 1.82 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। इससे गन्ने की उन्नत किस्मों के क्वालिटी प्रजनक बीज तैयार करने में सहायता मिलेगी और किसानों तक बेहतर बीज पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त होगा। इससे आने वाले समय में गन्ने की खेती की उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलने की पूरी पूरी उम्मीद है।

हाल ही में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों के विकास के लिए कुल 286.46 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की है। प्रदेश के मुख्य सचिव एस पी गोयल ने अधिकारियों को सभी स्वीकृत परियोजनाओं का काम तय समय में पूरा करने और मंजूर बजट का पूरा उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने परियोजनाओं में काम की क्वालिटी, वित्तीय अनुशासन और नियमित निगरानी पर विशेष ध्यान देने को कहा है, जिससे कि सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ किसानों तक पहुंच सके।

गन्ने की नई किस्मों के प्रजनक बीज होंगे तैयार

गोरखपुर में स्थापित होने वाली टिशू कल्चर प्रयोगशाला को गन्ने की खेती के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस प्रयोगशाला में टिश्यू कल्चर के माध्यम से गन्ने की नई किस्मों के प्रजनक बीज तैयार किए जाएंगे। उन्नत और बेहतर बीज किसानों को अच्छी फसल लेने में मदद करते हैं। नई प्रयोगशाला से गन्ने की उन्नत किस्मों के बीज उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ किसानों को बेहतर रोपण सामग्री उपलब्ध कराने में भी सहायता मिलेगी।

सरकारी कृषि फार्म होंगे आधुनिक

प्रदेश सरकार ने सरकारी कृषि फार्मों को आधुनिक बनाने के लिए दो साल की योजना के तहत 60 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इस राशि से कृषि फार्मों पर आधुनिक कृषि मशीनरी उपलब्ध कराने के साथ सिंचाई के लिए ट्यूबवेल और जल निकासी की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे सरकारी कृषि फार्मों की कार्यक्षमता बढ़ाने और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।

कीट प्रबंधन और मिट्टी जांच सुविधाओं का होगा विस्तार

कृषि विभाग की नौ एकीकृत कीट प्रबंधन (आईपीएम) प्रयोगशालाओं की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए 2.78 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इसके अलावा देवरिया में नई आईपीएम प्रयोगशाला और मिट्टी जांच प्रयोगशाला भवन के निर्माण के लिए 3.71 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। लखीमपुर खीरी में मिट्टी जांच प्रयोगशाला भवन बनाने के लिए 2.60 करोड़ रुपये का अतिक्ति बजट दिया गया है। इन सुविधाओं से किसानों को फसलों में कीट प्रबंधन और मिट्टी की जांच से जुड़ी सेवाएं बेहतर तरीके से मिल सकेंगी।

किसान-वैज्ञानिक संवाद और प्रशिक्षण को मिलेगा बढ़ावा

कृषि विस्तार अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण के साथ किसानों और वैज्ञानिकों के बीच संवाद बढ़ाने पर भी सरकार ने जोर दिया है। कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से किसान-वैज्ञानिक संवाद और कृषि तीर्थ कार्यक्रम आयोजित करने के लिए 8.80 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इससे किसानों को कृषि वैज्ञानिकों से सीधे नई तकनीक, फसल प्रबंधन और खेती से जुड़ी जानकारी हासिल करने का अवसर मिलेगा।

बागवानी और कृषि यंत्रीकरण के लिए भी बजट

रहमान खेड़ा स्थित राज्य कृषि प्रबंधन संस्थान में कृषि यंत्रीकरण, कंबाइन हार्वेस्टर प्रशिक्षण और चारदीवारी निर्माण के लिए 6.10 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। वहीं, बागवानी विकास से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं के लिए 5.98 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इससे बागवानी क्षेत्र के विकास और कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।

बुलंदशहर, मैनपुरी और जालौन में बनेंगे बीज भंडारण गोदाम

उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम के माध्यम से बुलंदशहर, मैनपुरी और जालौन में बीज भंडारण गोदाम बनाए जाएंगे। इन गोदामों की कुल भंडारण क्षमता 5,300 मीट्रिक टन होगी। इनके निर्माण के लिए 17.28 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी मिली है। इसके अलावा 14 पैक्स में गोदाम और भंडारण सुविधाएं विकसित करने के लिए 54.55 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इन भंडारण केंद्रों की कुल क्षमता करीब 25,000 मीट्रिक टन होगी।

मत्स्य पालन और कृषि विश्वविद्यालयों के विकास पर भी जोर

मत्स्य विभाग की विभिन्न योजनाओं के लिए 7.91 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इस राशि से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने, गोरखनाथ हैचरी का पुनर्निर्माण करने और सरकारी मछली फार्मों को मजबूत करने का काम किया जाएगा। इससे मछली बीज उत्पादन की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। वहीं, बांदा, अयोध्या और मेरठ के कृषि विश्वविद्यालयों तथा मथुरा के पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय में अनुसंधान, बुनियादी ढांचे और विभिन्न परिसंपत्तियों के निर्माण के लिए 13.80 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। कृषि विभाग के प्रमुख सचिव रविंद्र के अनुसार, वर्ष 2026-27 के लिए राज्य कृषि विकास योजना के तहत 500 करोड़ रुपये का कुल परिव्यय स्वीकृत किया गया था। हालांकि, बजट में इस योजना के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार का उद्देश्य कृषि क्षेत्र से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के साथ किसानों को आधुनिक तकनीक और बेहतर कृषि संसाधन उपलब्ध कराना है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।