
सहफसली खेती बन रही किसानों को लिए लाभकारी व्यवसाय Publish Date : 06/09/2026
सहफसली खेती बन रही किसानों को लिए लाभकारी व्यवसाय
प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता
वर्तमान समय में जैसे-जैसे खेती योग्य जमीन का दायरा सिमटता जा रहा है तो ऐसे में बाराबंकी के किसानों ने भी अब सहफसली खेती को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है और अब कई तरह की सह फसली खेती कर वह काफी मुनाफा कमा रहे हैं।
बाराबंकी जिले के अधिकतर ब्लॉकों में इस समय लहसुन के साथ हरी मिर्च की खेती बड़े पैमाने पर की जा रही है। जिला उद्यान अधिकारी जयकरण सिंह बताते हैं कि इस समय जिले में लहसुन के साथ हरी मिर्च की खेती लगभग 300 हेक्टेयर क्षेत्रफल में की जा रही है साथ ही प्याज की खेती के साथ भी किसान हरी मिर्च की खेती कर रहे हैं हरी मिर्च कि सहफसली खेती 550 हेक्टेयर मे की जा रही है।
वह आगे बताते हैं कि सरकार लहसुन और हरी मिर्च की खेती को बढ़ावा देने के लिए उद्यान विभाग की तरफ से 12 हजार रुपया का अनुदान भी प्रदान किया जा रहा है।
जिला मुख्यालय से 38 किलोमीटर उत्तर दिशा फतेहपुर ब्लॉक के सौरंगा निवासी अजमत अली (45 वर्ष) बताते हैं, ‘हम पिछले कई साल से लहसुन और मिर्च की सहफसली खेती कर रहे हैं लहसुन की खेती में जो भी खाद पानी और दवा का इस्तेमाल होता है। उसी में मिर्च की फसल भी तैयार हो जाती है। इस प्रकार से एक ही लागत में दो फसलों का उत्पादन करने से हमें अच्छा मुनाफा प्राप्त होता है। लहसुन की फसल जब लगभग तैयार होने को होती है उसी वक्त मिर्च का भी उत्पादन होने लगता है। लहसुन की खुदाई करने के बाद हम मिर्च के पौधों पर मिट्टी चढ़ा देते हैं, ताकि पौधे तेज हवा में गिरने ना पाए।’
वहीं सूरतगंज ब्लॉक के जलालपुर निवासी रिन्कू वर्मा (40 वर्ष) बताते हैं कि मिर्च की खेती सितंबर के अखिरी सप्ताह या अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में कर दी जाती है। लहसुन की बुवाई हम 15-15 सेमी की दूरी पर करते हैं और खेतों में तीन-तीन फिट की दूरी पर की क्यारियां बनाते हैं और इन क्यारियों की मेड़ों पर मिर्च की नर्सरी तैयार करके पौधों की रोपाई कर देते हैं जिनकी क्यारी से क्यारी की दूरी तीन फीट और पौधे से पौधे की दूरी एक फीट की रखते हैं। सहफसली खेती में उचित दूरी का विशेष महत्व होता है और इसलिए हम भी अपनी फसल में पौधों के बीच की दूरी का विशेष ध्यान रखते हैं।
देवा ब्लॉक के लालापुर गाँव के किसान दीपू मौर्या बताते हैं, कि एक एकड़ के क्षेत्रफल में लगभग 250 किग्रा से तीन कुंतल तक का लहसुन का बीज लग जाता है और अगर अच्छा उत्पादन हुआ तो एक एकड़ में 35 से 40 कुंतल तक का लहसुन उत्पादन हो सकता है। इसके साथ ही एक एकड़ में मिर्च 200 से ढाई सौ कुंटल तक उत्पादन भी होता है। बाजार भाव निश्चित नहीं है परन्तु 10 रुपए किलो से लेकर 30-40 रुपए तक के भाव से हरी मिर्च आसानी से बिक जाती है। जब उत्पादन ज्यादा होने लगता है तो यह रेट न्यूनतम पांच किग्रा तक आ जाता है और लहसुन का भी पिछले कुछ वर्षों से अच्छा रेट मिल रहा है।
लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।