कैंपस रेडियो ने शहर को बोलना सिखाया      Publish Date : 10/05/2026

        कैंपस रेडियो ने शहर को बोलना सिखाया

                                                                                                                                  प्रो0 आर. एस. सेंगर

शहर के विश्वविद्यालयों और कॉलेज से शुरू हुए कैंपस रेडियो अब केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहे। यह मंच आज समाज की धड़कन बनकर स्थानीय सरोकारों को नई पहचान भी दे रहा है। जब स्टूडियो में माइक ऑन होता है तो वहां से प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर पुलिस, डॉक्टर, सामाजिक कार्यकर्ता से लेकर गांव की महिला की आवाज सुनाई देती है। शहर में पांच नई सामुदायिक रेडियो स्टेशन और एक सरकारी रेडियो वर्तमान में अपने कार्यों से नए अभिनय में नजर आ रहे हैं। यह शिक्षा, शासन और समाज के बीच मजबूती देने का काम कर रहे हैं।

रेडियो का काम केवल छात्रों के लिए ही नहीं है, यहां रेडियो ट्रेनिंग भी होती है और लोक सेवा से भी। इन केंद्रों से कैंपस की आवाज गांवों तक और गांवों की आवाज शहरतक लौटकर आती है। इन रेडियो स्टेशन पर प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस अफसर, डॉक्टर, कृषि विशेषज्ञ से लेकर अनेक विभागों के लोग साक्षात्कार के माध्यम से अपनी बात रखते हैं। कई केंद्रों पर लेटेस्ट अपडेट से लेकर मौसम की जानकारी दी जाती है। रेडियो मेरठ की आवाज के साथ संवाद का काम कर रहा है।

छह एफएम रेडियो

पहला सामुदायिक स्टेशन रेडियो आईआईएमटी 90.4 मेगाहर्ट्ज, रेडियो नगीन 107.8 एफएम, रेडियो मेरठ 89.6, आजाद हिंद रेडियो 90.0 एफएम और रेडियो सीसीयू 90.8 मेगाहर्ट्ज हैं। वहीं, आकाशवाणी का एफएम रिले रेनबो स्टेशन है जो दिल्ली से संचालित किया जाता है।

कार्यक्रम जो समुदाय को हैं समर्पित

रेडियो मेरठ 89.6 एफएम की आर. जे. तनवी बताती हैं कि वर्ष 2020 में शुरूआत से यह समुदाय के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर लोगों तक जानकारी पहुंचा रहा है। स्टेशन में एआई की मदद से अपने कार्यक्रमों को बेहतर बनाने की ट्रेनिंग ले रहे हैं। सुबह में 8 से 12 का प्रोग्राम लाइव चलता है।

जय हिंद जय भारत से करते हैं अभिवादन

                                          

सुभारती आजाद हिंद रेडियो 90.0 एफएम पर आरजे गुडमार्निंग नहीं, बल्कि जय हिंद जय भारत से अभिवादन करते हैं। आरजे आसपास की महिलाओं की परेशानी, समाधान और महिलाओं के विचारों को गांव से शहर तक लाने का काम कर रहे हैं। रेडियो आईआईएमटी में आरजे आदेश सुबह देवराग और शाम को चलती का नाम गाड़ी, आशीष और प्रयास अनेक कार्यक्रमों के माध्यम से बुजुर्ग लोगों के गानों की फरमाइश पूरा करते हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।