सूखी मिट्टी पोषक तत्वों के अवशोषण को रोक सकती है      Publish Date : 01/05/2026

सूखी मिट्टी पोषक तत्वों के अवशोषण को रोक सकती है

                                                                                                           प्रो0 आर. एस. सेंगर 

सूखी मिट्टी (मृदा) फसलों और पर्यावरण पर अत्यंत विनाशकारी प्रभाव डालती है, जिसमें पोषक तत्वों का कम अवशोषण, सूक्ष्मजीवों की गतिविधि में कमी, पोषक तत्वों का कम अवशोषण और फसल पैदावार में 50% से अधिक की भारी गिरावट शामिल है। यह मिट्टी को सख्त, बंजर और अत्यधिक क्षरण (Erosion) के प्रति संवेदनशील बना देती है, जिससे मिट्टी के पानी को सोखने की क्षमता खत्म हो जाती है। सूखी मिट्टी के प्रमुख प्रभाव निम्नलिखित हैं:-

कृषि और फसल पर प्रभाव:

कम पोषक तत्व अवशोषण: मिट्टी में नमी की कमी के कारण पौधे पोषक तत्व (जैसे नाइट्रोजन) नहीं ले पाते है।

फसल की वृद्धि में रुकावट: पानी की कमी से पौधों में तनाव बढ़ता है, जड़ें सही तरीके से विकसित नहीं हो पातीं और फसल का उत्पादन बहुत कम हो जाता है।

कीट और रोगों में वृद्धि: सूखी जमीन में उगी फसलें कीड़ों और बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाती हैं।

मिट्टी के स्वास्थ्य और भौतिक संरचना पर प्रभाव:

                                

मिट्टी का सख्त होना और दरारें: सूखी मिट्टी कड़क हो जाती है और उसमें बड़ी दरारें पड़ जाती हैं, जिससे भूमि की उर्वरता कम हो जाती है।

माइक्रोबियल गतिविधि में कमी: मिट्टी के तापमान में वृद्धि के कारण सूक्ष्मजीव (बैक्टीरिया/कवक) मर जाते हैं, जो मिट्टी के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक होते हैं।

जल धारण क्षमता में कमी: सूखी मिट्टी पानी को अवशोषित नहीं कर पाती, जिससे हल्की बारिश का पानी भी बह जाता है।

पर्यावरणीय और अन्य प्रभाव:

मृदा अपरदन (Soil Erosion): सूखी और बंजर मिट्टी हवा और पानी के साथ आसानी से कटकर बह जाती है।

जैव विविधता का नुकसान: मिट्टी की नमी खत्म होने से उस पर निर्भर रहने वाले छोटे जीव-जंतुओं के आवास नष्ट हो जाते हैं।

कार्बन उत्सर्जन में वृद्धि: सूखी मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ का अपघटन (decomposition) प्रभावित होता है, जिससे कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन बढ़ सकता है।

सुधार के उपाय:

                             

जैविक पदार्थ (Organic Matter): मिट्टी में भरपूर मात्रा में खाद या गोबर की खाद मिलाएं।

मल्चिंग (Mulching): मिट्टी की सतह को ढक कर रखें ताकि नमी बची रहे।

गहरी जुताई: मिट्टी को ढीला करने के लिए समय-समय पर जुताई करें।

सूखी मिट्टी के दीर्घकालिक परिणामों से बचने के लिए, मृदा स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए उपयुक्त कृषि पद्धतियां अपनाना आवश्यक है।

यह सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करता कि आपकी मिट्टी में कितने पोषक तत्व हैं बल्कि इस पर निर्भर करता है कि पौधे उन्हें प्राप्त कर पा रहे हैं या नहीं।

और सूखी मिट्टी में — अक्सर ऐसा नहीं हो पाता है।

असल में क्या होता है?

  • पोषक तत्वों को जड़ों तक पहुँचने के लिए पानी की जरूरत होती है।
  • सूखी मिट्टी में पोषक तत्वों का प्रसार (diffusion) बहुत धीमा हो जाता है।
  • जड़ों का पोषक तत्वों से संपर्क कम हो जाता है।
  • सूक्ष्मजीवों (microbes) की गतिविधि घट जाती है, जिससे पोषक तत्वों का मुक्त होना कम हो जाता है।

परिणाम क्या होता है?

  • छुपी हुई पोषक तत्वों की कमी (Hidden deficiency)।
  • फसल का खाद पर कमजोर प्रतिक्रिया देना।
  • डाले गए उर्वरकों की बर्बादी।
  • वृद्धि और उत्पादन में कमी।

सच्चाई यह है:

  • आपकी मिट्टी में पोषक तत्व मौजूद हो सकते है परन्तु  फिर भी पौधा “भूखा” रह सकता है।
  • पानी सिर्फ सिंचाई के लिए नहीं होता है यह पोषण पहुँचाने का का एक सशक्त माध्यम भी होता है।
  • नमी नहीं = पोषक तत्वों की गति नहीं = अवशोषण नहीं।

क्या आपने देखा है कि खाद देने के बाद भी फसल कमजोर रह जाती है?

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।