
अप्रैल का महीना पौधों की वृद्वि के लिए अनुकूल Publish Date : 17/04/2026
अप्रैल का महीना पौधों की वृद्वि के लिए अनुकूल
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी
अप्रैल के महीने में तुलसी, पदीना, टमाटर, करिपत्ता, धनिया और मिर्ची के जैसे छोटे पौधों में नई कोपलें और फल फूल आदि खिलने लगते हैं। इसी प्रकार से जो फूल वाले पौधे हैं उनमें भी कोंपले निकलती हैं और नकी वृद्धि भी अच्छी होती है। इसलिए निरंतर इन पौधों के विकास पर नजर बनाए रखने की आवश्यकता होती है। यदि गमने में जगह कम है या पौधों का विकास धीमा है, तो बड़े पौधों को स्थानांतरित कर देना चाहिए। नए नए गमले में ब्रेनिज होल होना बहुत जरूरी होता है ताकि अतिरिक्त पानी गमले के नीचे की ओर से निकल जाए।
इस मौसम में पौधों को नियमित धूप मिलने से गर्मी के चलते गमलों की मिट्टी जल्दी सूख जाती है। छोटे पौधों की जड़ें सतही रहती हैं, इसलिए उन्हें नियमित पानी देना जरूरी होता है। पानी देने से पहले मिट्टी की नमी जरूर जांच लेनी चाहिए। ज्यादा पानी देने से भी जड़ें सड़ भी सकती हैं। अधिकतर आपका प्रयास यह होना चाहिए कि पानी सुबह यह शाम समय ही देने को पा्रथमिकता दें, क्योंकि दोपहर की तेज धूप में पानी जल्दी सूख जाता है। सही समय और मात्रा में पानी देने से छोटे पौधे हरे भरे और स्वस्थ बने रहते हैं।
पोषण पर भी ध्यान दें

यह महीना पौधों के विकास का सर्वोत्तम समय है। ऐसे में यदि पौधों की पत्तियां फीकी पड़े तो यह पोषण की कमी का संकेत होता है। अतः हर दस या पन्द्रह दिन में बर्मी कंपोस्ट, गोबर खाद या किचन वेस्ट गमलों में डालना लाभदायक रहता है। जल्दी असर के लिए तरल खाद का भी उपयोग किया जा सकता है, लेकिन ध्यान रखें, अधिक खाद देने से पौधों की जड़ें और तने सड़ सकते हैं और पौधों की मृत्यु भी हो सकती है।
अपनी बगिया को कीटों और रोगों से भी बचाएं
गर्मी बढ़ने और नई कलियों के उबरने के साथ ही पौधों में कीड़े और रोग भी बढ़ने लगते हैं जो कि छोटे पौधों के लिए हानिकारक होते हैं। इस समय पौधों की पत्तियों और तनों की नियमित जांच करना बेहद जरूरी होता है। इसलिए सप्ताह में 1 या 2 बार नीम के तेल से स्प्रे करने से पौधों में लगने वाले कीटों एवं रोगों से छुटकार मिलता है। अप्रैल की तेज धूप छोटे पौधों के लिए हानिकारक हो सकती है। अगर पत्तियाँ जलने या मुरझाने लगे तो समझ जाइए कि धूप अधिक पड़ रही है। ऐसे में पौधों को सीधे सूरज की रोशनी में न रखें, बल्कि हल्की छांव या फिल्टर सनलाइट में रखें।
सुबह की धूप पौधों के लिए लाभदायक होती है, जबकि दोपहर में सैडनेट का प्रयोग करना चाहिए। छतों पर रखे पौधों पर ग्रीन कलर का शेडनेट का उपयोग करेंगे तो आपकी बगिया के पौधे बचे रहेंगे। 4 से 6 घंटे की धूप रोजाना पौधों के लिए जरूरी होती है। वहीं, पानी की कमी से फलों का आकार 20 से 25 प्रतिशत तक छोटा हो सकता है, इसलिए पोषण और पानी दोनों का ध्यान रखें। पौधों में यदि नाइट्रोजन की कमी हो जाती है, तो 30 से 40 प्रतिशत तक कम फल उत्पादन होता है।
अगर आप पुराने और रोगग्रस्त पौधों की कटाई समय पर करते रहें साथ ही उनकी छंटाई भी करते रहें तो पन्द्रह से बीस प्रतिशत तक फल आपके पौधों पर बढ़ सकते हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
