
आपूर्ति संकट के बावजूद किसानों को तय दाम पर मिलेंगे यूरिया-डीएपी Publish Date : 02/04/2026
आपूर्ति संकट के बावजूद किसानों को तय दाम पर मिलेंगे यूरिया-डीएपी
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
सरकार ने कहा, घरेलू उत्पादन प्रभावित होने बाद भी खरीफ सीजन से पहले उर्वरक का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।
केंद्र सरकार ने भरोसा दिलाया है कि आगामी खरीफ सीजन से पहले देश में यूरिया और डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है। सरकार के मुताबिक, 45 किलो यूरिया की बोरी 266 रुपये और 50 किलो की डीएपी बोरी 1,350 रुपये में मिल रही है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते वैश्विक बाजार में उर्वरकों और उनके कच्चे माल की कीमतों में तेजी आई है; जिससे घरेलू उत्पादन पर असर पड़ा है।

अधिकारियों के अनुसार, अमोनिया, सल्फर और सल्फ्यूरिक एसिड जैसे जरूरी कच्चे माल की लागत बढ़ने और गैस आपूर्ति प्रभावित होने से देश में यूरिया उत्पादन में अस्थायी गिरावट आई। शुरुआती दौर में उत्पादन करीब 30,000 से 35,000 टन प्रतिदिन तक घट गया था, लेकिन स्थिति अब धीरे-धीरे सुधर रही है। गैस आपूर्ति बढ़कर करीब 80 फीसदी तक पहुंच गई है, जिससे उत्पादन में सुधार की उम्मीद है।
देश में खाद का पर्याप्त स्टॉक
सरकार के आंकड़ों के अनुसार, फिलहाल देश में कुल खाद का स्टॉक करीब 180 लाख मीट्रिक टन है, जो पिछले साल के 147 लाख टन के मुकाबले काफी अधिक है। वहीं, आगामी खरीफ सीजन के लिए कुल मांग 390 लाख टन आंकी गई है, जबकि पिछले साल बिक्री 361 लाख टन रही थी। सप्लाई को बनाए रखने के लिए सरकार रूस, मोरक्को, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, जॉर्डन, कनाडा, अल्जीरिया, मिस्त्र और टोगो जैसे देशों से वैकल्पिक स्रोत विकसित कर रही है, ताकि आयात पर निर्भरता कम की जा सके।
फसलों के लिए पर्याप्त उर्वरक भंडार

देश में खाद की उपलब्धता को लेकर सरकार ने बड़ा अपडेट दिया है। रसायन और उर्वरक मंत्रालय के अनुसार, भारत के पास गर्मी की फसलों के लिए पर्याप्त उर्वरक भंडार मौजूद है और संप्लाई को और मजबूत करने के लिए वैकल्पिक स्रोतों से भी खरीद की जा रही है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है और आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो रही है। सरकार का फोकस यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद मिल सके, ताकि फसल उत्पादन पर कोई असर न पड़े और कृषि क्षेत्र की रफ्तार बनी रहे।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
