
ड्रैगन फ्रूटः एक आधुनिक, पोषक और औषधीय फल Publish Date : 30/03/2026
ड्रैगन फ्रूटः एक आधुनिक, पोषक और औषधीय फल
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं अन्य
ड्रैगन फ्रूट, हिलोकेरस अनडाटस (Hylocereus Undatus) जो कि केक्टेसि (Cactaceae) परिवार से संबंधित होता है। ड्रैगन फ्रूट को दुनिया भर में पहले एक सजावटी पौधे के रूप में और फिर एक फल फसल के रूप में मान्यता प्राप्त हुई है। यह फल अपने मीठे, हल्के स्वाद, आकर्षक रंग और अद्भुत बनावट के लिए प्रसिद्ध है।
इसका फूल इतना सुंदर है कि इसे ‘‘नोबल वुमन‘‘ या ‘‘क्वीन ऑफ द नाइट‘‘ का उपनाम दिया गया है। इसे होनोलुलु रानी, स्ट्रॉबेरी नाशपाती व पिताया फल (मतलब ‘‘पपड़ीदार फल’) के नाम से भी जाना जाता है। यह एक विदेशी फल है, जिसकी उत्पत्ति मध्य अमेरिका, मैक्सिको और दक्षिण अमेरिका में हुई थी, लेकिन अब यह एशिया सहित दुनिया के 20 से अधिक देशों में सफलतापूर्वक उगाया जा रहा है़।

वियतनाम ड्रैगन फ्रूट का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। ड्रैगन फ्रूट जो कि एक भारतीय फल नहीं है लेकिन इसके लाजवाब स्वाद और लाभकारी फायदों के कारण भारत में भी इसकी मांग काफी बढ़ गयी है। भारत में, इसकी खेती की शुरुआत 90 के दशक में हुई और तब से लेकर अब तक इसकी फसल की खेती के क्षेत्र में लगातार विस्तार होता रहा है।
भारत में इसकी खेती असम, गुजरात, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और पंजाब आदि राज्यों में की जा रही है। बिहार में भी ड्रैगन फ्रूट की खेती 2014 के आसपास शुरू हुई, जिसमें किशनगंज जिला सबसे आगे रहा। कटिहार, पूर्णिया, अररिया, सुपौल, जमुई, नालंदा और नवादा जैसे अन्य जिले भी इस उष्णकटिबंधीय फल की खेती में सक्रिय रूप से कर रहे हैं।
कृषि उद्यमों को बढ़ावा देने और फसल की खेती में विविधता लाने के लिए, बिहार कृषि विभाग के बागवानी निदेशालय ने राज्य में ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत 40 प्रतिशत सब्सिडी की घोषणा भी की है।
बिहार के किसानों को सब्सिडी के कारण इकाई लागत में कमी से शुरुआती वित्तीय बोझ में काफी कमी आ सकती है, जिससे यह उद्यम अधिक सुलभ और बड़े कृषक समुदाय के लिए आकर्षक बन सकता है।

इस आकर्षक एवं रहस्यमय फल का रंग लाल-गुलाबी होता है और गूदा मुंह में पिघलाने वाला होता है। काले रंग का खाने योग्य बीज जबरदस्त पोषक गुणों के साथ गूदे में समाया हुआ होता है।
इसकी चमड़े जैसी त्वचा में हरे रंग की पंक्तियाँ और फल के बाहरी हिस्से पर प्रमुख पपड़ीदार स्पाइक्स होती हैं, जो ड्रैगन की तरह दिखाई देती हैं इसीके चलते इसको फल को ड्रैगन फ्रूट के नाम से भी जाना जाता है।
विभिन्न देशों में, आमतौर पर तीन प्रकार के ड्रैगन फ्रूट खेती की जाती है। सभी फल चमड़ेदार और थोड़ी पत्तीदार त्वचा वाले होते हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
