इलेक्ट्रिक गाड़ियां समस्याएं भी पैदा कर रहीं      Publish Date : 24/03/2026

इलेक्ट्रिक गाड़ियां समस्याएं भी पैदा कर रहीं

                                                                                                         प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

आजकल इलेक्ट्रिक गाड़ियों की शान में खूब कसीदे पढ़े जा रहे हैं, लेकिन ऐसा करने से पहले यह भी जान लें कि ये गाड़ियां जी का जंजाल भी बन सकती हैं। इसका भुक्तभोगी मैं खुद हूं। मैंने एक नामी कंपनी की स्कूटी खरीदी। हालांकि, सरकार की तरफ से सब्सिडी भी मुझे दी गई थी, फिर भी, उसकी कीमत पेट्रोल वाली स्कूटी से काफी ज्यादा थी। खैर, वह स्कूटी जब घर आई, तो मैं काफी खुश था। उसे चलाने भी लगा। मगर करीब छह महीने हुए थे कि उसमें कुछ दिक्कतें आने लगीं। मैं उसे लेकर सर्विस सेंटर गया, जहां मुझे बताया गया कि इसके पूर्जे आसानी से नहीं मिलते, इसलिए कुछ दिनों के बाद आकर ठीक कराना उचित होगा। कुछ दिनों के बाद मेरी उस समस्या का निराकरण हो भी गया, लेकिन करीब डेढ़ साल होते-होते उस स्कूटी की बैटरी जवाब देने लगी। असल समस्या तभी आई, जब मैं बैटरी बदलवाने के लिए सर्विस सेंटर गया, तो उसकी कीमत इतनी थी कि उसके सामने मुझे पेट्रोल वाली स्कूटी भी सस्ती लगी। आखिरकार मैंने उस स्कूटी को कबाड़ के हवाले कर दिया।

                                

कहने का अर्थ यह है कि एक तो इलेक्ट्रिक गाड़ियों के कल-पुर्जे आसानी से नहीं मिलते, दूसरे उनकी कीमत भी ज्यादा होती है। इतना ही नहीं, इनकी बैटरी भी एक बड़ी समस्या है। यहां मैं उसके निपटान की चर्चा नहीं कर रहा हूं। फिर, इसका चार्जिंग प्वाइंट खोजना भी किसी बड़ी जंग जीतने से कम नहीं है। भले ही दिल्ली-एनसीआर में कई चार्जिंग प्वाइंट दिखते हैं, लेकिन चार्ज करने में लगने वाले समय को देखते हुए उन प्वाइंट पर लंबे समय तक खड़ा रहना भला किसे पसंद आएगा?

दिक्कत यह भी है कि अभी इलेक्ट्रिक गाड़ी लेकर आप लंबी यात्रा पर नहीं निकल सकते। पेट्रोल-डीजल के पंप तो आपको आसानी से दिख जाएंगे, लेकिन ईवी चार्जिंग प्वाइंट नहीं। इसी कारण, इलेक्ट्रिक गाड़ियां लोगों को आकर्षित नहीं कर पा रही हैं। जो कुछ गाड़ियां हम सड़कों पर देखते हैं, वे वास्तव में लोकल दूरी तय करने के लिए इस्तेमाल की जाती हैं, जैसे ऑफिस जाने के लिए, या आसपास घूमने के लिए। लंबी दूरी के लिए तो पेट्रोल-डीजल की गाड़ियां ही पसंद की जाती हैं।

अब जबकि सरकार की तरफ से जागरूकता फैलाने की लगातार कोशिशें की जा रही रही हैं, अतः ऐसे में जरूरी है कि ईवी से जुड़ी बुनियादी समस्याओं का समाधान जल्द ही किया जाए। अगर लोगों को परेशानी न हो, तो ये गाड़ियां वाकई अच्छी हैं, लेकिन कंपनियों को भी समझना होगा कि लोग गाड़ियां अपनी सुविधा बढ़ाने के लिए खरीदते हैं, परेशानी बढ़ाने के लिए नहीं। सरकार सोच-समझकर ही आगे बढ़े।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।