
अमावस्या और पूर्णिमा का कृषि विज्ञान: एक व्यापक वैज्ञानिक दृष्टिकोण Publish Date : 17/02/2026
अमावस्या और पूर्णिमा का कृषि विज्ञान: एक व्यापक वैज्ञानिक दृष्टिकोण
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता
आपने चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण बल और उसके पौधों पर प्रभाव के बारे में बहुत सुना होगा इस विषय पर कामधेनु वैदिक संस्था द्वारा महत्वपूर्ण जानकारी साझा की जा रही है-
चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण प्रभाव और पौधों पर असर
अमावस्या का प्रभाव

- गुरुत्वाकर्षण बल कम होता है - अमावस्या के दिन चंद्रमा का खिंचाव कम होता है।
- पौधों में पोषक तत्वों का संचलन - इस दिन पोषक तत्व जड़ों की ओर अधिक गति करते हैं।
- समुद्र में ज्वार-भाटा - जैसे समुद्र में पानी पीछे हटता है, वैसे ही पौधों में तरल पदार्थ नीचे की ओर खिंचते हैं।
पूर्णिमा का प्रभाव
- गुरुत्वाकर्षण बल अधिक होता है - पूर्णिमा के दिन चंद्रमा का खिंचाव अधिक होता है।
- पौधों में ऊपर की ओर खिंचाव - पोषक तत्व जड़ों से ऊपर की ओर खिंचते हैं।
- पौधे पोषक तत्वों से पूर्ण होते हैं - पूरा पौधा पोषक तत्वों से भरा होता है।
किसानों के लिए व्यावहारिक सिफारिशें

कटाई-छंटाई (प्रूनिंग) के लिए उचित समय
- अमावस्या पर छंटाई करें - इस दिन पौधे के ऊपरी भाग में पोषक तत्व कम होते हैं, इसलिए नुकसान कम होता है।
- पूर्णिमा पर छंटाई न करें - इस दिन पौधे पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, कटाई से अधिक नुकसान होगा।
स्प्रे और उपचार के लिए उचित समय
- अमावस्या पर स्प्रे करें - इस दिन छिड़काव किए गए पोषक तत्व पूरे पौधे में अच्छी तरह अवशोषित होते हैं।
- जीवामृत का प्रयोग - विशेष रूप से अमावस्या और पूर्णिमा पर जीवामृत का छिड़काव लाभदायक है।
कीट नियंत्रण का वैज्ञानिक पहलू
कीटों के जीवन चक्र और समय
- अमावस्या पर अंडे - अधिकांश हानिकारक कीट (70-80%) अमावस्या के दिन अंडे देते हैं।
- जीवामृत का सटीक समय पर छिड़काव - अमावस्या के दिन छिड़काव से कीटों के अंडों का विकास रुकता है।
- समय की महत्ता - अगर अमावस्या पर छिड़काव छूट जाए तो कीट नियंत्रण करना कठिन हो जाता है।
प्राकृतिक खेती के लाभ
- रसायनिक कीटनाशकों की आवश्यकता नहीं - नियमित रूप से अमावस्या और पूर्णिमा पर जीवामृत का छिड़काव करने से
- आर्थिक लाभ - महंगे रसायनों पर खर्च कम होता है।
- पर्यावरण हितैषी - प्राकृतिक तरीके से खेती करने से पर्यावरण को नुकसान नहीं होता।
व्यावहारिक सुझाव
1. कैलेंडर बनाएँ - अमावस्या और पूर्णिमा की तारीखें पहले से नोट करें
2. जीवामृत पहले से तैयार रखें - समय पर छिड़काव के लिए
3. त्योहारों पर भी ध्यान दें - जैसे दिवाली अमावस्या पर होती है, इस दिन भी छिड़काव अवश्य करें।
4. क्लस्टर में काम करें - आसपास के किसान मिलकर एक साथ उपचार करें तो बेहतर परिणाम मिलेंगे।
यह वैज्ञानिक दृष्टिकोण न केवल परंपरागत ज्ञान को समझने में मदद करता है, बल्कि आधुनिक जैविक खेती के लिए भी महत्वपूर्ण है। चंद्रमा के चरणों का सही उपयोग करके, किसान कम लागत में बेहतर फसल उत्पादन कर सकते हैं और पर्यावरण को भी स्वस्थ रख सकते हैं।
जय जवान जय किसान

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
