
उत्पादकता और उद्यमिता से बढ़ेगी आय Publish Date : 15/02/2026
उत्पादकता और उद्यमिता से बढ़ेगी आय
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता
केंद्र सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती किसानों की आय बढ़ाने की रही है। बजट में इसी को ध्यान में रखकर कृषि, ग्रामीण विकास और उससे जुड़े क्षेत्रों के लिए प्रविधान किए गए हैं। सरकार का मानना है कि केवल परंपरागत खेती से किसानों की आमदनी नहीं बढ़ेगी, बल्कि इसके लिए उत्पादकता बढ़ानी होगी। उनको नकदी व उच्च-मूल्य फसलों की ओर जाना होगा। इसके लिए तकनीक को भी खेतों तक पहुंचाना पड़ेगा। ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्रालय का सम्मिलित बजट अब 4.35 लाख करोड़ से अधिक हो गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का दावा है कि यह बजट विकसित, स्वावलंबी और रोजगारयुक्त गांवों के निर्माण को मजबूती देगा। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि धनराशि आवंटन के साथ योजनाओं को जमीन पर उतारना और उनका क्रियान्वयन ही असली कसौटी होगी।
वर्ष 2026-27 के बजट में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के लिए कुल 1,62,671 करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया है। अकेले कृषि विभाग को 1,40,528.78 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जिसमें कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान पर 9,967 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इससे फसलों की नई किस्में, बेहतर तकनीक और जलवायु के अनुकूल खेती को बढ़ावा मिल सकेगा। हालांकि, कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र को पिछले वर्ष के मुकाबले करीब नौ हजार करोड़ रुपये कम मिले हैं। फिर भी खेती की गुणवत्ता एवं उत्पादकता बढ़ाने, जोखिम घटाने और आय के नए स्त्रोत तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। खेती के साथ गांवों को आर्थिक विकास का केंद्र बनाने का संकल्प भी दिख रहा है, क्योंकि ग्रामीण विकास केलिए 2,73,108 करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया है, जो पिछले वर्ष से लगभग 21 प्रतिशत अधिक है।

संकेत साफ है कि किसान केवल फसल उगाने तक सीमित न रहे, बल्कि पशुपालन, मत्स्य पालन, बागवानी और मूल्यवर्धन जैसी गतिविधियों से भी जुड़ें। ऐसे सोच के तहत मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों के विकास की घोषणा की गई है। जाहिर है इससे मछली उत्पादन बढ़ेगा, गांवों में रोजगार बढ़ेगा और महिला समूहों एवं मछली उत्पादकों को बोजार से जोड़ा जाएगा। किसानों की लागत कम करने के लिए खाद और उर्वरकों पर सरकार ने 1,70,944 करोड़ रुपये की सब्सिडी का प्रविधान किया है। सरकार का दावा है कि सस्ती खाद उपलब्ध होने से फसल की उत्पादन लागत घटेगी और किसानों. को सीधा लाभ मिलेगा।
बजट में खेती के विविधीकरण पर विशेष जोर दिया गया है। परंपरागत फसलों के साथ-साथ नारियल, काजू, कोको, चंदन, बादाम और अखरोट जैसी उच्च-मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देने की योजना है। नारियल के पुराने और कम उत्पादन देने वाले बागानों के पुनरुद्धार के लिए विशेष योजना लाई जाएगी। तटीय क्षेत्रों में नारियल और काजू उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा। सरकार ने लक्ष्य रखा है कि वर्ष 2030 तक भारतीय काजू और कोको को प्रीमियम वैश्विक ब्रांड के रूप में स्थापित किया जाए। इसके लिए उत्पादन के साथ-साथ प्रोसेसिंग, मूल्यवर्धन और ब्रांडिंग पर भी काम किया जाएगा। इससे किसानों को बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है।
हर जिले में खुलेंगे ‘शी-मार्ट’: लखपति दीदी योजना को आगे बढ़ाते हुए बजट में ‘शी-मार्ट’ की व्यवस्था की है। हर जिले में सामुदायिक स्वामित्व वाले रिटेल केंद्र बनेंगे, जहां स्वयं सहायता समूहों से तैयार उत्पादों को बाजार मिलेगा।
उत्पादकता बढ़ाने के लिए एआइ टूल की मदद लेंगे, जिससे किसानों की निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होगी
खेती के लिए ‘भारत विस्तार’नाम से बहुभाषी एआइ टूल की घोषणा की गई है, जो एग्रीस्टेक पोर्टल और आइसीएआर की कृषि पद्धतियों को जोड़कर किसानों को फसल, मौसम और बाजार से जुड़ी सलाह देगा। इसके जरिये किसानों की निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होगी। वित्त मंत्री ने कहा कि यह टूल भारत की लगभग 46.1 प्रतिशत श्रम-शक्ति को लक्ष्य में रखता है, जो खेती पर निर्भर है। छोटे एवं सीमांत किसानों को सहयोग कर विकसित भारत के लक्ष्यों के साथ तालमेल बिठाने के लिए एक बड़ी छलांग है।
- फसलों की नई किस्में, बेहतर तकनीक और जलवायु के अनुकूलखेती को बढ़ावा मिल सकेगा।
- किसानों को पशुपालन, मत्स्य पालन और वागवानी जैसी गतिविधियों से भी जोड़ने पर फोकस रहेगा।
- विशेषज्ञों के अनुसार राशि आवंटन के साथ योजनाओं को जमीन पर उतारने और उनके क्रियान्वयन की चुनौती होगी।
- मछलियों पर शून्यं शुल्क किया मृत्स्य पालन के लिए भारतीय जहाजों द्वारा एक्सक्लूसिव इकोनमिक जोन और खुले समुद्र में पकड़ी गई मछलियों पर कोई ड्यूटी नहीं लगाई जाएगी। ऐसी मछलियों को विदेशी बंदरगाहों पर उतारने को सामान का निर्यात माना जाएगा।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
