प्री बोर्ड में कम अंक आना असफलता नहीं, सुधार-सीखने का अवसर      Publish Date : 18/01/2026

प्री बोर्ड में कम अंक आना असफलता नहीं, सुधार-सीखने का अवसर

                                                                                                                                                                    प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

यूपी बोर्ड की वर्ष-2026 की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षाएँ की प्री-बोर्ड परीक्षाएँ मंगलवार से शुरू हो रही हैं। यह 16 जनवरी तक चलेंगी। पहली बार यह परीक्षाएं भी बोर्ड की तर्ज पर हो रही हैं। वहीं, बोर्ड प्रश्नपत्रों से ही यह परीक्षाएं कराई जा रही हैं। मंडलीय मनोवैज्ञानिक कीर्ति का कहना है कि प्री बोर्ड परीक्षा में कम अंक आना असफलता नहीं, वरन यह अगली मुख्य परीक्षा के लिए सुधार एवं सीखने का स्वर्णिम अवसर है। प्री बोर्ड परीक्षा में सफलता केवल पढ़ाई पर नहीं, बल्कि सही मानसिक तैयारी पर भी निर्भर करती है। सकारात्मक सोच, संतुलित दिनचर्या और आत्मविश्वास विद्यार्थियों को तनावमुक्त रखकर बेहतर प्रदर्शन की ओर ले जाते हैं।

डर नहीं, सही सोच अपनाएं: प्री बोर्ड परीक्षा को लेकर भी परीक्षार्थियों में घबराहट और भय होना स्वाभाविक है, लेकिन यह समझना आवश्यक है कि यह परीक्षा अंतिम नहीं, बल्कि अभ्यास का एक महत्वपूर्ण चरण है। इसका उद्देश्य परीक्षार्थियों को उनको तैयारी का वास्तविक आकलन कराने और कमियों को पहचानने में सहायताकरना है। यदि इसमें अपेक्षित अंक न भी आएं तो इसे असफलता मानने के बजाय सीखने का बेहतर अवसर समझना चाहिए।

                                                                  

सकारात्मक आत्म संवाद विकसित करें: परीक्षार्थियों का दिमाग वही मानता है, जो वे बार-बार खुद से कहते हैं। इसलिए सकारात्मक वाक्यों जैसे "मैंके मेहनत की है" और "मैं बेहतर कर सकता व सकती हूं" को अपनाना चाहिए। यह आत्मविश्वास बढ़ाता है और परीक्षा के समय डर को कम करता है।

व्यवहारिक समय सारिणी बनाएं: पढ़ाई के लिए एक संतुलित और व्यवहारिक टाइम टेबल बनाना आवश्यक है। लंबे समय तक पढ़ने के बजाय 45-50 मिनट की पढ़ाई और छोटे ब्रेक दिमाग को सक्रिय रखते हैं। कठिन विषयों को उस समय पढ़ना चाहिए जब एकाग्रता अधिक हो, जिससे सोखने की क्षमता बेहतर होती है।

तुलना से दूरी बनाए रखें: अक्सर परीक्षार्थी अपने अंकों और तैयारी की तुलना दूसरों से करने लगते हैं, जिससे तनाव और आत्म संदेह बढ़ता है। यह समझना जरूरी है कि हर विद्यार्थी की क्षमता, रुचि और सीखने की गति अलग होती है। तुलना करने के बजाय अपने लक्ष्य और प्रगति परध्यान देना मानसिक रूप से अधिक स्वस्थ रहता है।

तनाव और घबराहट को नियंत्रित करें: परीक्षा के दबाव में घबराहट होना सामान्य है, लेकिन सरल श्वास-प्रश्वास तकनीकों जैसे गहरी सांस लेना मन को शांत करने में सहायक होता है। नियमित रूप से कुछ मिनटों का ध्यान या गहरी सांस का अभ्यास एकाग्रता बढ़ाता है और मानसिक संतुलन बनाए रखता है।

नींद और पोषण का रखें ध्यान छात्र-छात्राएं

                                                          

परीक्षा के समय कई विद्यार्थी नींद और भोजन की अनदेखी कर देते हैं, जिसका सीधा असर स्मरण शक्ति और एकाग्रता पर पड़ता है। पर्याप्त नीद और हल्का, पौष्टिक भोजन दिमाग को संक्रिय और शांत बनाए रखने में 'महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

परीक्षा से एक दिन पहले संयम रखें, मोबाइल से दूर रहें

पढ़े प्री बोर्ड परीक्षा से एक दिन पहले केवल हुए विषयों का दोहराव करना चाहिए और नए टापिक पढ़ने से बचना चाहिए। इस दिन मन को शांत रखना, मोबाइल से दूरी बनाना और आत्मविश्वास बनाए रखना परीक्षा के लिए लाभकारी होता है।

गलतियों को सीख में बदलें

प्री बोर्ड में कम अंक आना निराशाजनक लग सकता है, लेकिन इसे आत्म आलोचना का कारण नहीं बनाना चाहिए। यह परीक्षा अपनी गलतियों से सीखने और उन्हें सुधारने का अवसर देती है। सही दृष्टिकोण अपनाने से यही अनुभव आगे की बोर्ड परीक्षा में सफलता की नींव बनता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।