सतत कृषि विकास हेतु नवाचार बढ़ते कदम      Publish Date : 31/12/2025

                सतत कृषि विकास हेतु नवाचार बढ़ते कदम

                                                                                                                                                              प्रोफेसर आर. एस. सेगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता

कृषि वैज्ञानिको के अनुसंधान अन्नदाता एवं ऊर्जा दाता ने हमारे देश को न सिर्फ खाद्यान्न में बल्कि दुग्ध उत्पादन में भी विश्व के शिखर पर खड़ा कर दिया है और आज भारत फल एवं सब्जियों में दूध मसाले एवं जूट में वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ा उत्पादक देश है। यद्यपि भूमि और श्रम की मात्रा में कमी आई कृषि उत्पादन एवं उत्पादकता में 1950 से अभी तक 6 से 70 गुना वृद्धि हुई है, जिससे देश ने खाद्य सुरक्षा और पोषण सुरक्षा के क्षेत्र में विकास किया है। भारत में सतत कृषि विकास हेतु कई नवोन्मेषी पहल हुई है।
भविष्य में कृषि को टिकाऊ बनाने हेतु इन क्षेत्रों को अनुसंधान एवं प्रसार के माध्यम से और मजबूती प्रदान करनी होगी। वैश्विक स्तर पर भारतीय कृषि का सकल घरेलू उत्पादन में 8% योगदान है। दुनिया की कृषि योग्य भूमि का केवल 9% और भौगोलिक क्षेत्र का मात्र 2.3% होते हुए भी भारत वैश्विक स्तर पर 18% आबादी का भरण पोषण करता है।

एक तरफ जहां देश की लगभग एक तिहाई आबादी गरीबी रेखा से नीचे रहती है और हमारी भूमि द्रव्यमान का लगभग 80% क्षेत्र सूखा बाढ़ और चक्रवात के प्रति संवेदनशील है, वहीं दूसरी तरफ भारत में पर्याप्त जैव विविधता है। लगभग 8% दुनिया के प्रलेखित पशु और पौधों की प्रजातियां हमारे देश में पाई जाती है। कृषि क्षेत्र देश के सकल घरेलू उत्पादन में 18% का योगदान करता है तथा देश के 50% से अधिक लोगों को रोजगार भी देता है।

                                                      

संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा निर्धारित सतत विकास लक्ष्य को वर्ष 2030 तक प्राप्त करने के क्रम में सबसे बड़ी चुनौती सभी रूप में गरीबी को समाप्त करना है एवं 103 देशों में रहने वाले 689 मिलियन बच्चों सहित 1.45 बिलियन गरीब लोगों को पोषण युक्त भोजन प्रदान करना है। सतत विकास लक्ष्य पर्यावरण को नुकसान पहुंचा बगैर पृथ्वी पर संसाधनों को बनाए रखने के साथ-साथ कृषि उपज बढ़ाने का लक्ष्य रखते हैं।

सतत कृषि विकास से क्या है तात्पर्य

सतत कृषि विकास तीन प्रमुख लक्षण को एकीकृत करता है। पर्यावरण सुरक्षा आर्थिक समृद्धि अजीविका विकास दूसरे शब्दों में सतत कृषि विकास उसे प्रक्रिया को कह सकते हैं जिसे वर्तमान की कृषि आधारित सभी ज़रूरतें पूरी हो तो जाएं, किंतु भविष्य की पीढ़ियों की जरूरत के साथ समझौता भी ना करना पड़े। इसलिए सतत कृषि विकास में प्राकृतिक और मानव दोनों ही संसाधनों के उचित प्रबंधन का प्रमुख महत्व है।

मानव संसाधनों में वर्तमान और भविष्य के लिए सामाजिक जिम्मेदारियां पर विचार करना शामिल है जैसे किसान परिवारों के काम करने और रहने की स्थिति ग्रामीण समुदायों की जरूरत तथा सभी नागरिकों की खाद्य स्वास्थ्य और पोषण सुरक्षा पर ध्यान देना। प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन के अंतर्गत भविष्य के लिए सभी प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण उचित दोहन एवं रखरखाव शामिल है। यही कारण है कि हमारी सरकार ने सतत कृषि विकास के तीनों आयामों पर ध्यान देते हुए आगे बढ़ाने की बात कही है।

स्मार्ट कृषि हेतु डिजिटल क्षेत्र में पहल

सरकार द्वारा किसानों को नवीनतम कृषि प्रौद्योगिकी क्योंकि मल्टीमीडिया के माध्यम से प्रधान करने हेतु किसान सारथी ऐप को प्रारंभ किया गया है। यह भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की एक संयुक्त पहल है। अब तक 2014 096 किसानों ने 368 कृषि विज्ञान केंद्र के साथ 50124 गांव को कवर करते हुए किसान सारथी में पंजीकरण कराया है और इनकी संख्या में लगातार इजाफा होता जा रहा है।

आईसीएआर ने किसान 2.0 एग्री ऐप्स नेवीगेशन के लिए कृषि एकीकृत समाधान लॉन्च किया है, जिसकी परिकल्पना ई-कृषि में मदद करने और भारत में स्मार्टफोन आधारित कृषि को बढ़ावा देने के लिए की गई है। यह ऐप एक एग्री ग्रेटर एंड्राइड मोबाइल ऐप में आईसीएआर संस्थाओं द्वारा विकसित 300 से अधिक कृषि संबंधी ऐप को एकीकृत करता है।

गांव गांव में इंफ्रास्ट्रक्चर व सुविधाओं के विकास के लिए सरकार ने एक लाख करोड रुपए के एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर फंड का प्रावधान किया है। 20 लाख करोड रुपए किसान क्रेडिट कार्ड से देना लक्षित किए हैं, ताकि किसानों की क्षमता बढ़ सके। वह अपने उत्पादों को रोककर बाद में अच्छा दाम मिलने पर भेज सके। छोटे किसानों की खेती की लागत कम हो वह टेक्नोलॉजी से जुड़े उत्पादों की प्रोसेसिंग पैकेजिंग मार्केटिंग कर सके। इसके लिए 10000 एफपीओ बनाने का काम शुरू हो चुका है, जिस पर सरकार 6.8 64 करोड रुपए खर्च कर रही है। किसानों की फसलों को प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की भरपाई के रूप में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने फसल बीमा योजना के माध्यम से अब तक 1.30 लाख करोड रुपए दिए जा चुके हैं। पीएम किसान सम्मन निधि के रूप में देश के करोड़ों किसानों के बैंक खातों में करोड़ों रुपया जमा कराया गया है।

                                                              

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय कृषि के सतत विकास हेतु प्रतिबद्ध है। भारत सरकार विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से किसानों  तक पहुंच रही है। कई किसान जागरुक है और वह इन परियोजनाओं का फायदा भी ले रहे हैं। सरकार द्वारा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, फसल बीमा योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, गोकुल योजना, कृषि मंदिरों का नवीनीकरण एवं विपणन हेतु कृषि पोर्टल साहित्य आदि लगभग दर्जनों ऐसी परियोजनाओं का क्रियान्वयन कर रही है जिससे कृषि क्षेत्र में सतत विकास हो एवं टिकाऊ बन सके साथ ही कृषकों की आमदनी में भी वृद्धि हो सके। देश के काफी किसान ऐसे हैं जो इनका लाभ भी ले रहे हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।