
बोर्ड परीक्षा 2026 के लिए अभी से प्रारंभ करें तैयारी Publish Date : 30/12/2025
बोर्ड परीक्षा 2026 के लिए अभी से प्रारंभ करें तैयारी
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
पंख मिले तो उड़ जाना।
साथ मिले तो रूक जाना।।
संघर्ष मिले तो लड़ जाना।
मान मिले तो झुक जाना।।
सीबीएसई शिक्षा बोर्ड और यूपी बोर्ड की परीक्षा आगामी महीनों में आयोजित की जाने वाली है। इसके लिए अभी से तैयारी प्रत्येक छात्र को प्रारंभ कर देनी चाहिए साथ ही माता-पिता को भी अपने बच्चों को समय देकर एग्जामिनेशन की तैयारी में सहायोग करना चाहिए।
सीबीएसई स्कूलों की ओर से बोर्ड परीक्षाओं के डर को बच्चों को अपने मन से पूरी तरह से खत्म करने के लिए विशेष पहल की जा रही है जिसमें 2 से 3 प्री बोर्ड परीक्षाओं के साथ ही विषय वार प्रैक्टिस टेस्ट भी बोर्ड परीक्षा की तर्ज पर कुछ स्कूलों में करना शुरू कर दिया गया है। अन्य स्कूलों को भी इसी तर्ज पर परीक्षार्थियों को अतिरिक्त टेस्ट से शामिल करना चाहिए, जिसका लाभ बोर्ड परीक्षा में छात्रों को मिल सकेगा।

प्रयोगात्मक परीक्षाएं 1 जनवरी से प्रारंभ होगी जिनकी तैयारी के साथ ही स्कूलों में बोर्ड परीक्षार्थियों को बारीकी से तैयारी की जा रही है, जिससे दक्षता आधारित प्रश्न पत्र में पूछे जाने वाले 50% प्रश्नों का उत्तर परीक्षार्थी बिना कठिनाई के दे सकें। वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षा में सीबीएसई की 10वीं और 12वीं की कक्षाओं की दोनों बोर्ड परीक्षाओं में 50 प्रतिशत प्रश्न दक्षता आधारित 20 प्रतिशत प्रश्न चयनात्मक उत्तर वाले एमसीक्यू बहुविकल्पीय और 30 प्रतिशत प्रश्न पारंपरिक वर्णनात्मक शॉर्ट एवं लॉन्ग आंसर के प्रश्न पूछे जाएंगे।
पेपर में नहीं बोर्ड की व्यवस्था में किया गया है बदलाव
छात्र रखें इन बातों का ध्यान
- गहरी समझ विकसित करें और कॉन्सेप्ट को स्पष्ट करें।
- केस बेस्ट और सोर्स बेस्ड प्रश्नों का लगातार अभ्यास करते रहें।
- विभिन्न विश्व के रेगुलर प्रैक्टिस टेस्ट में भाग ले जिससे उनका डर दूर हो सकेगा।
- समय प्रबंधन और उत्तर प्रस्तुतीकरण पर काम करें।
- छात्रों को अब केवल किताबों को पूरा करने पर ही संतुष्ट नहीं होना चाहिए।
- इस समय स्कूलों के शिक्षकों की भूमिका है महत्वपूर्ण।
- अभी है उचित समय है कि स्कूल अपनी शैक्षिक रणनीति में बदलाव करें।
- वर्ष भर निरंतर योग्यता आधारित प्रश्नों का अभ्यास कराया जाना चाहिए।
- विद्यालय में दो से तीन प्री बोर्ड परीक्षा अनिवार्य रूप से आयोजित की जाए।
- छात्रों के लिए मॉक टेस्ट रिमेडियल क्लासेस और एनालिटिकल अभ्यास सत्र चलाए जाने चाहिए।
- शिक्षकों को भी प्रश्न पत्र निर्माण की नई दिशा में प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
