
मिट्टी जाँच की तकनीक एवं उसका महत्व Publish Date : 10/12/2025
मिट्टी जाँच की तकनीक एवं उसका महत्व
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 वीरेन्द्र सिंह गहलान
खेत की मिट्टी में पौधों की समुचित वृद्वि और विकास के लिए पोषक तत्वों की उपलब्ध मात्रा, भौतिक, रासायनिक एवं जैविक गुणों का रासायनिक परीक्षणों के माध्यम से किया गया आंकलन और साथ ही मिट्टी के विभिन्न विकारों जैसे मृदा की लवणीयता, क्षारीयता एवं अम्लीयता आदि की जाँच करना ही मिट्टी की करना कहलाता है।
मिट्टी की जाँच की आवश्यकता क्यों है?
पौधों की समुचित वृद्वि एवं विकास के लिए सोलह पोषक तत्व आवश्यक माने जाते हैं। इन पोषक तत्वों का उपयोग खेत की फसल की आवश्यकता के अनुसार ही किया जाना चाहिए। इससे फसलों का उत्पादन अधिक से अधिक प्राप्त होता है और इसके साथ ही मिट्टी की उर्वरा शक्ति में भी कोई गिरावट नहीं आती है। अतः फसलों में उर्वरकों की उचित मात्रा का उपयोग करने की जानकारी मिट्टी की जाँच के द्वारा ही प्राप्त की जा सकती है। मिट्टी का परीक्षण कराना सामान्यतया निम्न बातों की जानकारी प्राप्त करने के लिए आवश्यक होता हैः
मृदा के भौतिक, रासायनिक एवं उसके जैविक गुणों का सटीक आंकलन करने के लिए।
- मिट्टी में पोषक तत्वों की उपलब्ध मात्रा की सटीक जानकारी प्राप्त करने के लिए।
- समस्याग्रस्त मृदा की पहचान एवं उसके सुधार हेतु मृदा सुधारक की मात्रा की गणना करने के सम्बन्ध में।
- मृदा की उर्वरता मानचित्र तैयार करने के लिए।
- मृदा के प्रकार के अनुसार ही फसल का चयन करने के लिए।
- रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग सटीक मात्रा में करने के लिए।
- मृदा ‘‘स्वास्थ्य कार्ड’’ तैयार करने के लिए।
- मृदा के विकारों का प्रबन्धन करने के लिए।
मिट्टी की जाँच कब करानी चाहिए?
मिट्टी की जाँच कराने के लिए मिट्टी का नमूना फसल की बुवाई करने से लगभग एक महीने पूर्व लेकर मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में भेज देना चाहिए, जिससे मिट्टी की जाँच की रिपोर्ट फसल की बुवाई करने से पहले ही मिल जाए। मृदा का पी.एच. विद्युत चालकता एवं उपलब्ध कार्बनिक पदार्थ की प्रत्येक मौसम में तथा मुख्य, द्वितीयक एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों की एक से दो वर्ष के अन्तराल पर जाँच अवश्य करवानी चाहिए।
मिट्टी का नमूना लेने के लिए आवश्यक उपकरण एवं सामग्री
मिट्टी की जाँच के लिए खेत का नमूना लेने के लिए एक खुरपी, फावड़ा, ऑगर, पैमाना/फीता, प्लास्टिक की बाल्टी/प्लास्टिक की ट्रे, खरल मूसल, छलनी, पॉलीथिन की थैलियाँ, गत्ते के डिब्बे, प्लास्टिक की शीट, पेन्सिल/बॉल पेन, कागज का सूचक पत्रक (पर्ची), मॉटरल (लकड़ी) और धागा या सुतली आदि।
औजारों का चयन करनाः
मिट्टी की ऊपरी सतह का नमूना लेने के लिए खुर्पी, या ट्यूब/ऑगर, अधिक गहराई या गीली मिट्टी से नमूना लेने के लिए पोस्ट हॉल ऑर तथा सख्त मिट्टी का नमूना लेने के लिए बर्मे (स्क्रू ऑगर) का प्रयोग करना चाहिए। गड्ढ़े खोदने के लिए कस्सी, फावड़े अथवा लम्बी छड़ वाले ऑगर का प्रयोग करना चाहिए।
मिट्टी की जाँच के लिए नमूना लेने की विधिः
अ) खाली खेत में निशान लगाने का तरीकाः
मिट्टी की जाँच के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण यह होता है कि किसान भाई मिट्टी का सही नमूना किस प्रकार से एकत्र करें? इसके लिए सबसे अधिक आवश्यक यह होता है कि मिट्टी का नमूना इस प्रकार से लिया लाए कि वह जिस खेत से लिया जा रहा है उस नमूने में पूरे खेत की मृदा के अंश उपलब्ध होना चाहिए। इसके लिए खेत के विभिन्न स्थानों से नमूने लिए जाते हैं और इन सभी नमूनों को एकसाथ मिलाकर एक नमूना बनाया जाना चाहिए। किसी खेत से मिट्टी लेने का वैज्ञानिक तरीका-
- सर्वप्रथम खेत की बनावट, ढलान, रंग, फसल की उपज/बढ़वार आदि के अनुसार, बोयी गई फसल और खेत के क्षेत्रफल के अनुसार कई भागों में बाँट कर लेना चाहिए।
- प्रत्येक खेत का आकार एक एकड़ से अधिक नहीं होना चाहिए, यदि पूरा खेत बहुत अधिक समानता वाला हो तो एक हेक्टेयर (2.5 एकड़) से एक या दो नमूने लेना ही पर्याप्त रहता है।
- इसके बाद खेत में टेढ़े मेढ़े चलते हुए 15 से 20 स्थानों पर निशान लगाने चाहिए।
- निशान लगाए गए स्थानों से घास, कंकड़, पत्थर, फसल के अवशेष और कूड़ा-करकट आदि को साफ कर देना चाहिए।
- लगाए गए निशानों वाले स्थानों से खुरपी के द्वारा ‘वी (V)’ आकार का 15 से.मी. गहरा गड्ढा बनाकर उसमें से थोड़ी सी मिट्टी निकाल कर गड्ढा बना लेना चाहिए।
- अब खुरपी की सहायता से इस गड्ढे की दीवारों से लगभग 2.5 से.मी. मोटी ऊपर से नीचे तक समान मोटाई वाली एक परत को खुरचकर ले लेना चाहिए।
- खुरच कर ली गई इस मिट्टी को एक साफ और सूखी प्लास्टिक की बाल्टी, प्लास्टिक की ट्रे अथवा किसी साफ कपड़े पर एकत्र कर लेनी चाहिए और इस मिट्टी को अच्छी तरह से मिला देना चाहिए।
- इस प्रकार से पूरे खेत में लगाए गए निशानों से मिट्टी का नमूना लेकर सभी स्थानों से ली गई मिट्टी को आपस में अच्छी तरह से मिला लेना चाहिए। नमूने लेते समय इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि अलग-अलग गहराई से लिए गए मिट्टी के नमूनों को अलग-अलग ही रखना चाहिए।
मिट्टी के नमूना को जाँच हेतु तैयार करने की विधिः
खेत के अलग-अलग स्थानों से लिए गए मिट्टी के नमूनों का एक ढेर बनाकर उसे चार भागों में बाँट कर आमने सामने के दो भागों को फेंक देना चाहिए और शेष भागों को पुनः आपस में मिलाकर फिर से चार भागों में बाँट लेना चाहिए। इसी प्रकार से मिट्टी के नमूने की मात्रा को कम करते हुए बाद में लगभग आधा कि.ग्रा. मिट्टी की मात्रा को साफ कपड़े की एक थैली बनाकर उसमें इस मिट्टी को भरकर मिट्टी की जाँच कराने के लिए इसके सूचना पत्रक में समस्त आवश्यक सूचनाओं के साथ मिट्टी के नमूने के साथ बाँधकर मृदा परीक्षण लैब (प्रयोगशाला) को भेज देना चाहिए।
खेत से नमूना लेने की उचित गहराईः
- अन्न, दलहन, तिलहन एवं सब्जियों वाली फसलों के लिए मिट्टी के नमूने को दो सतह (0-15 और 15-30 से.मी.) की गहराई से लेना उचित रहता है।
- मृदा के सुधार के लिए मिट्टी का नमूना लेने के लिए 90 से.मी. गहरा गड्ढ़ा खोदकर 0-15, 15-30, 30-60 और 60-90 से.मी. की गहराई से आधा कि.ग्रा. मिट्टी का नूमना लेना चाहिए।
- बागीचा स्थापित करने के लिए 0-15, 15-30, 30-60, 60-90, 90-120, 120-150 और 150-180 से.मी. तक की गहराई से अलग-अलग नमूना उठाना चाहिए।
मिट्टी के नमूना के साथ दी जाने वाली आवश्यक सूचनाओं के लिए पत्रक (पर्ची) पर अंकित की जाने वाली सूचनाएं-
किसान एवं खेत से सम्बन्धित सभी आवश्यक सूचनाओं को कार्ड या पत्रक (पर्ची) पर लिखकर उसे मिट्टी के नमूना के साथ रखकर तथा थैली को ऊपर से बाँधकर मृदा परीक्षण हेतु प्रयोगशाला के लिए भेज देना चाहिए। मृदा परीक्षण के लिए मिट्टी के नमूना के साथ जो सूचनाएं दी जानी आवश्यक है उनका विवरण इस प्रकार से है-
(अ) किसान से सम्बन्धित सूचनाएं:- सम्बन्धित किसान का नाम, पिता/पति का नाम, शिक्षा, व्यवसाय, ग्राम/मोहल्ला, पोस्ट ऑफिस (पिन कोड), विकास खण्ड़, तहसील, जिला, राज्य एवं किसान से सम्पर्क करने के लिए उसका टेलीफोन/मोबाईल नम्बर।
(ब) खेत से सम्बन्धित सूचनाएं:- खेत का नंबर/पहचान, खसरा/खतौनी नं0, सिंचाई का उपलब्ध साधन (ट्यूबवेल/नहर/अन्य), सिंचित/असिंचित, खेत की स्थिति (समतल या ढालू), पिछली फसल में दी गई जैविक खाद, रासायनिक उर्वरक एवं अन्य रासायनिक पदार्थों की मात्रा, खेत का क्षेत्रफल (बीघा/एकड़/हेक्टेयर)।
(स) मिट्टी की जाँच से सम्बन्धित सूचनाएं:-
किसान किस उद्देश्य से मिट्टी की जाँच कराना चाहते हैं?, मिट्टी की पिछली जाँच कब कराई गई थी?, मिट्टी की जाँच के सम्बन्ध में क्या विचार है?, खेत से सम्बन्धित यदि कोई समस्या है तो उसका उलेख अवश्य करना चाहिए, खेत से नमूना लेने की तिथि, मिट्टी की जाँच हेतु नमूना प्रयोगशाला में भेजने की तिथि।
मिट्टी की जाँच के लिए नमूना कैसे और कहाँ भेजना चाहिए?
मिट्टी की जाँच के लिए नमूने को कृषि विभाग से सम्बन्धित किसी अधिकारी की सहायता से सरकारी/गैर सरकारी संस्था, केन्द्र/राज्य के कृषि विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केन्द्र, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के संस्थान में स्थिति मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में उपरोक्त समस्त सूचनाओं को पर्ची के साथ ही मिट्टी के नमूना को जाँच के लिए मृदा परीक्षण प्रयोगशाला को भेज देना चाहिए।
खेत से मिट्टी का नमूना जाँच हेतु कब नहीं लेना चाहिए?
जहाँ तक सम्भव हो सके वहाँ तक खाली खेत से ही मिट्टी का नमूना लेना चाहिए। यदि किसी कारण विशेष से खाली खेत से नमूना लेना सम्भव न हो सके तो खड़ी फसल की कटाई से पूर्व फसल की लाईनों के बीच से मिट्टी का नमूना लेना चाहिए। ध्यान रहे कि वर्षा, सिंचाई, उर्वरक प्रयोग के बाद तथा खेत में फसल के अवशेषों को जलाने के तुरंत बाद मिट्टी का जाँच हेतु नमूना नहीं लेना चाहिए।
जाँच हेतु मिट्टी का नमूना लेते समय अपनायी जाने वाली आवश्यक सावधानियाँ
- जहाँ तक सम्भव हो खेत की गीली मिट्टी का नमूना नहीं लेना चाहिए। लेकिन फिर यदि ऐसा नमूना लेना आवश्यक हो तो मिट्टी के उस नमूने को छाया में अच्छी तरह से सुखाने के बाद ही जाँच के लिए प्रयोगशाला को भेजना चाहिए।
- खेत में खड़ी फसल से मिट्टी का परीक्षण हेतु नमूना नहीं लेना चाहिए। यदि आवश्यक हो तो फसल की लाईनों के बीच से ही मिट्टी का नमूना लेना चाहिए, जिसमें रासायनिक उर्वरक कम से कम एक महीना पूर्व डाली गई हो।
- सड़क के किनारे, रास्तों के पास से, नाले, पेड़ के पास से, उर्वरक या अन्य कोई कोई रासायनिक पदार्थ डाले या रखे गए हों तो उस खेत से मिट्टी परीक्षण हेतु नमूना नहीं लेना चाहिए।
- एकत्र किए गए मिट्टी के नमूनों को उर्वरक के बोरों, बैटरी, डीजल, तेल, राख एवं रासायनिक पदार्थों से दूर रखना चाहिए।
- याद रखें कि फसल की बुवाई करने से लगभग एक महीना पूर्व मिट्टी का नमूना लेकर मृदा परीक्षण प्रयोगशाला को परीक्षण के लिए अवश्य ही भेज देना चाहिए।
- परीक्षण के लिए नमूने लेने के लिए जंग लगी हुई खुरपी,/फावड़े आदि का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
