
नई कृषि क्रॉन्तिः अब ड्रोन, एआई और रोबोट के माध्यम से होगी खेती Publish Date : 29/11/2025
नई कृषि क्रॉन्तिः अब ड्रोन, एआई और रोबोट के माध्यम से होगी खेती
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता
-
नीति आयोग के द्वारा किया रोडमैप तैयार, किसानों की बढ़ेगी आय।
-
कृषिगत लागत को 40 प्रतिशत तक कम होने और कृषि उत्पादन में 60 प्रतिशत तक की वृद्वि होने का है अनुमान।
यदि केन्द्र सरकार की यह योजना परवान चढ़ी तो देश में अब खेती हल-बैल के द्वारा नहीं, बल्कि ड्रोन, कृत्रिम बुद्विमतता (एआई), रोबोट और बीज की जीन एडीटिंग के द्वारा की जाए्रगी। इससे पानी की बर्बादी शून्य होगी और किसानों की आय मौजूदा स्तर से दोगनी भी हो सकती है। इसके सम्बन्ध में नीति आयोग के द्वारा देश में खेती की दिशा और दशा बदलने के लिए आगामी पाँच वर्षों के लिए एक नया रोडमैप जारी किया गया है।
नीति आयोग ने विजन डॉक्यूमेंट ‘‘रीइमैजिनिंग एग्रीकल्चर: रोडमैप फॉर फ्रंटियर टेक्नोलॉजी लेड ट्राँसफार्मेशन’’ के रूप में आगामी पाँच वर्षों के लिए नया रोडमैप जारी किया गया है।
इस डॉक्यूमेंट में कृषि में 100 फीसदी आत्मनिर्भरता प्रदान करने के लिए ऐसी तकनीकों को चयन किया गया है, जिनके माध्यम से देश के कृषि क्षेत्र में क्रॉन्तिकारी बदलाव की आशाएं हैं। यह तकनीकें जलवायु परिवर्तन, पानी की कमी, मिट्टी की थकान और बाजार की अनिश्चितता को आदि को समाप्त करने में सहायता प्रदान करेंगी। नीति आयोग के द्वारा प्रद्वत इस रोडमैप पर प्रभावी अमल करने से आगामी पाँच वर्षों (2026-30) में देश में कृषि लागत का 40 प्रतिशत कम होने का अनुमान जताया गया है।
वर्तमान में कृषि लागत को ही किसानों की खुशहाली और खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाने में सबसे बड़ी बाधा माना जाता है। रोडमैप के द्वारा कृषि के उत्पादन में 60 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी भी होगी।

- ड्रोन फार्मिंग के द्वारा एक घंटे में 50 एकड़ के क्षेत्र पर कीटनाशकों का छिड़काव और 80 प्रतिशत दवा की बचत सम्भव।
- रोबोटिक्स के द्वारा बुवाई, निराई, कटाई सब-ऑटोमैटिक होने के चलते कृषि मजदूरों की कमी होगी दूर।
- इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) के माध्यम से मिट्टी की नमी, पीएच और पोषक तत्व 24 घंटे और सातों दिवस मोबाईल पर होंगे उपलब्ध।
- सेटेलाइट इमेजरी के द्वारा बादल पार कर फसल की लाईव तस्वीरें और सूखा एवं बाढ़ आदि एलर्ट जारी।
- जीन एंडिटिंग (सीआरआइएसपी आर) के माध्यम से मात्र दो वर्षों में सूख, कीट और नमक रोधी नई किस्में की जाएंगी विकसित।
- आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस एवं मशीन लर्निंग से मौसम, कीट और बीमारियों का शत-प्रतिशत सटीक अनुमान लगाया जा सकेगा।
- बिग डेटा एनालिटिक्स से प्रत्येक गाँव, प्रत्येक फसल का अलग-अलग ‘डिजिटल फार्मूला’।
- ब्लॉकचेन के क्षरा बीज से लेकर बाजार तक एक पारदर्शी चेन का विकास और नकली खाद एवं बीज का पूर्ण समाप्ति होगी सम्भव।
- प्रीसिजन फॉर्मिंग के तहत प्रत्येक पौधे को अलग खाद एवं पान उपलब्ध होने से लागत में 30 प्रतिशत तक की होगी बचत।
- वर्टिकल फॉर्मिंग के माध्यम से शहरों में घरों की छतो पर 10 मंजिला खेत, एक एकड़ यानी 10 एकड़ यील्ड पर की जाएगी फॉर्मिंग।
- हाइड्रोपोनिक्स अर्थात बिना मिट्टी और 90 प्रतिशत तक कम पानी की आवश्यकता से पूरे वर्षभर ली जा सकेंगी फसलें।
- एरोपोनिक्स के माध्यम से पानी की एक बूंद भी नहीं होगी बर्बाद।
लक्ष्य प्राप्ति हेतु निर्धारित कदम
वर्ष 2026:
पायलट प्रोजेक्टः
- 10 राज्यों में ड्रोन, एआई हब स्थापित, एक लाख एकड़ जमीन की गई कवर।
वर्ष 2027: .
डिजिटल पहुँचः
- 50 प्रतिशत किसानों को दिए जाएंगे मुफ्त ऐप, सेटेलाइट डेटा और आइओटी किट्स।
वर्ष 2028:
ग्लोबल मार्केटः
- ब्लॉकचेन के माध्यम से सीध निर्यात किया जाएगा 10 लाख टन आर्गेनिक मैटर।
वर्ष 2029:
रोबोट क्रॉन्तिः
- 500 रूपये प्रतिदिन के किराये की दर से रोबोट होंगे उपलब्ध, 50,000 यूनिट डिप्लॉय।
वर्ष 2030:
स्मार्ट विलेजः
- प्रत्येक गाँव में होंगे ‘‘डिजिटल खेत’’ यानी किसानों की आय के दुगुना होने की पूरी गारंटी।
फंडिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का मॉडलः
कृषि-टेक फंडः 50,000 करोड़ रूपये।
ड्रोन दीदीः एक लाख महिलाओं को ट्रेनिंग।
एआई लैबः प्रत्येक जिले में एआई लैब बनाई जाएगी।
- 10 करोड़ किसानों को फ्री स्मार्टफोन वितरित किए जाएंगे।
रोबोट बैंकः एक लाख यूनिट रेंट पर खोला जाएगा।
यह योजना तभी सफल होगी जब किसान, कृषि वैज्ञानिक, उद्यमी, निवेशक और नीति-निर्माता आदि सब एक साथ आएंगे। तकीनकें केवल प्रयोगशालाओं तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए बल्कि यह किसानों के पास और उनके खेतों तक पहुँचनी चाहिए। यह रोडमैप एक ऐसे भविष्य का आहवान है, जहां से भारत विश्व का अन्न भण्ड़ार बन सकेगा।
- बी. वी. आर सुब्रहमण्यम, सीआई, नीति आयोग।
किसानों को इस प्रकार से होगा लाभः
आयः एक एकड़ क्षेत्र में गेहूँ मौजूदा 25,000 रूपयसे बढ़कर वर्ष 2030 में 70,000 रूपये होगा।
लागत होगी कमः योजना के फलीभूत होने से कृषि की लागत 40 प्रतिशत (खाद-पानी और दवा) तक कम हो सकेगी।
उत्पादन में होगी बढ़ोत्तरीः इससे फसलों का उत्पादन 60 प्रतिशत तक बढ़ेगा।
पानी की होगी बचतः 90 प्रतिशत तक हाइड्रो/एरोपोनिक्स विधि का उपयोग होने से पानी की होगी बचत।
बाजार उपलब्धताः शत-प्रतिशत ब्लॉकचेन पर आधारित होगा।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
