मृदा की कम होती उर्वरताः किसानों की बढ़ती चिंता      Publish Date : 26/11/2025

           मृदा की कम होती उर्वरताः किसानों की बढ़ती चिंता

                                                                                                                                                   प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी

खारे पानी की समस्या से बढ़ी चुनौतियाँ

रासायनिक खादों का अतिश्य एवं अविवेकपूर्ण प्रयोग के चलते राजस्थान के जिला अलवर की मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरा अब क्षमता लगातार कम होती जा रही है और इसमें कई पोषक तत्वों की कमी भी सामने आती रही है। हालांकि, कमोबेश यह स्थिति सम्नूर्ण देश में अब स्पष्ट रूप से देखी जा रही है। देश की निरंतर बढ़ती आबादी हेतु खाद्यान्न आपूर्ति करने के लिए कृषि की उत्पादकता को बढ़ाना आवश्यक है। लेकिन फिलहाल स्थिति कोई बहुत अच्छी नहीं है।

अलवर जिले में कृषि उत्पादन बढ़ाने की होड़ ने अलवर जिले में अब मिट्टी की सेहत खराब कर दी है. ऐसे में किसानों की आय दोगुनी करने के सपने पर संकट गहराने लगा है. जिले के किसान फसल की अधिक उपज पाने के लिए अंधाधुंध तरीके से रासायनिक उर्वरक विशेषकर डीएपी और यूरिया का उपयोग कर रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप जमीन की मिट्टी अपनी प्राकृतिक उर्वरा क्षमता लगातार खो रही है। मिट्टी की यह बिगड़ती सेहत अब जिले की कृषि व्यवस्था के लिए खतरे की घंटी बन चुकी है।

मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला की रिपोर्ट में यह चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिनमें 12 हजार मिट्टी नमूनों की जांच में जिंक, आयरन, जैविक कार्बन, पोटाश आदि तत्वों की भारी कमी और फास्फोरस सहित अन्य पोषक तत्वों की कमी भी सामने आई है। जिले में कई स्थानों पर खारा पानी भी मिट्टी के उपजाऊपन में कमी लाने का बड़ा कारण रहा है। वर्ष 2025 में 17 नवंबर तक 8654 नमूने का टेस्ट किया गया है।

अलवर की मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला के अनुसंधान अधिकारी एसपी यादव ने बताया कि हर साल अलवर शहर में संचालित मिट्टी परीक्षण लैब में करीब 12 हजार मिट्टी के नमूनों की जांच की जाती है और इसके लिए जिले में तीन मिट्टी परीक्षण लैब संचालित हैं। इन लैब्स में से एक अलवर, दूसरी राजगढ़ व तीसरी लैब बडौदामेव में स्थापित है। इस वर्ष अब तक अलवर की मिट्टी परीक्षण लैब में 8654 मिट्टी नमूनों की जांच की गई, इनमें 1266 मिट्टी के नमूने स्वयं किसानों, 368 नमूने एनजीओ एवं 7020 मिट्टी के नमूने कृषि विभाग की ओर से लाए गए हैं।

उन्होंने बताया कि इन सैंपल की जांच में उजागर हुआ कि किसानों की ओर से संतुलित उर्वरक उपयोग के बजाय एक ही प्रकार के उर्वरकों का उपयोग किया जा रहा है। मिट्टी में डीएपी और यूरिया का जरूरत से ज्यादा उपयोग खेतों में पोषक तत्वों का अनुपात बिगाड़ रहा है। इसी कारण मिट्टी में आवश्यक 16 पोषक तत्वों में से कई तत्वों की गंभीर कमी सामने आई है। इन पोषक तत्वों में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, जिंक, सल्फर, आयरन जैसे सूक्ष्म तत्वों की कमी मिली है।

मिट्टी की गुणवत्ता खराब होने से उत्पादन भी प्रभावितः

                                                                     

उन्होंने बताया कि अधिक रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता खराब होने से उत्पादन प्रभावित होने के साथ ही जलधारण क्षमता, जैविक सक्रियता और संरचना भी कमजोर पड़ जाती है। उन्होंने बताया कि लगातार रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग मिट्टी में कार्बन स्तर को कम कर देता है। मिट्टी परीक्षण जांच में जिले में जैविक कार्बन, जिंक, पोटाश की कमी मिली है। इसके चलते कृषि विभाग की ओर से किसानों को सुझाव भी दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि जिंक की 60 और आयरन की 45 प्रतिशत कमी से भूमि के बंजर होने का खतरा उत्पन्न हो गया है।

हर फसल से पहले मिट्टी की जांच जरूरीः

उन्होंने बताया कि किसानों को हर फसल से पहले मिट्टी परीक्षण कराना चाहिए। इससे किसानों को पता चल सकेगा कि अगली फसल में अच्छे उत्पादन के लिए किस तत्व की जरूरत होगी। जिले का कोई भी किसान मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला में अपने मिट्टी के नमूने की जांच करा सकता है। इन सैंपल की जांच रिपोर्ट सात दिन में किसान को मिल जाती है।

खारे पानी की समस्या से बढ़ी चुनौतियां:

उन्होंने बताया कि जिले में मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी के साथ पानी की गुणवत्ता भी खेती के लिए बड़ी चुनौती बन रही है। हर साल लगभग 400 से अधिक किसान अपने खेतों के लिए पानी के नमूनों की लैब में जांच करवाते हैं। इन नमूनों की जांच रिपोर्टों में सामने आया कि कई गांवों में सिंचाई के लिए उपलब्ध पानी खारा और कठोर होता जा रहा है। खारे पानी का प्रभाव मिट्टी की संरचना पर पड़ता है, रामगढ़ व राजगढ़ ब्लॉक में पानी व मिट्टी की गुणवत्ता खराब है।

हरी खाद व गोबर की खाद जरूरीः

उन्होंने बताया कि किसानों को सलाह दी जाती है कि अपने खेत में हरी खाद, गोबर की कूड़ी व केंचुए की खाद का अधिकाधिक उपयोग करें। इससे मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ सकेगी। किसान खेतों में एक ही फसल का उत्पादन करने के बजाय बदल-बदल कर फसल का उत्पादन करें, इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ सकेगी।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।