जल बचत कर खेती को दिया एक नया विज्ञान      Publish Date : 22/11/2025

               जल बचत कर खेती को दिया एक नया विज्ञान

                                                                                                                                                     प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी

हिसार की मिट्टी का स्वभाव हमेशा से अनोखा रहा है। यहां खेत सिर्फ अन्न नहीं उगते बल्कि नए विचारों को भी जन्म देते हैं। इसी धरती पर खड़ा चौधरी चरण सिंह कृषि हिसार विश्वविद्यालय आज विज्ञान और समाज के बीच सेतु बन गया है, जिसने जल संरक्षण की दिशा में पूरे देश को एक नई सोच दी है।

जल शक्ति मंत्रालय द्वारा साठे राष्ट्रीय जल पुरस्कार 2024 में विश्वविद्यालय को सर्वेश सर्वश्रेष्ठ संस्थान श्रेणी में प्रथम स्थान मिलना केवल पुरस्कार नहीं बल्कि उसे मूल्य का सम्मान है जो हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय ने किसानों, विद्यार्थियों और वैज्ञानिकों के मन में रोंपा है। यह बताते हैं कि अपनी किसी खेत का हिस्सा नहीं बल्कि कृषि का आत्मा है।

18 नवंबर को नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू स्वयं यह सम्मान हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय को प्रदान कर चुके हैं। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने प्रदेश के किसानों को सीधी बिजाई और काम अवधि वाली धान किस्म के लिए प्रेरित किया।

                                                               

सीधी बिजाई ने मिट्टी में नमी को बचाया, जल खपत कम की और फसल चक्र को संतुलित किया है। विश्वविद्यालय के प्रयासों से लगभग 1 हेक्टेयर क्षेत्र को कपास से धान में बदलने से रोका गया, इससे न केवल भूमि का संतुलन, बल्कि जल संसाधनों पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव भी समाप्त हुआ है। यह उपलब्धि पूरे प्रदेश की कृषि सोच को प्रभावित करने वाली है। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय ने जल संरक्षण को केवल तकनीकि को चर्चा तक नहीं रहने दिया।

विश्वविद्यालय ने किसानों को जागरूक करने के लिए व्यापक कार्यक्रम चलाएं, जिससे यह तकनीकी किसानों के पास पहुंच सकी। हरियाणा के विश्वविद्यालय के हर किसान और वैज्ञानिकों का भविष्य की पीढियों के प्रति वचन है। राष्ट्रपति से प्राप्त सम्मान उन किसानों, वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों के सामूहिक प्रयास का प्रतिफल है, जो पानी की हर बूंद को बचाने को अपना धर्म मानते हैं।

यह बात हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर बी. आर. कांबोज ने कही कि किसान और हमें और ध्यान देना है जल की बचत करके एक नई संस्कृति लोगों के बीच पैदा करनी है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।