
गन्ने की उच्च उपज के लिए अपनाएं ड्रिप सिंचाई विधि Publish Date : 17/11/2025
गन्ने की उच्च उपज के लिए अपनाएं ड्रिप सिंचाई विधि
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी
गन्ने की खेती के दौरान यदि किसान भाई ड्रिप सिंचाई प्रणाली को अपनाएंगे तो इससे पानी सीधा गन्ने की फसल की जड़ों तक पहुँचता है। इस विधि से सिंचाई करने से पानी की बचत तो होती ही है साथ ही गन्ना मोटा एवं लम्बा भी होता है। इसके साथ ही फसल में खरपतवार भी कम पनपते हैं, मजदूरी और समय की बचत होती है और खेत की मृदा की सेहत ठीक रहकर उर्वरता भी बनी रहती है।
देश में गन्ने की खेती लाखों किसानों की आजीविका का मुख्य आधार है। उत्तर प्रदेश में गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। परन्तु, वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन और पानी की कमी आदि समस्याएं इस फसल को कुप्रभावित कर रही है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए ड्रिप सिंचाई तकनीक बहुत लाभकारी सिद्व हो सकती है। इस तकनीक से न केवल पानी की बचत होती है, बल्कि फसल की उपज एवं गुणवत्ता में भी सुधार आता है। पारम्परिक सिंचाई प्रणाली में बहुत अधिक श्रम एवं समय लगता है। ऐसे में ड्रिप सिंचाई प्रणाली एक स्वचालित सिंचाई प्रणाल है और ण्क बार सिस्टम के स्थापित हो जाने के बाद सिंचाई के समय और पानी की मात्रा में बचत होती है। इससे किसान को मेहनत कम करनी पड़ती है और फसल की देखभाल भी अच्छे तरीके से होती है। देश में आज कई गन्ना उत्पादक राज्य इस आधुनिक सिंचाई पद्वति का लाभ उठा रहे हैं।
40 से 60 प्रतिशत तक होती है पानी की बचत
ड्रिप इरिगेशन सिस्टम एक उन्नत सिंचाई प्रणाली है, जिसके अन्तर्गत पादप और ड्रिपर की सहायता से पौधों तक पानी को पहुँचाया जाता है। पानी बूँद-बूँद करके सीधे पौधों की जड़ों तक पहुँचता है जिसके चलते पराम्परिक विधि से सिंचाई करने की अपेक्षा 40 से 60 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है। अधिक पानी चाहने वालनी गन्ने के जैसी फसलों में ड्रिप सिंचाई प्रणाली पानी को स्मार्ट तरीके से बचाती है और फसल की गुणवत्ता एवं उपज दोनों को बढ़ाती है।
25 प्रतिशत तक होता है गन्ने का अधिक उत्पादन

सरदार वल्लभभाई पटेल, कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ0 राकेश सिंह सेंगर बताते हैं कि ड्रिप सिंचाई प्रणाली के तहत पानी केवल आवश्यक मात्रा में ही दिया जाता है, जिससे फसल को अधिक नमी प्राप्त नहीं हो पाती है। इसके साथ ही इस सिंचाई प्रणाली से करने से फसल में खरपतवारों की वृद्वि भी कम होती है, क्योंकि खेत में पानी केवल पौधों के हिस्सों को ही दिया जाता है। ड्रिप सिंचाई प्रणाली को अपनाने वाले किसान की गन्ने की फसल की उपज में 20 से 25 प्रतिशत तक वृद्वि दर्ज की गई है।
गन्ने की खेती में पानी की काफी अधिक मात्रा में खपत होती है। सिंचाई करने की पारम्परिक विधि से पानी की बर्बादी होने के साथ ही मृदा एवं फसल का नुकसान भी होता है। ऐसे में ड्रिप सिंचाई इस समस्या का एक टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल समाधान है। इस तकनीक के माध्यम से पानी श्रेष्ठ प्रबन्धन, फसल की उत्पादकता और आर्थिक स्थिरता आदि के समेत सभी स्तरों पर किसान को इसका लाभ प्राप्त होता है।
पानी सीधे पौधों की जड़ों तक ही पहुँचता है
ड्रिप सिंचाई प्रणाली की स्थापना एक चरबद्व तरीके से की जाती है। इसके अन्तर्गत सबसे पहले भूमि को समतल बनाया जाता है, जिससे कि पानी एक समान रूप से प्रवाहित हो सके। इसके बाद, खेत में पाइपलाईन एवं ड्रिपलाईन का डिजइन तैयार किया जाता है, जिससे पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुँच सके। फिल्टर सिस्टम पानी की शुद्वता को सुनिश्चित् करता है, जबकि पम्प सिस्टम दबाव और प्रवाह को नियंत्रित करता है। हालांकि इस पूरे सिस्टम की नियमित रूप से देखभाल, मॉनिटरिंग करने की आवश्यकता होती है।
- डॉ0 आर. एस. सेंगर, कृषि वैज्ञानिक, सरदार वल्लभभाई पटेल, कृषि विश्वविद्यालय, मेरठ।
ड्रिप सिंचाई प्रणाली पर सब्सिडी दे रही है सरकार
ड्रिप सिस्टम को स्थापित करने का शुरूआती खर्च अधिक होता है, परन्तु निरंतर उपयोग करने पर इसमें लगाया गया पैसा वसूल किया जा सकता है। पानी, उर्वरक, बिजली और श्रम की बचत से कुल लागत कम होती जाती है और किसान की आय में वृद्वि होती है। सरकार के द्वारा ड्रिप सिंचाई प्रणाली की स्थापना हेतु किसानों को 50 से 70 प्रतिशत तक की सब्सिडी भी दी जा रही है। किसान भाई सब्सिडी को प्राप्त करने के लिए अपने जिले के उद्यान विभाग से सम्पर्क कर सकते हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
