
भारत का प्रतिबिंब उत्तराखंड Publish Date : 15/11/2025
भारत का प्रतिबिंब उत्तराखंड
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
9 नवंबर 2025 अर्थात उत्तराखंड राज्य स्थापना की रजत जयंती का दिन था। भारत वर्ष विविधताओं का देश है, भारत के मस्तक पर मुकुट के रूप में हिमालय की सुंदरता बढ़ाते हुए एक रत्न की भांति उत्तराखंड पूरे भारत की विविध विशेषताओं को अपने में समाहित किए हुए है। धर्म का देश भारत और भारतीय समाज अपने जीवन की पूर्णता के लिए जिन चार धामों की यात्रा करने की इच्छा रखता है उनमें से भगवान बद्रीविशाल का धाम तो यहां है ही साथ ही चार धामों के समान ही पुण्यता और पवित्रता लिए चार धाम स्वयं भी यहां स्थित हैं।
प्रत्येक चोटी और प्रत्येक घाटी जहां स्वयं देवों की उपस्थिति की अनुभूति करवाती है वहीं नदियों की धाराएं पूरे भारत के जीवन प्रवाह का साक्षात्कार भी करवाती रहती हैं। एक गांव से दूसरा गांव केवल अलग पहाड़ पर ही बसा है, केवल इतना ही नहीं है बल्कि एक गांव से सामने नजदीक ही दिखने वाले गांव की भाषा, बोली, पहनावा और खान-पान का परिवर्तन मानो हमे सिखा रहा है कि इन सब विविधताओं में हम एक ही हैं।

गांव के मंदिर और देवता के प्रति अगाध श्रद्धा इस देवभूमि को अनेकों प्रकार की बुराइयों से स्वाभाविक ही बचा कर रखती है। धीरे-धीरे शिक्षा के एक बड़े केंद्र के रूप में आकर लेने वाली राज्य की राजधानी आज केवल भारत नहीं बल्कि भारत के बाहर के शिक्षा प्रेमी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रही है। इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के कारण पर्यटन की दुनिया में भी उत्तराखंड देश भर के नागरिकों की पसंद बन रहा है इसलिए अब केवल यात्रा में आने वाले ही नहीं बल्कि प्रकृति प्रेमी यात्री भी वर्ष भर उत्तराखंड के सुदूर ग्रामों की यात्रा में जा रहे हैं।
25 वर्षों की यह यात्रा उत्तरोत्तर विकास की यात्रा रही है। आज आवश्यकता है कि आध्यात्मिक भारत वर्ष के प्रतिबिंब उत्तराखंड के पर्यावरण और मानव मूल्यों के संरक्षण में आने वाली बाधाओं को समाप्त कर भारत माता के मुकुट में चमकने वाले इस रत्न की चमक को बढ़ाने में हम अपनी भूमिका निभाए।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
